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थोड़ी सी है और थोड़े की जरूरत है : डॉ एएस प्रकाश ! Maurya News18

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खास मुलाकात : डॉ अखौरी सुकृत प्रकाश (DR A S PRAKASH, MBBS, CCEBDM, FSASS), मधुमेह रोग विशेषज्ञ, पटना, बिहार  

कहा – चिकित्सा सेवा में बदलाव को इतना ही काफी है…

समाज में चिकित्सा सेवा की कीमत कोई चुका नहीं सकता…इसकी कद्र समझता हूं..।

कहा – चिकित्सा फिल्ड की खामिया सामाजिक और प्रशासनिक व्यवस्था में दोष का नतीजा है…आमजन को भी जागरूक होना होगा

नयन, पटना, मौर्य न्यूज18

बीमार जिंदगी…संवारने की जिम्मेदारी

चिकित्सा सेवा में तमाम तरह की बातें उठती रही हैं इनसबके बीच एक ऐसा इंसान जो चिकित्सक भी है…युवा भी है…समाज के लिए सोंचता भी है…हकीकत में सामाजिक पहलुओं और इंसानी जिंदगी को समझता भी। चिकित्सक होने का मूल्य भी समझता है। कहता है इस सेवा की कीमत कोई चुका नहीं सकता। जो कहा है..ऐसी सेवा में आना मेरी खुशकिस्मती है। जो  कहता है पूरे खानदान ने इस सेवा को दिलोजान से लगाया। गौरव पाया। उस गरिमा को और आगे बढ़ाना है । इंसानी सोंच को चिकित्सा सेवा के प्रति आदर का भाव जगाना है। जो कहता है कि बहुत कुछ करने को थोड़ी सी है मेरे पास बस थोड़े और की जरूरत है। वो…”थोड़ा और” क्या है जानते हैं उसी से। नाम है डॉ अखौरी सुकृत प्रकाश। जो बिहार के हैं। पटना से हैं। और मधुमेह रोग विशेषज्ञ के रूप में अपनी पहचान बनाई है । जाने जाते हैं डॉ ए एस प्रकाश के नाम से।    

मैं हूं नयन और आप हैं डॉ प्रकाश । मौर्य न्यूज18 के इस खास मुलाकत में आपका स्वागत है।

सबके पहले मुझे ये बताएं कि आपने चिकित्सा सेवा के फील्ड को चुना क्या सोंच कर औऱ वर्तमान में चिकित्सा सेवा पर आप क्या कहेंगे।

कहते हैं..चिकित्सा सेवा बिरासत की देन हैं। दादा, पापा, मां, पत्नी सबके सब डॉक्टर हैं। मैंने बचपन से इन लोगों को चिकित्सा सेवा की भावना के साथ जिया है। इसलिए मैंने बचपन से ही ठाना था कि इन चीजों को लेकर ही आगे बढ़ूंगा। बिहार में जन्मा। पला-बढ़ा। किशनगंज से मेडिकल की पढ़ाई की। और लग गया इस सेवा में। रही बात वर्तमान दौर की चिकित्सा सेवा में मानवीय जिंदगी के साथ खिलवाड़ क्यों हो रहा ये सबको सोचना होगा, इस फील्ड में अच्छे लोगों की भरमार है। उसकी बात करिए।

जाहिर है…सामाजिक व्यवस्था। और सोंच में गिरावट का नतीजा है ये सब। लेकिन इसकी खातिर पूरे कौम को घसीटा जाए ये भी सही नहीं है। आज की तारीख में भी चिकित्सा फील्ड में वैसी हस्तियां हैं जो नब्ज देखकर बीमारी भांप जाती हैं। लेकिन सवाल है कि हमारे यहां सरकारी  गैर सरकारी जो चिकित्सा व्यवस्था है…वो इतनी लचर है..सोंच की इतनी कमी है…अनुशासन की इतनी कमी है कि सभी दौलत को प्रमुखता देने में लग जाते हैं। या भगवान भरोसे सब कुछ छोड़ कर चलने देते हैं। जैसे चल रहा है चले। अपना क्या। लेकिन ऐसा नहीं होना चाहिए। समाज के लोगों को भी जागरूक होना होगा। व्यवस्था चलाने वालों को सीखना होगा…अनुशासित होना होगा कि कम से  कम चिकित्सा सेवा को कैसे चुस्त-दुरूस्त किया जा सके। सिर्फ डॉक्टर को दोषी ठहराने से कुछ नहीं होने वाला।

डॉ प्रकाश कहते हैं…मैं खुद …ऑफटाइम में…छुट्टी के दिनों में डोर टू डोर टीम के साथ जाता हूं…लोगों से हेल्थ के बारे में जानता हूं। उनका इलाज करता हूं। सही सजेशन देता हूं। इसके लिए कोई चार्ज भी नहीं करता हूं। ऐसे लोग जब भी मेरे क्लिनिक पर आते हैं तो उनसे मोटी फी भी नहीं वसूलता हूं। जो सही और जानकारी योग्य चीजें हैं उसे शेयर करता हूं। जगह-जगह कैम्प लगाता हूं। वहां भी आए हुए मरीजों का इलाज करता हूं। अब आप ही बताइए कि क्या मैं एक चिकित्सक होकर जब इतना कुछ कर सकता हूं तो समाज के बांकी लोग थोड़ी बेहतर पहल भी क्यों नहीं कर सकते।

आपको बता दूं कि जब मरीज आते हैं तो टेस्ट के नाम पर…यानि विभिन्न तरह की जांच के नाम पर मोटी रकम खर्च कराए जाते हैं। यहां आपको बता दूं ये डॉक्टर की गलती नहीं है। भारत से बाहर कई देशों में ऐसा ही होता रहा…बाद में चलकर ये व्यवस्था बनी कि हर साल सभी चिकित्सकों को एक टेस्ट पेपर देनी होती है..जिससे ये पता चल सके कि उनके मरीज देखने या चिकित्सा करने का तौर तरीका क्या है। और इस टेस्ट के बाद चिकित्सकों को ट्रेनिंग भी दी जाती है कि कब-कब आपको बीमार लोगों की जांच करानी है। किन मरीजों को आप टेस्ट लिखेंगे। जांच लिखने से पहले डॉक्टर को किन- किन चीजों पर ध्यान देना चाहिए। रोग का पता लगाने का डायरेक्ट जरिया सिर्फ जांच नहीं है और भी बहुत कुछ है। तो ये सारी सुविधाएं या व्यवस्थाएं बनी हुई है। जिसका सख्ती से पालन होता है।

अब आप ही बताएं कि भारत में ऐसा होता है क्या। यही कारण है कि चिकित्सा सेवा इंडिया की सुपर-डुपर होते हुए भी बदनामी का शिकार है। लेकिन ये सब एक दिनों में हो जाएगा ऐसा नहीं है टाइम लगेगा लेकिन बेहतर होगा। बदनामी से मुक्ति मिलेगी।

डॉ प्रकाश कहते हैं कि हमारे दिवंगत पिता डॉ कैप्पटन ए प्रकाश । पटना के पीएमसीएच में चिकित्सक प्रोफेसर के तौर पर सेवा दिए, वो कहते थे कि किताब पढ़ो…अधिक से अधिक ज्ञान अर्जित करो। तभी बड़ा नाम होगा। प्रसिद्दि पा सकोगे। सही रास्ते को अपनाकर ही खुद की और देश की तरक्की की जा सकती है।

डॉ प्रकाश अपने दिवंगत पिता प्रो.कैप्टन डॉ ए प्रकाश की कही बातों को याद कर एक उदाहरण के रूप में विस्तार से कहते हैं कि वो कहा करते थे कि जिस तरह सेंट की शीशी से सेंट स्प्रे करने पर उसकी खुशबू जरूर फैलती है…यानि सेंट की खुशबू फैलाने के लिए स्प्रे करना होता है…और ये खुशबू तब तक ही रहेगी…जब तक हवा में सेंट है। और वहीं तक फैलेगी जहां तक फैलाया गया हो। लेकिन यदि बंद कमरे में सेंट की शीशी को रख दिया जाए तो उसकी खुशबू हमेशा आती रहेगी। वहां आने वाले रह किसी को आपकी खुशबू का एहसास हमेशा रहेगा। कहने का मतलब अपने अंदर ज्ञान के भंडार को जितना भरेंगे। वो खुद व खुद तो फैलेगी ही जीवन में जहां और जिसके पास भी जाएंगे…उसकी खुशबू हर किसी को स्वत: मिलेगी। फैलाने की जरूरत नहीं है।

ऐसे मां-बाप के बीच मैं पला बढ़ा हूं इसलिए चिकित्सा सेवा की बेहतरी के लिए दिन-रात मेहनत करता हूं। अध्ययन करता हूं। और इंसानी जिंदगी को…बीमार जिंदगी को ठीक करने में अपना सौ फीसकी देने से नहीं चुकता हूं। मेरा मानना है कि बिहार में एक से बढ़कर एक चिकित्सक हैं जो देश –दुनिया में जाकर गौरवशाली कार्य कर रहें हैं। गर्व है हमें उन जैसे चिकित्सकों पर। रही बात गरीब लोगों की तो उनकी सेवा सिर्फ पैसे से ही नहीं दिल से भी करता हूं। और ऐसा करने वाले चिकित्सकों की कमी भी नहीं है। जहां खामियां हैं उन्हें दुरूस्त करना मिलजुलकर ही संभव हो सकेगा।

आप मधुमेह रोग विशेषज्ञ हैं…और ये ऐसी बीमारी है जो एक बार किसी के अंदर प्रवेश कर जाए तो फिर सदा के लिए रह जाती है। इससे बड़ी आबादी पीड़ित है । आप क्या कहेंगे। क्या आप इस बीमारी से सदा के लिए निजात मिलने वाली चिकित्सा करते हैं ।

डॉ प्रकाश कहते हैं सरकारी या यूं कहिए कि कागजी आंकड़ा तो काफी भयावह है। हर व्यक्ति मधुमेह रोग से पीड़ हुआ जा रहा है। रही बात इससे निजात की तो आज के दौर में इंसानी रहन-सहन…खान-पान और शारीरिक मेहनत ना करने वाली जिंदगी ने ऐसी स्थिति पैदा कर दी है। और इन सब का इलाज यदि आप चाहेंगे कि किसी मेडिसीन से हो जाए…तो ऐसा नहीं है। मेडिसीन बहुत हद तक ऐसी बीमारी के ग्रोथ को रोक कर रख सकता है…आगे बढ़े नहीं इतनाभर कर सकता है। लेकिन यदि शारीरिक मेहनत करें। योगा करें। जो अपने भारत की संस्कृति और सभ्यता का हिस्सा भी है। ऐसा करने पर मेडिसीन खाने की नौबत तो नहीं ही आएगी।

डायबीटिज के फिल्ड में बेहतर चिकित्सा सेवा के लिए सम्मानित किए जाते रहे हैं डॉ प्रकाश

1. समय पर सोना..

2. समय पर शारीरिक व्यायाम करना…

3. समय पर योगा

4. सही खान-पान की आदत डालना…।

ये सब कुछ ऐसा है जो मेडिसीन को दूर रखने के लिए पर्याप्त है। लेकिन मरीजों को इसकी जानकारी देने के बाद भी वो इन सब चीजों पर अमल नहीं करते हैं। अब इसमें कोई चिकित्सक क्या करे। यही सब कारण है बाजारबाद वाली व्यवस्था इसका फायदा उठाती है और नये-नये प्रयोग करती है। जिसमें इंसानी जिंदगी फंसती चली जाती है।

आप एक चिकित्सक हैं। खुद को कैसे रखते हैं। इंटरटेंनमैंट के लिए क्या करते हैं। कोराना काल में कैसी रही चिकित्सका वाली जिंदगी।

अपने चिकित्सक गुरू के साथ डॉ प्रकाश ।

डॉ. प्रकाश कहने लगे…मेरी जिंदगी को चिकित्सक मां-बाप ने संवारी…गुरू के रूप में देश के प्रसिद्द चिकित्सक डॉ बी. मोहन हैं। जिनसे चिन्नई में ट्रेनिंग ली। ट्रेनिंग के दौरान बहुत आंखें खुली, वो ये कि एक चिकित्सक को अपने मरीजों का ख्याल किस तरह रखना है। समाज में चिकित्सक की क्या भूमिका है। मुझे गर्व है अपने मां-पिता और गुरू पर। पिता की याद में हमने पटना के अनिसाबाद में मधुमेह रोग के लिए खास हॉस्पिटल की स्थापना की। जो डॉ प्रकाश डायबीटिज स्पेशलिटी सेंटर के नाम से पुलिस कॉलोनी अनिसाबाद में स्थित है। यहीं से चिकित्सा सेवा में लगा रहता हूं।

सौभाग्य हमारा ये भी है कि पत्नी भी चिकित्सक हैं और बिहार के बड़े सरकारी अस्पातल पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल (पीएमसीएच) में अपनी सेवा दे रही हैं। दो बच्चे हैं। चिकित्सा सेवा से काम पूरा कर उनके संवारने में लग जाता हूं। दोनों बच्चों के साथ खेलना…उसकी पढ़ाई करवाना…अच्छे संकार देना…सब करता रहता हूं। पति-पत्नी मिलकर बच्चे को खुद ही पढ़ाता हूं। इसी में खुश हूं। ईमानदारी से अपनी सेवा देता रहूं। भूल से भी कोई भूल हो ना इसी कामना के साथ काम में लगा रहता हूं। यही मेरे मनोरंजन का पार्ट है।

टेलीविजन देखने का कोई बहुत शौक नहीं। बच्चों को भी मोबाइल, टीवी से दूर ही रखता हूं। न्यूज थोड़ा बहुत सुन लेता हूं। यदाकदा फिल्में देखता हूं….गायकी सम्राट मुकेश की गीतों का फैन हूं…स्टूमेंटल शॉंग बजाकर अपने दिल-दिमाग को सुकून भरी जिंदगी में ले जाता हूं…कभी गुनगुनाने का शौक रहा नहीं लेकिन मुकेश के गाने…जिदगी के सफर की सच्चाई से अवगत कराती रहती है।

करोना काल में भी जिदगी चुनौती पूर्ण रही…इस दौरान भी सेवा करता रहा। ये महामारी वास्तव में भयावह है…बच के रहने की जरूरत है। फेफरा और हृदय दोनों पर ये एटैक करता है। ये कोई सोंचता है कि किसी को कोई बीमारी है तभी नुकासन होगा…ऐसा बिल्कुल नहीं है। ऐसे कई उदाहरण सामने आए है जिन्हें कोई बीमारी नहीं थी, युवा थे, चिकित्सक थे..उनकी भी जान चली गई। इसलिए सोशल डिस्टेंस, मास्क का प्रयोग करते रहिए।

रही बात अपने चिकित्सीय सेवा में उंचाइयों पर जाने की या फिर कुछ बड़ा करने की तो कभी ऐसा कुछ सोंचता नहीं बस यही जानता हूं कि जो मिला हैं उसमें करने को थोड़ी सी है…और थोड़े और की जरूरत है।

बहुत-बहुत धन्यवाद डॉ प्रकाश । आपने मौर्य न्यूज18 को इतना वक्त दिया।

चलते-चलते…

डॉ प्रकाश से खास मुलाकात को पढ़कर कैसा लगा। आप अपनी प्रतिक्रिया जरूर दें । हो सके तो इस खबर को शेयर भी करें। आगे हम चिकित्सा सेवा से जुड़ी और अन्य उभरते हुए हस्तियों से आपको रूबरू करते रहेंगे । ताकि आप भी जान सकें कि हमारे बीच कैसे-कैसे इंसान हैं। जो चिकित्सा सेवा में मानवीय पहलू पर काफी ध्यान देते हैं। और उनकी जिंदगी भी कैसी है।

पटना से मौर्य न्यूज18 के लिए नयन की रिपोर्ट ।

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