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सीएम साहब ! आपका डीएसपी दुष्कर्मी है..उनकी पत्नी का आरोप है…फिर भी आप उसे बचा क्यों रहे हैं ! लालू के छोटे बबुआ ने पूछा है । Maurya News18

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सवाल कई और हैं, राजद के तेजस्वी यादव ने ट्वीट कर ये सब सीएम नीतीश कुमार से पूछा है …

ऐसे सवालों पर जदयू की सुलग रही है..देखना है कि ये आग कब बुझेगी ।


जदयू का जवाब हाजिर है…तेजस्वी मम्मी-पापा जैसा राज देखना चाहते हैं । बेबुनियाद बात कर रहे हैं ।


मामला दिलचस्प है, मुद्दा गरम है….दूर तलक जाएगी या यूं ही फिस्स हो जाएगी ..पढ़िए पूरी रिपोर्ट ।

नयन, पटना, मौर्य न्यूज18 ।


सीएम साहब ! हुजूर आप तो सुशासन की सरकार है । नीतीश कुमार हैं आप । बिहार के बहार हैं आप । न्याय पसंद हैं आप । आप हैं तो बिहार है । आप है तो न्याय है । आप हैं तो सुशासन है । फिर भी ऐसा क्यों है कि पत्नी कहती है मेरा पति दुष्कर्मी है । चिल्ला-चिल्ला के सबूत के साथ कहती है कि मेरा पति दुष्कर्मी है । प्रेस वालों के बीच बैठ कर रो-रो के कहती है मेरा पति दुष्कर्मी है।

कहती है कि मेरा पति एक नवालिग लड़की के साथ। एक नवालिग बच्ची के साथ । एक दलित गरीब की बच्ची के साथ दुष्कर्म किया है। बच्ची को न्याय दिला दो । पति को सलाखों में डाल दो । जेल भेजो । गिरफ्तार करो । छुट्टा घूमने मत दो । नहीं तो सारे सबूत मिटा देगा । अदालत में अपनी मर्जी का बयान दिलवाएगा । अपनी पहुंच और पद का दुरूपयोग करेगा और बच जाएगा । फिर उस नवालिग लड़की को कभी न्याय नहीं मिल पाएगा / आगे कहती है….


मैं एक औरत हूं । दुष्कर्म की पीड़ा को समझती हूं । मेरा पति है तो क्या हुआ उसे गिरफ्तार करो। सलाखों में बंद करो । सख्त से सख्त कार्रवाई करो । कुछ करो सीएम साहब कुछ करो । लेकिन नहीं ….कुछ भी नहीं…वो डीएसपी जो ठहरे । न्याय पसंद के करीबी जो ठहरे । वो बंद हो जाएंगे । वो गिरफ्तार हो जाएंगे तो न्याय पसंद सीएम साहब की बदनामी जो हो जाएगी । सो, लाख इल्जाम के बाद भी डीएसपी साहब छुट्टे घूम रहे ।


ये सब कह रहे राजद के युवा नेता । बिहार में विरोधी दल के नेता । बिहार विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता तेजस्वी यादव । उनका बिहार के सीएम नीतीश कुमार से कई और सवाल हैं । जिसमें से एक ये भी जो आपने उपर पढ़ा । एक महिला की पीड़ा सुनी ।


तेजस्वी बिहार के उपमुख्यमंत्री भी रहे हैं । सीएम नीतीश कुमार के साथ बगल में बैठ कर काम भी कर चुके हैं । सो, शायद वाकिफ हैं कि नीतीश कुमार के व्यवहार और रवैये से, कि वो किसको बचा रहे होते हैं और किसको बचाने के नाम पर आंख और कान बंद कर लिए होते हैं । बहुत नजीदक में, उनके साथ सट कर, बैठकर देख चुके हैं…परख चुके हैं । चाचा तक का रिश्ता भंजाकर काफी कुछ सीख चुके हैं । राजद सुप्रीमो पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के छोटे लाल हैं तो बिरासत में भी पॉलिटिकल बातें रखना बखूबी जानते हैं । सो, रखते चले गए ।


वो जानते हैं कि कुछ भी लिखने से पहले उसका असर क्या होगा । क्या सवाल उठेंगे । और क्या जवाब देना होगा । सो, तेजस्वी ने बहुत तौर तरीकों से कड़े शब्दों में ट्वीट कर कई और मुद्दे उठाएं हैं वो भी आप पढ़ लीजिए …।

राजद का सवाल …।


मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपने गृह ज़िलावासी JDU के राष्ट्रीय अध्यक्ष, केंद्रीय चयन पर्षद (सिपाही भर्ती) के अध्यक्ष पूर्व डीजीपी और बलात्कारी DSP को क्यों बचा रहे हैं? मुख्यमंत्री जी, किस मजबूरी में बिहार के करोड़ों युवाओं की प्रतिभा की बली चढ़ा रहे है?
क्या एक जिला और एक जाति की नियुक्ति की मजबूरी में नीतीश कुमार सेवानिवृत्ति के बाद भी अनैतिक कार्यों ने लिप्त अधिकारियों को बड़े पद देकर उपकृत करते है?


तेजस्वी यादव, नेता प्रतिपक्ष, बिहार विधानसभा, राजद नेता, बिहार ।

जदयू का जवाब …।


जदयू के प्रवक्ता संजय सिंह ने कहा है कि तेजस्वी यादव बेबुनियाद आरोप लगा रहे हैं। वे अपने माता-पिता वाला राज देखना चाहते हैं। हमारी सरकार में जेनुइन काम होता है और पूरी पारदर्शिता बरती जाती है।

संजय सिंह, मुख्य प्रवक्ता, जदयू, बिहार ।

अब थोड़ा खबरों की शैली में इसे विस्तार से भी समझिए….


राजद नेता तेजस्वी यादव ने इस हफ्ते के सोमवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर दागी अफसरों और JDU के राष्ट्रीय अध्यक्ष को बचाने का गंभीर आरोप लगाया । साथ ही बिहार के युवाओं की प्रतिभा की हत्या करने का भी आरोप लगाया । इस पर सियासत गरमा गई और जदयू ने साफ कह दिया कि इस आरोप में कोई दम नहीं है…बिल्कुल ही बेबुनियाद बतातें है ।


सवाल नम्बर एक
नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने सवाल पूछा है कि आखिर क्यों मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एक DSP, जिस पर नाबालिग दलित लड़की के बलात्कार के साथ साथ केंद्रीय चयन परिषद (सिपाही भर्ती) में भी भारी धांधली करने का आरोप हैं, को बचा रहे हैं?


सवाल नम्बर दो….।
उन्होंने कहा है कि यह DSP केंद्रीय चयन परिषद (सिपाही भर्ती) के अध्यक्ष का OSD रहा है। इस DSP और चयन परिषद के अध्यक्ष का क्या संबंध रहा है यह पूरा प्रशासन और पुलिस महकमा जानता है। केंद्रीय चयन परिषद (सिपाही भर्ती) के विवादित अध्यक्ष और मुख्यमंत्री की पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का क्या, कैसा और कब से कौन सा संबंध है यह भी सर्वविदित है।

नीतीश के खिलाफ तेजस्वी का ट्वीट देखिए …।


सवाल नम्बर तीन …।
सेवानिवृत्ति के बाद भी वैसे लोगों को बड़े पद क्यों देते हैं?

नेता प्रतिपक्ष ने मांग की है कि चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए ऐसे लोगों को तुरंत हटाया जाए। क्या जिले और जात के लोगों के अलावा चढ़ावे का हिस्सा भी मजबूरी है जो नीतीश कुमार उन्हें पद पर बनाए हुए है? हर भर्ती और चयन प्रक्रिया का कमोबेश यही हाल है। मुख्यमंत्री को ऐसी क्या लालच और फायदा है कि सेवानिवृत्ति के बाद भी वो ऐसे लोगों को बड़े पद देकर उपकृत कर रहे हैं? मुख्यमंत्री जवाब दें?


डीएसपी वाले मुद्दे को भी विस्तार से समझिए …।


DSP की पत्नी ने सबूत सहित अपने पति पर आरोप लगाया है

तेजस्वी ने कहा कि इस DSP ने एक दलित नाबालिग का बलात्कार किया व भर्ती परीक्षा में धांधलियां की। यह आरोप स्वयं DSP की पत्नी ने सबूत सहित मीडिया के समक्ष अपने पति पर लगाया है। ऐसी क्या मजबूरी है कि गिरफ्तारी तो दूर की बात, निष्पक्ष जांच को भी ऊपर से बाधित किया जा रहा है? FIR दर्ज करने में भी जान बूझकर देरी की गई। इस अधिकारी के विरुद्ध जांच और गिरफ्तारी होने से प्रत्यक्ष रूप से बिहार के पूर्व DGP और वर्तमान केंद्रीय चयन परिषद (सिपाही भर्ती) के अध्यक्ष को बचा रहे हैं। मीडिया में मामला आने के बाद पुलिस विभाग अब इस भ्रष्ट और व्याभिचारी अधिकारी पर दिखावटी कार्यवाही कर रहा है।
सवाल नम्बर चार …।


ड्राइवर बहाली में क्या-क्या गुल खिलाए

उन्होंने कहा कि बिहार का हर अभिभावक और अभ्यर्थी जानता है कि नीतीश कुमार और उनके राष्ट्रीय अध्यक्ष के संरक्षण, निर्देश और शह पर केंद्रीय चयन परिषद (सिपाही भर्ती) के अध्यक्ष ने अपने इस OSD के साथ मिलकर व्यापक पैमाने पर सिपाही भर्ती में धांधली और घोटाले को अंजाम दिया है। 2017 ड्राइवर (सिपाही भर्ती) में भी क्या-क्या गुल खिलाए गए, यह कौन नहीं जानता?


सवाल नम्बर पांच …।
भारी रिश्वत और लेन-देन के खेल का आरोप –

तेजस्वी ने कहा कि मुख्यमंत्री और उनके राष्ट्रीय अध्यक्ष द्वारा सौंपी गई सूचियों के आधार पर सिपाही भर्ती में अनियमित तरीके से अधिकांश नियुक्ति एक जिला और जात की होने के बाद बाकी नियुक्तियों में भारी रिश्वत और लेन-देन का खेल शुरू होता है जिसका हिस्सा ऊपर तक जाता है। इसी गठजोड़ के तहत पूर्व विवादित DGP को सेवानिवृत्त होने के बाद भी नीतीश कुमार ने महत्वपूर्ण पद देकर व्यवस्था में जमा रखा है ताकि वो उनकी एक जिला-एक जात की जरूरतें पूरी करने के साथ-साथ भ्रष्टाचार और अनैतिक राजनीति को भी मजबूती देते रहें।

अनेक ऑडियो वायरल

स्वयं इनके OSD की धर्मपत्नी पर किसकी कैसी नजर थी यह बात खुद उसने अपनी पत्नी को बताई थीं। बाजार में अनेक ऑडियो वायरल हो रहे है जो दर्शाता है सत्ता शीर्ष पर बैठे इस गुट के कुछ खास लोगों का चाल चरित्र और चेहरा कैसा है?


सवाल नम्बर छह …।
प्रतिभाशाली और बेरोजगार युवाओं की जिंदगी तबाह हो रही, फिर भी नौकरी नहीं दे रहे.।


चयन परिषद के महत्वपूर्ण पद पर बैठे व्यक्ति एवं सत्ता शीर्ष के इस अनैतिक और भ्रष्ट गठजोड़ ने बिहार के लाखों युवाओं की जिंदगी चौपट कर दी है। जाति, जिला, अन्याय और पैसे के आधार पर अयोग्य युवकों का पुलिस विभाग में चयन किया जा रहा है जिससे योग्य, सक्षम और प्रतिभाशाली युवा और बेरोजगार नौकरी पाने से वंचित रह जाते हैं।


अंत में एक और बात जो तेजस्वी ने कही है…


बिहार पुलिस की कार्यक्षमता और अधिक प्रभावित होगी
तेजस्वी ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार चयन प्रक्रिया की बागडोर अगर ऐसे ही लोगों के हाथ में देकर जाति और पैसे के आधार पर अक्षम लोगों की नियुक्ति जारी रखेंगे। तो यकीन मानिए पहले से ही बदहाल बिहार पुलिस की कार्यक्षमता और अधिक प्रभावित होगी।

इन सवालों के बाद अब आगे क्या होगा…मुद्दा तूल पकड़ेगा या हो जाएगा फिस्स ।

सवाल तो तेजस्वी यादव ने सीएम नीतीश कुमार से पूछ लिए हैं । सवाल तीखी है । मिरची से भी तीखी । जवाब जदयू की ओर से मिल ही गया है लेकिन राजद नेता तेजस्वी अभी इसे और तूल दे सकते हैं लेकिन कितना दे पाएंगे और किस हद तक दे पाएंगे । कोरोना काल में आगे कैसे इस मुद्दे को उठाये रखने या सीएम को घेरने का प्लान करेंगे, ये सब देखना होगा । वैसे, अब तक का पिछला रिकार्ड देखें तो राजद या विपक्ष चुनाव नतीजों के बाद कभी भी नीतीश कुमार को अच्छे तरीके से घेर नहीं पाई है । विपक्ष इस बार बहुत मजबूत है यूं कहिए कि सत्ता के गले पर चढ़ी हुई विपक्ष है, लेकिन किसी भी मुद्दे को ज्यादा लंबा खींचने में माहिर नहीं है । ज्यादा टाइम तक सीएम नीतीश को घेरने की कला में विपक्ष बिल्कुल फेल है । ऐसे में कहना गलत नहीं होगा कि तेजस्वी ने हॉट मुद्दा उठा तो जरूर दिया है लेकिन इसे अंजाम तक पहुंचा नहीं पाएंगे । विपक्ष के इस कमजोर कड़ी को सीएम नीतीश कुमार और जदयू के लीडर बखूबी जानते हैं ।

पटना से मौर्य न्यूज18 के लिए नयन की रिपोर्ट ।

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