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पटना विश्वविद्याल के कुलपति ने बताया- कैसे थे देश के “बाबूजी”

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VC डॉ. रास बिहारी सिंह ने कहा, विश्वविद्यालय में पहलीबार मनायी जा रही बाबू जगजीवन राम की जयंती, पहले रहती थी छुट्टी

पॉलिटिकल साइंस डिपार्टमेंट हेड प्रो. डॉ. शेफाली रॉय ने कहा, बाबूजी पर शोध की जरूरत

व्याख्यान में कई विद्वान जुटे, छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया

श्रद्धांजलि बाबू जगजीवन राम (5 अप्रैल 1908-6 जुलाई 1986)
स्वतंत्रता सेनानी, सामाजिक न्याय के योद्धा,उपप्रधानमंत्री एवं राजनेता

अब खबरें विस्तार से, फोटो फीचर के साथ

पटना विश्वविद्यालय : बाबू जगजीवन राम की जयंती व्याख्यान में उपस्थित (बाएं से उजले शर्ट में ) पटना कॉलेज के पूर्व प्राचार्य प्रो. डॉ. आरपीएस राही, बतौर मुख्यअतिथि, पटना विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डॉ रास बिहारी सिंह और अंत में बैठीं पॉलिटिकल साइंस की हेड प्रो. डॉ. शेफाली रॉय। फोटो- पंकज कुमार मिश्रा, मौर्य न्यूज18
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पटना विश्वविद्यालय, मौर्य न्यूज18 ।

देश में दो विभूति एक महात्मा गांधी जो “बापू” कहलाए और दूसरे जगजीवन राम जो “बाबूजी” कहलाए। देश के ये दो विभूति एक “बापूजी” तो दूसरा “बाबूजी” के रूप में पूरा देश-पूरी दुनिया याद करती है। 5 अप्रैल 2019 को उन्हीं की 112वीं जयंती मनायी गई। यानि अभी वो जिंदा होते तो 112 साल के होते। पटना विश्वविद्यालय ने शुक्रवार को उन्हें बड़ी श्रद्दापूर्व याद किया। और ये सब हुआ पटना विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डॉ रासबिहार प्रसाद सिंह की पहल पर, जो इस मौके पर बतौर मुख्यअतिथि मौजूद रहे औऱ इसे अंजाम देने में कामयाब रहीं पटना विश्वविद्यालय के पॉलिटिकल साइंस की हेड डॉ शेफाली रॉय। इसमें विद्वातजन तो जुटे ही और कई शोधकर्ता स्टुडेंट भी जुटे। इसकी अध्यक्षता पटना कॉलेज के पूर्व प्राचार्य रिटायर प्रो. डॉ. आरपीएस राही ने की। मौके पर कुछ खास वक्ता मौजूद रहे जिसमें प्रमुख थे बिहार यूनिवर्सिटी के आरएन कॉलेज से डॉ आर के वर्मा, जेपी यूनिवर्सिटी से डॉ अभय कुमार। कार्यक्रम की शुरूआती परिचय पॉल साइंस के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. हरिद्वार शुक्ला ने कराई औऱ वोट ऑफ थैक्स इंस्टीच्यूट ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन के डायरेक्टर डॉ शैलेन्द्र कुमार ने रखा। इसके साथ प्रो विनय सोरेन, डॉ सीमा प्रसाद, डॉ राकेश रंजन, जेआरएफ के स्टुडेंट की उपस्थिति भी सराहनीय रही। इस प्रोग्राम को पॉल साइंस के प्रो. डॉ राकेश रंजन की देखरेख में कियी गयी। जिसमें पॉल साइंस की पीजी स्टुडेंट रितू ठाकुर ने एंकरिंग की भूमिका निभाई।

पटना विश्वविद्यालय के पॉलटिकिल साइंस डिपार्टमेंट में आयोजित बाबू जगजीवन राम जयंती व्याख्यान समारोह में उपस्थित स्टुडेंट फोटो- मौर्य न्यूज18

जयंती पर क्या-क्या हुआ, थोड़ा विस्तार से जानते हैं…

बाबूजी की 112वीं जयंती पटना विश्वविद्यालय के दरभंगा हाउस बिल्डिंग के पॉलिटिकल साइंस विभाग में मानाई गई। विभाग का कमरा नम्बर-16 इसका गवाह बना। यहां सभी जुटे। शुरूआत द्वीप प्रवज्वलित कर किया गया। इसके तुरंत बाद .. छोड़ों कल की बातें, कल की बात पुरानी…जैसी देश भक्तिगीत विभागाध्यक्ष डॉ शेफाली रॉय के नेतृत्व में छात्राओं ने गाये। इस तरह कार्यक्रम की शुरूआत की गई। जयंती पर व्याख्यान रखा गया था – टॉपिक था, बाबू जगजीवन राम और समग्र विकास।

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व्याख्यान की शुरूआत पॉलिटिकल साइंस की विभागाध्यक्ष प्रों डॉ शेफाली रॉय ने की। पहले तो स्वागत भाषण रखा। फिर बाबू जगजीवन राम के जीवन के जीवन परिचय से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि बाबूजी के जीवन पर शोध की बहुत जरूरत है। स्टुडेंट के बीच इसकी जागरूकता पैदा करनी होगी। इसके लिए बाबूजी के किए कार्यो के बारे में विस्तार से शिक्षण संस्थाओं में चर्चा जरूर है। वो भी निरंतर। इस विषय के प्रति छात्रों में रूचि जगानी होगी। प्रो शेफाली ने कहा कि जगजीवन बाबू का सम्पूर्ण जीवन सबको सम्मान देने और सबको साथ लेकर चलने वाली प्रवृति वाली ही रही। जाति, धर्म के बंधन से सदा मुक्त रहकर जीवन जीते रहे। कार्यशैली ऐसी कि बाबूजी को दुनिया के बेहतरीन सोशल साइंटिस्ट कहना गलत नहीं होगा।

रूम नम्बर-16, पॉलिटिकल साइंस डिपार्टमेंट, दरभंगा हाउस, पटना विश्वविद्यालय, बाबूजी की जयंती पर आयोजित व्याख्यान में उपस्थित विद्वान प्रोफेसर व अन्य फोटो- मौर्य न्यूज18

व्याख्यान के मुख्यअतिथि के तौर पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डॉ. रासबिहारी प्रसाद सिंह भी पहुंचे। जिनका गुलदस्ते से स्वागत किया गया। बाबूजी की तस्वीर पर फूल अर्पण हुआ। और फिर कुलपति डॉ रासबिहारी ने कहा कि संभवत पटना विश्वविद्यालय में पहलीबार इस तरह से जयंती मनाई गई। अमूमन इस मौके पर छुट्टी दे दी जाती है। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। जयंती पर विभूति के बारे में चर्चा की जाएगी।

कुलपति ने कहा कि जगजीवन बाबू से मैं कभी मिल नहीं पाया लेकिन पटना के गांधी मैदान में भाषण सुनने गया था। उन्होंने कहा वो पॉलिटिक्स की उंचाइयों को छुआ। दलित समुदाय से होते हुए भी कभी किसी प्रथा-कुप्रथा के प्रति हिंसक प्रवृति नहीं अपनाई । और निडरता पूर्वक समाज के हर तबके के लिए काम करते रहे। इस दौरान उन्होंने सुनी सुनाई कई रोचक प्रसंग भी रखे। और कहा जब वो सरकार में रक्षा मंत्री थे तो किस तरह से जनता के बीच संवाद करते थे। शालिनता के साथ बातों को रखना औऱ जिस किसी भी मंत्रालय का जिम्मा मिलता उसे उंचाई पर ले जाना उनकी आदत में शामिल थी। इसलिए कहा जाता था कि जगजीवन बाबू नहीं उनको मिलने वाला विभाग लक्की माना जाता था। प्रधानमंत्री बनने के रेस में आगे होकर भी नहीं बनाए जाने को लेकर कोई मलाल या विरोध कतई उन्होंने नहीं की। औऱ सासाराम, बिहार से लगातार सांसद चुनकर जाते रहे। निर्विरोध चुनाव जीतना। किसी का उनके खिलाफ नहीं लड़ना। महानता का मिशाल कह सकते हैं। ऐसा कैसे संभव हो पाया ये आज के दौर में शोध का विषय है।

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उन्होंने कहा कि अब विश्विद्यालय में यूजीसी ने बाबू जगजीवन राम को भी विषय वस्तु में जोड़ा है। इसपर शोध करने वाले छात्रों के लिए अधिक से अधिक इस तरह के आयोजन कराए जाते रहे्ंगे। उन्होंने विश्वविद्याल की ओर से विभाग को त्रिमासिक मैगजीन भी निकालने की भी राय दी।

कुलपति की पूरी Speech सुनिए – नीचे दिए लिंक को ऑन करें।

वहीं बिहार यूनिवर्सिटी से आये पॉलिटिकल साइंस के प्रो. डॉ आके वर्मा ने बाबू के विषय में क्रमवद्द जानकारी शेयर की औऱ कहा कि मुझे एक अवसर मिला था, उनसे मिलने का. उस वक्त उन्होंने जो व्यवाहार कुशलता दिखाई। उसके बारे में विस्तार से बातें रखीं। उन्होंने ये भी बताया कि किस तरह से जाति प्रथा के खिलाफ विद्वता से काम लेते रहे। और भेदभाव को कभी पनपने नहीं दिया। ।

वहीं अध्यक्षीय भाषण में पूर्व प्राचार्य प्रो. डॉ आरएसपी राही ने बाबूजी की दूरदर्शिता वाली राजनीति और सहनशीलता वाली सेवा के बारे में विस्तार से बाते रखीं। और कॉलेज से जुड़े कई प्रसंग भी रखे। उन्होंने कहा कि आज के स्टुडेंट को ये सोंचना है कि कल उनका ही है। अब जो कर गए विद्वान उनसे सीख कर कैसे देश को और शिक्षा को, शिक्षण संस्थान को उन्नति की तरफ ले जाएं। कुल मिलाकर इस व्याख्यान में जितनी सारी भी बातें हुए। सभी गुरूजनों की बातों से एक बात जरूर सामने निकल कर आई कि बाबूजी जैसी जीवनशैली अपनाकर बेहतर इंसान बनने की राह आसान होगी।

अब चलते-चलचे बाबू जगजीवन राम का संक्षिप्त परिचय

बाबू जगजीवन राम 5 अप्रैल 1908 बिहार के भोजपुर इलाके के चंदवा गांव में जन्म लिए। और इंद्रानी देवी इनकी जीवन संगनी बनी। 6 जुलाई 1986 को दुनिया को अलविदा कह दिया। इस बीच बिहार से बाहर कोलकत्ता में साइंस की पढाई की। बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय में भी पढ़ाई की। 28 की उम्र में कोलकता से राजनीति का सफर शुरू किया। 1936 में पहलीबार बिहार विधानसभा के सदस्य चुने गए। गवर्नंमेंट ऑफ इंडिया एक्ट1935 के तहत चुनाव हुए थे। अंग्रेज के जमाने की बात है। फिर भारत छोड़ों आंदोलन का हिस्सा बने।

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देश के विभूति बाबू जगजीवन राम

मार्च 1977 से 28 जुलाई 1979 तक देश के उपप्रधानमंत्री रहे। कांग्रेस पार्टी से जुड़े रहे। इससे पहले दो बार रक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई- कार्यकाल रहा 1970 से 1974 फिर 1977-1978। इसके अलावा श्रम मंत्री, रेल मंत्री, संचार मंत्री, कृषि मंत्री कई मंत्रालयों को संभालने की जिम्मेदारी मिलती रही। वर्तमान में इनका इलाका अब सासाराम कहलाता है। इनकी ही बेटी पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार हैं जो कांग्रेस पार्टी की सीनियर लीडर हैं।

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पटना विश्वविद्यालय से मौर्य न्यूज18 की रिपोर्ट

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