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टेलर मास्टर का बेटा बना आईएएस Maurya News18

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मां राजेश्वरी रातभर करती थी कटिंग और सिलाई

दो बेटे, पंकज और अमित कुमावत दोनों बने IAS

राजस्थान के झुंझुन में मोदी रोड पर बिताए बुरे दिन

यूपीएससी19 में 443वीं और 600वीं रैंक हांसिल की


नई दिल्ली । मौर्य न्यूज18 डेस्क।

झुंझुनूं, राजस्थान से खबर है। खबर पॉजिटिव है। खुशियां देने वाली है। एक टेलर मास्टर के घर दो आईएएस का जन्म हुआ है। सही कह रहा हूं- दो बेटे और दोनों के दोनों सिविल सर्विसेज में चयन हो चुके हैं। शुक्रवार को यूपीएससी 2019 का रिजल्ट की घोषणा हुआ तो झुंझुंनू के दो लाल पंकज कुमावत और उसके भाई अमित कुमावत के नाम उस रिजल्ट लिस्ट में दर्ज थे। एक को 443वीं रैंक मिली है तो दूसरे को 600रैंक हांसिल हुई है।

कहते है झुंझुंनू के मोदी रोड पर रहने वाला ये परिवार अब खुशी से झूम उठा है। टेलर का काम करते करते देश के लिए दो बेटे को तैयार कर पूरे सूबे का नाम उंचा किया है। देश के उन माता-पिता को ताकद दी है, हौसला भरा है जो गरीबी के कारण बच्चों के आईएएस बनने के सपने को संजोए बैठे हैं। मां-बाप ने IIT दिल्ली में पढ़ाया, जानिए क्या करते हैं मां-बापआपको ये जानान चाहिए कि जिन दो भाइयों ने यूपीएससी या सिविल सर्विसेज में सफलता पाई है।

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किस तरह बच्चों को पढ़ाया

पिता सुभाष झुंझुन में ही कपड़े की सिलाई कटाई का काम करते हैं। यानि टेलरिंग का काम है उनका। इसी से रोजी रोटी चलती है। और मां राजेश्वरी तुरपाई का काम करती हैं। यानि टेलरिंग दुकान में स्टीचिंग का काम करतीं हैं। दोनों पति-पत्नी मिलकर सिलाई-कटाई के काम से पूरा परिवार चलाते रहे हैं। इसके अलावा परिवार में कोई नौकरी किसी ने नहीं की। इसी रोजी रोटी से बच्चों को पढ़ाने का जज्बा बनाए रखे। बच्चों को आईआईटी दिल्ली में भी पढ़ाया। उस वक्त भी जब दोनों आईआईटी पास कर गये तो इलाके में बड़ी उपलब्धि के तौर पर इस परिवार को देखा जाने लगा। लेकिन अब तो कमाल ही हो गया। दोनों बेटे आईएएस बनकर देश की सेवा के लिए तैयार होंगे। सुभाष औऱ राजेश्वरी को इन दिनों तमाम बधाइयां मिल रहीं हैं। घर पर मेला सा लगा है। हर कोई मिलकर खुशियां व्यक्त कर रहा है।

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मां-बाप के बारे में क्या कह रहे दोनों बेटे

पंकज औऱ अमित कहते हैं मैं दिल्ली आईआईटी से बीटेक करने के बाद प्राइवेट कंपनी में नौकरी कर रहा था और साथ में तैयारी भी। लेकिन शुरू से मां और पापा दोनों पढ़ाई के लिए प्रेरित करते रहे। किताब जुटाना। पढाई की फीस जुटाना। कलम-कांपियां फिर कपड़े और भोजन। पर चीज के लिए संघर्ष करता हुआ मां और पापा को देख कर पला बढ़ा। तकलिफें झेलने के बाद भी कभी मां और पापा पढ़ाई की कमी महसूस नहीं होने दी। हमेशा कहते थे पढ़ालिखाकर तुम दोनों को बड़ा ऑफिसर बनाना है। यही सपना लिए रातरातभर मां और पापा सिलाई-कटाई का काम करते रहते थे। दोनों भाइयों का कहना था कि मां-बाप का सपना पूरा करना ही हम दोनों का जीवन बन गया था। कहते हैं- हमदोनों के लिए पढ़ना आसान था लेकिन पढ़ाना कठिन था। जिसकी जिम्मेदारी मां और पापा ने निरंतर निभाई और अब मेहनत रंग लाई है।

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नई दिल्ली से मौर्ट न्यूज18 की रिपोर्ट।

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