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सीएम नीतीश कुमार ने जिसको गद्दी पर बिठाया, उसका परिवार खाने को मोहताज ! आखिर क्यों ! Maurya News18

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GUEST REPORT

दशरथ मांझी का परिवार, बेबस और लाचार

नहीं मिल रही सरकारी-गैर सरकारी सहायता

फिल्मकारों ने भी नहीं की मदद  

     

पटना, मौर्य न्यूज18      

माउंटेन मैन : मुश्किल का दौर

जिस व्यक्ति को बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने अपनी सीएम की गद्दी पर बिठा दिया। जिसको दलित औऱ महान दृढ़ संकल्प वाला व्यक्ति बता कर सीने से लगाया। जिसके कारनामे की दुहाई दे दे कर सीएम नीतीश कुमार पूरी दुनिया के सामने उसे महान बताते रहे। फिल्मी दुनिया ने भी जिनके किए को खूब बेचा, खूब कमाया। औऱ वाहवाही भी लूटी। फोटो खींचवा, खींचवा कर होशियार लोग अपने फेसबुक वॉल पर “माउंटेन मैन की लव स्टोरी” सुनाते रहे। वो व्यक्ति दुनिया में अब नहीं रहा लेकिन उसकी फैमली दाने-दाने को मोहताज है। घर चलाना मुश्किल हो रहा है । क्या ऐसे परिवार की ऐसी हालत होना चाहिए। सबके लिए ये सवाल है…चाहे वो सरकार हो. या फिल्कार हो..प्रशासन हो…या आम जनता..। आइये उस मांउटेन मैन के परिवार की हालत से आपको रूबरू कराते हैं।

 पिछले डेढ़ दशक से विभिन्न स्तरों पर चर्चा में रहने वाले ” माउंटेन मैन” दशरथ मांझी का परिवार इन दिनों काफी मुश्किल दौर से गुजर रहा है। गरीबों के लिए केंद्र व राज्य सरकार की ओर से चलायी जा रही योजनाओं का लाभ भी समुचित रूप से इस परिवार को नहीं मिल पा रहा है। दशरथ मांझी के गुजर जाने के बाद व्यावसायिक रूप से इनकी कहानी को भुनाने और लाखों-करोड़ों कमाने वाले आश्वाशन देने के बाद भी मदद नहीं कर रहे हैं।

दशरथ मांझी के दोनों संतान विकलांग पुत्र भगीरथ मांझी और पुत्री लांगी देवी का परिवार अब एक साथ गेहलौर के दशरथ नगर में रहता है। परिवार की एक बच्ची का सड़क दुर्घटना में हाथ पैर टूट गया, जिसके इलाज में यह परिवार काफी कर्ज में डूब गया है। दशरथ मांझी के नाती ने बताया कि वह चेन्नई में काम करता था, लेकिन लॉक डाउन के चलते अभी घर पर बैठा है। वर्षा का पानी नहों होने के कारण आसपास के गांवों में धान की रोपनी नही होने से परिवार की महिला सदस्य  भी फिलहाल बेरोजगार है।      

संकल्प के दृढ़ इंसान

दशरथ मांझी, फाइल फोटो – सोनू किशन

दशरथ मांझी नाम है एक दृढ़ संकल्प का, जोश और जुनून का, पागलपन का,धुन के पक्के मन का।पहाड़ का सीना चीर कर बिहार के गया जिले के अतरी और वजीरगंज प्रखंड मुख्यालय के बीच की दूरी 55 किलोमीटर से घटाकर 15 किलोमीटर कर देने वाले दशरथ मांझी को आज “माउंटेन मैन ” के नाम से भी जाना जाता है। गया जिले के गेहलौर घाटी की एक पहाड़ी को 1960 से 1982 तक लगातार अपने जोश और जुनून के  सहारे पागल कहलाने के बाबजूद अकेले एक हथौड़ा और छेनी लेकर  360 फुट लम्बे,30 फुट चौड़े और 25 फुट ऊँचें पहाड़ को तोड़कर रास्ता बना डाला।   इस दौरान दशरथ मांझी की पत्नी की भी मौत हो गई तो एकमात्र पुत्र भगीरथ मांझी विकलांग हो गया। बेटी लांगी देवी शादी के बाद ससुराल चली गयी। अपनी पूरी जवानी को  पहाड़ को तोड़ने में लगा देने वाले दशरथ मांझी अधेड़ की उम्र में आते आते कबीरपंथी हो गए और गेहलौर घाटी के रास्ते को पक्का बनाने के लिए वह बिहार सरकार से पटना पहुंचकर गुहार लगाते, अखबारों के दफ्तरों में जाते। पर उनकी कोई सुनने वाला नहीं था।

तब किसी ने खास नोटिस नहीं लिया…

दशरथ मांझी के परिवार काी तस्वीर । फाइल फोटो । मौर्य न्यूज18 ।

सरकार से परवाना में मिले 5 एकड़ भूमि पर स्कूल, अस्पताल बनाने के लिए भूमि पुनः सरकार को लौटाने के लिए तैयार रहने वाले दशरथ मांझी का तब किसी ने कोई खास नोटिस नहीं लिया। इससे पूर्व वह रेल लाइन के सहारे गया से दिल्ली भी पैदल पहुँच गए तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से मिलने।   प्रमाण के रूप में दशरथ मांझी रास्ते में मिलने वाले प्रत्येक रेलवे स्टेशन के स्टेशन मास्टर से एक कॉपी पर मोहर लगवा लेते। इस संबंध में दशरथ मांझी ने मुझे एक बार बताया(तब मैं गया में हिंदुस्तान अखबार का प्रभारी था)  था कि दिल्ली में इंदिरा गांधी से मुलाकात तो नहीं हुई, लेकिन जगजीवन राम से मुलाकात हो गयी थी। जगजीवन राम ने उनकी पूरी बात सुनने के बाद आश्वासन दिया और फिर रेल से वापस गया भेज दिए थे।    

जब 2005 में नीतीश मुख्यमंत्री बने तो दशरथ मांझी उनसे मिलने पटना पहुंचे

जब सीएम नीतीश कुमार से पटना मिलने पहुंचे दशरथ मांझी । फाइल फोटो। मौर्य न्यूज18 ।

 बिहार में जब अक्टूबर2005 में एन डी ए की सरकार बनी और नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बने ,तब पुनः दशरथ मांझी उनसे मिलने पटना पहुँचे। नीतीश कुमार ने इस “कर्म वीर’ को सम्मान देते हुए मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बिठाया ,तब राष्ट्रीय स्तर पर “माउन्टेन मैन” की चर्चा व्यापक रूप से होने लगी।   मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उनके सपनों को पूरा करने का आश्वासन दिया। इसके बाद तो दशरथ मांझी की ” कर्म वीरता ” को   व्यवसायिक रूप से भंजाने के लिए  कई लोग लग गए । इसी बीच  अचानक दशरथ मांझी की तबियत बहुत खराब हो गयी। बिहार सरकार ने अपने खर्चे पर दिल्ली एम्स में भेज कर इलाज कराया। लेकिन 17 अगस्त 2007 को उनकी मौत हो गयी। राज्य सरकार ने राजकीय सम्मान से दशरथ मांझी को अंतिम विदाई दी।

समाचार पत्रों औऱ टीवी चैनलों पर खूब चली स्टोरी

इसके बाद टीवी चैनलों में स्टोरी बनाने से लेकर सीरियल बनाने, फ़िल्म बनाने की होड़ लग गयी।   बताया जाता है कि दशरथ मांझी ने मुर्त्यु शय्या पर रहते हुए फ़िल्म बनाने का विशेषाधिकार दे दिया था। इसी के बाद केतन देसाई ने 2015 में  “मांझी: द माउंटेन मैन” नामक फ़िल्म बनाई। इसमें दशरथ मांझी की भूमिका नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने और उसकी पत्नी  फाल्गुनी देवी की भूमिका  राधिका आप्टे ने निभाई। इससे पूर्व 2012 में आमिर खान ने अपने चर्चित  सीरियल सत्यमेव जयते के सीजन 2 के पहले भाग को दशरथ मांझी  को समर्पित किया था। आमिर खान ने गेहलौर घाटी में शूटिंग करते हुए  दशरथ मांझी के पुत्र से कहा था कि  इस कार्यक्रम से मुनाफा होगा उसमे दो प्रतिशत  आपको दिया जाएगा। तत्काल एक लाख रुपये उसने दिए थे। लेकिन मुम्बई लौटकर, सीरियल के प्रसारण के बाद आमिर खान अपने वादे को भूल गए। केतन मेहता ने भी दशरथ मांझी के परिवार को भूल गये और कोई खास आर्थिक सहायता नहीं की। राजनेताओं ने भी दशरथ मांझी को लेकर राजनीति की। इनके परिवार की मददगार कोई नहीं हुआ।

दशरथ मांझी के नाम पर गेहलौर में अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, पुलिस ओपी ,स्मारक, सड़क आदि सरकार की तरफ से बना दिये गए, लेकिन परिवार की कोई सहायता नहीं की। भगीरथ मांझी  कहते हैं कि हम दोनों भाई बहन को सामाजिक सुरक्षा पेंशन मिलता था, लेकिन एक साल से वह भी बंद है। जनवितरण का दुकानदार भी कभी  अनाज देता है कभी नहीं। परवाना में मिले जमीन का रसीद नहीं काटा जा रहा है। इन सब कामों के लिए  मेरे जैसा विकलांग व्यक्ति  संबंधित पदाधिकारी  – कर्मचारी से मिलने  का  कई बार प्रयास किया ,लेकिन नहों मिला।    इस परिवार की आर्थिक स्थिति दयनीय ही नहीं  बल्कि कर्ज में डूबा हुआ है पूरा परिवार। दशरथ मांझी के नाम पर अपनी राजनीति चमकाने वाले नेता, फ़िल्म,सीरियल बना लाखों-करोड़ों  कमाने वाले  फिल्मकार, राज्य सरकार का कोई पदाधिकारी भी इस परिवार की सुधि नहीं ले रहा है, जिससे दशरथ मांझी के पुत्र भगीरथ मांझी और पुत्री लेंगी देवी का परिवार बहुत कष्ट मे जी रहा है।  

गेस्ट रिपोर्ट : सुनील सौरभ, बेब जर्नलिस्ट, पटना।

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