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एक क्रांतिकारी ! कह रहा- जिने मरने की किसको पड़ी…,प्यार करले घड़ी दो घड़ी ! Maurya News18

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दिलचस्प है कॉम्यूनिस्ट माइंड से भाजपाई जयनाथ का सफर

हाजीपुर के कॉमरेड जयनाथ, कैसे भाजपाई चौहान हो गए  

कहते हैं, अपनी तो एक धुन है…जहां रहो उंचाइयों पर रहो ।

बोले, इसी फार्मूले पर जीता हूं कि जिंदगी की ना टूटे लड़ी…प्यार कर ले घड़ी दो घड़ी  

खास मुलाकात : जयनाथ चौहान, प्रदेश अध्यक्ष, बिहार भाजपा ओबीसी मोर्चा

नयन, पटना, मौर्य न्यूज18 ।

मेहनती। हिम्मती। जोशीला। क्रांतिकारी। बाहुबली। खून-खराबा। मार-धार। गुंडई करने वालों की खैर नहीं। कॉम्यूनिस्ट का साथ। बात-बात पर बंदूक-गोली। गरीबी दूर करने का मिशन । मिशन के लिए कुछ भी करेंगे वाला जज्बा। युवा शक्ति। जीवन-मौत की जिसे फिक्र नहीं। पुलिस जिस तक पहुंचने के लिए सोंचने से पहले सौ बार सोंचती। जो कहता रहा…जिने मरने की किसको पड़ी…। कुल मिलाकर, जय टाइप का स्वभाव। गरीबों के नाथ। चौहान टाइप का खौफ। ऐसा जयनाथ चौहान। कहते हैं,…जिंदगी की ना टूटे लड़ी…प्यार कर ले घड़ी दो घड़ी।   

   

। अब जयनाथ हैं फूलटाइम पॉलिटिशियन । कम्यूनिस्ट से भाजपाई हो चले हैं। मिलिए आप भी । मौर्य न्यूज18 से खास बातचीत में और क्या कुछ कहा है भाजपाई जयनाथ चौहान ने जानिए आप भी ।

खास मुलाकात : मौर्य न्यूज18 के साथ भाजपा के क्रांतिकारी युवा नेता जयनाथ चौहान । जो बिहार भाजपा ओबीसी मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष भी है। हाजीपुर इनका कर्म क्षेत्र है।

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कहते हैं…बिहार के हाजीपुर से हूं। जाति-धर्म को कभी समझा नहीं। पैदा लेते ही पिछड़ापन से रूबरू हुआ। कारण समझ में नहीं आया। इन सब को समझने के लिए ग्रामीण परिवेश में ही पढ़ाई शुरू की। पढ़ाई में दिल लगे ना लगे। इसे जारी रखा। गरीबी-पिछड़ापन का कारण फिर भी समझ में नहीं आया। तब तक कॉलेज की पढ़ाई शुरू हो गई। वहां छात्र जीवन में कई साथियों से मुलाकात हुई। भेदभाव झेला। वहीं से बात समझ में आने लगी। गरीबी और पिछड़ापन का कारण क्या है। सो, निवारण कैसे हो इसकी सोंच बनने लगी। लेकिन कहते हैं ना सीधी उंगली से घी नहीं निकलती…, सो, सराफत के बीच लुटते-पिटते रहे। और सामंती सोंच के आगे ना झुकने की कसम ने हाथों में बंदूक थमा दिया।

फिर क्या था, थाम लिया। कम्यूनिस्ट का साथ मिला और गरीबी मिटाओ, पिछड़ापन भगाओ, गरीबी का मजाक उड़ाने वालो, गरीबों को सताने वालों को सैत डालो, गुंडई करने वालों को ठिकाने लगा दो- इसी मानसिकता के साथ शुरू हो गया अपना  मिशन। मिशन बेखौफ जिंदगी !  कॉमरेड बनकर समांती सोंच के खिलाफ गोली और बोली की ताकत झोंक दी मैंने। हां, ये अलग बात थी कि हमारी बेखौफ जिंदगी औऱ जिने मरने की किसको पड़ी से वाली सोंच की वजह से पूरे इलाके में जयनाथ चौहान नाम का एक खौफ गुंडई करने वालों, सामंती सोंच रखने वालों के बीच ऐसा घर कर गया कि पुलिस भी मेरे पीछे पर गई। सच कहूं तो गरीबों की इंसाफ दिलाने और पिछड़ों की बेखौफ जिंदगी जीने देने की आजादी दिलाने के चक्कर में अपराधियों की तरह जिंदगी बना दी सबने। ये भी सच है कि मैंने अब तक  किसी चिंटी तक को नहीं मारा लेकिन बागियों ने, समाज के उन सामंती सोंच ने मुझे सिर्फ और सिर्फ अपराधिक छवि वाला इंसान बना दिया। ऐसे में मेरे सामने हर पल बंदूक की साये में जीना-पलना बढ़ना मजबूरी होती चली गई।

मेरे परिवार और बचपन के साथी, गरीब-गुरबा ये जानते थे कि मैं अपराधिक मानसिकता का ना था, ना हूं और ना रहूंगा। समाज सेवा और पिछड़ेपन, गरीबी की लड़ाई के लिए जो मेरे अंदर का जोश था उसे चंद गुंडों ने, सामंती सोंच ने मुझे क्रिमिनल, नक्सली, बाहूबली और ना जाने क्या-क्या नाम दे डाला। लेकिन मैं उसी भाव से जीता रहा…कि टूटेगी हर हथकड़ी..प्यार करले घड़ी दो घड़ी।

सफर जारी रहा, फूल टाइम कॉम्यूनिस्ट बनकर, उसकी सोंच और विचारधारा को अपनाने लगा । फिर तो मेरा इस्तेमाल भी जबर्दस्त तरीके से होता रहा। वैसे, इसमें गलती भी मेरी ही कहिए…कि मेरे जीने का एक ही मसकद रहा है…जहां भी जो भी काम करो…टॉप लेवल का काम करो। जहां भी जिस फिल्ड में रहो…उंचाइयों पर रहा। किसी काम को सबसे पहले करने का, हमेशा सबसे आगे दिखने का, काम में नेतृत्व करने का हमेशा जज्बा लिये आगे बढ़ता रहा। अब भी वही मिशन है लेकिन पिछले बीस साल से मिजाज औऱ कार्य करने की शैली बदली है। वजह भी है, महात्मा गांधी कहा करते थे..अहिंसा सबसे बड़ी ताकत है। प्यार से किसी को भी जीता जा सकता है। सो, जीवन के इस सफर में एक मोड़ ऐसा आया कि कम्यूनिस्ट की राह को छोड़ भाजपाई होता चला गया। यानि भारतीय जनता पार्टी का झंडा उठाकर उसका कार्यकर्ता बनकर, समाज की सेवा, गरीबी और पिछड़ेपन की लड़ाई लड़ने की ठान ली। जो सफर जारी है । अब तो इसी में उंचाइयों को छूना है।

कहते हैं, मैं अब पूरी तरह से राजनीति में हूं। लेकिन उससे पहले एक बेहतर इंसान और समाजसेवी के तौर पर जाना जाउं। पहचाना जाउं। यही मकसद है हमारा। मैंने संवैधानिक तरीके से गांव में रखकर ग्राम पंचायत सरकार का हिस्सा बना। मुखिया का चुनाव लड़ा जीता, अब तो वोट मांगने भी नहीं जाता हूं। काम बोलता है, तो पब्लिक खुद ही वोट दे देती है। मैंने साफ, कहा हुआ है कि जनसेवक या समाजसेवा का दायित्व लिया हूं और जनता से छोटी सी भी जिम्मेदारी दी है तो उसे ईमानदारी से निभाउंगा। निभाता भी हूं। इसलिए काम करना ठोस कमिटमेंट है मेरा। कमिटमेंट का पक्का हूं। जनता ये सब जानती है…फिर वोट मांगने की जरूरत भी नहीं पड़ती। अब तो मेरी पत्नी भी हाजीपुर से प्रमुख है। और आगे भी प्रितिनिधित्व जारी रहेगा। अब तो इसी पार्टी में काम करूंगा।

जयनाथ का दीनानाथ कौन ये भी जान लीजिए….

कहते हैं डर किसी बात का नहीं रहा, जिने मरने की किसको पड़ी…इसी तौर-तरीके से जीता रहा। मेरी जिंदगी के मकसद को समझा हमारे ही इलाके का एक जनप्रतिनिधि नाम है, नित्यानंद राय। आप सही समझे, भाजपा लीडर नित्यानंद राय़ । केन्द्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय। यही हमारे जैसे जयनाथ के दीनानाथ हैं। भाजपा में इन्होंने ही मुझे जोड़ा। मैं कम्यूनिस्ट मिजाज का था। फूलटाइम कॉम्यूनिस्ट लेकिन नित्यानंद राय जैसे लीडर ने अपने कामो और व्यवहारों से दिल जीता। सो, अब मैं भाजपाई हूं। भाजपा में बिहार भाजपा ओबीसी मोर्चा का प्रदेश अध्यक्ष के दायित्व को  निभा रहा हूं। आगे जो भी दायित्व मिलेगा निभाउंगा। अब तो, आज से अपना वादा रहा। हम मिलेंगे हर एक मोड़ पर। मिलकर दुनिया बसाएंगे हम। गम की दुनिया का घर छोड़ कर। और कह सकते हैं, पार्टी मेरे लिए मितवा की तरह है…सो,मितवा लागे ना तेरे बिन जिया ।  

केन्द्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय । मौर्य न्यूज18

शौक ऐसा कि गुनगुनाने को जी चाहता है….

कह सकते हैं, स्वभाव से जयनाथ चौहान क्रांतिकारी युवा हैं। पर दिल-दिमाग से पूरी तरह रोमांटिक हैं। हमने गुनगुनाने को कहा तो कहने लगे…ऐसा कभी कुछ किया नहीं। लेकिन संगीत सुनता जरूर हूं। पसंद की बात चली तो, माथे पर जोर डाला। याद की कुछ बातें और कहने लगे….जिने मरने की किसको पड़ी…प्यार कर ले घड़ी दो घड़ी। बातों-बातों में जो जिद इनके अंदर दिखता है…उससे साफ है कि जहां रहना है बुलंदियों को छूना है। हर हाल में उंचाई दर उंचाई उससे कम कुछ भी नहीं, चाहे पूरी जवानी क्यों ना खप जाए..चाहे कोई कहानी क्यो ना बन जाए…कहते हैं मैं तो बस इसी बात पर विश्वास रखता हूं कि वो जवानी जवानी नहीं। जिसमें कोई कहानी ना हो।

चलते-चलते क्या कहना चाहेंगे….

कहते हैं हूं समाज सेवी, इसी में जिंदगी खफा देनी है। मकसद भी साफ है, गरीब भूखा ना सोए, गरीबों की आंखों में आंसू ना हो…। इसलिए कहता हूं…उन आंखों में हंसना भी क्या…जिन आंखों में पानी ना हो….लेकिन आंसू गम वाली नहीं…पानी गम वाली नहीं। खुशियों वाली आंसू हो…जयनाथ कहते हैं, आंसू है खुशियों की लड़ी। प्यार कर ले घड़ी दो घड़ी। कहते हैं मुझे, सम्मान के साथ जीना और प्यार पर बहुत भरोसा है…,लाख गहरा हो सागर तो क्या। प्यार से कुछ भी गहरा नहीं। टूट जाएगी हर हथकड़ी, प्यार कर ले घड़ी दो घड़ी। इसी मिजाज से प्यार के साथ राजनीतिक जीवन को उंचाई पर ले जाना है।  

विशेष ः

ऐसे ही एक औऱ युवा और जोशीले समाजसेवी, राजनीतिक शख्स से फिर मुलाकात करेंगे। और रूबरू कराएंगे तब तक आप बने रहिए मौर्य न्यूज18 के साथ।

धन्यवाद !

पटना से मौर्य न्यूज18 के लिए नयन की रिपोर्ट

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