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शाह तेरा वैशाली आना और कुछ ललकारना, पुचकारना…कैसा रहा ! Maurya News18

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नयन की नज़र से – पॉलिटिक्स

नयन कुमार. पटना, मौर्य न्यूज18 ।

शाह आये…हुंकार भरी औऱ उड़ लिए…।

देश की सत्ता के शाह और भाजपा के अमित शाह आएंगे, महफिल लूट ले जाएंगे…शाह साहब वैशाली में तेरा आना क्या हुआ, कार्यकर्ताओं में जोश लवालब भर गए। जैसे कोई सुनामी आता हो…जोश भी कुछ उसी कदर आये, नतीजतन, जो सक्रिय होकर भी सोए, अलसाये कार्यकर्ताओं थे वो भी जाग गये…फिर क्या था, झंडे उठाए और जिंदाबाद के नारे लगाने लगे और चिल्लाने लगे…तू ही तो है जन्नत मेरी… शाह तेरा जवाब नहीं। वजह भी साफ थी, देश की सत्ता के शाह बिहार की वैशाली की धरती पर जो आये थे, वो, गर्जे…हुंकार भरी…कुछ ललकारा…कुछ पुचकारा…चुनावी बिगूल भी फूंके और उड़ लिए।

शाह का उड़न खटोला वैशाली ही क्यों पहुंचा…

वैशाली कई मायनों में इतिहास में दर्ज है। और आने वाली पीढ़ी भी वैशाली को हमेशा एतिहासिक धरती के रूप में ही जानेगी । इस धरती से सत्ता की हनक भी कभी पूरी दुनिया में चलती रही है। ऐसे में शाह साहब का बतौर गृह मंत्री यहां आना भले ही देश के लोगों को या बिहार के लोगों को समझ में नहीं आया हो, आप सोंच रहे होंगे कि इस धरती को शाह ने हुंकार के लिए क्यों आए…मिशन सीएए के विरोधियों को ललकारने के लिए इसी धरती को क्यों चुना, आखिर इस विरान इलाके में शाह उड़न खटोला लेकर क्यों पहुंचे…., सवाल कई हैं लेकिन जवाब एक ही हैं – शाह की चाल। उनके कदम चाणक्य के कदम । शाह यूं ही कुछ नहीं करते। यदि आपने उनकी बातों को सुननी है तो शायद कुछ समझ में आ भी गई होगी।

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जो ना समझे वो अनाड़ी है….

यदि नहीं समझ रहे तो जान लीजिए वैशाली देश का पहला गणराज्य रहा है, यहां से सत्ता चलती रही है और इस धरती पर सभी धर्म गुरूओं ने दुनिया को शांति का संदेश दिया है, इसलिए इस पावन धरती को….पावन दिन मकर संक्रांति पर जब सूर्य दक्षिण से उतर की ओर रूख करता है तो वो दिन सनातन धर्म के अनुसार पावन दिन कहलाता है…यानि मकर संक्रांति..इसलिए मौका भी था और वक्त भी…सो, शाह साहब सीएए के विरोधियों को ललकार गए और सीएए के नासमझों को भी शांत रहने के लिए हुंकार भरी। थोड़ा चेताया भी, थोड़ा पुचकारा भी ।  

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इतना ही नहीं, बिहार में इसी साल चुनाव भी होने है सो, चुनावी विगुल भी फूंक दिया…मंच से साफ कहा कि बिहार में नीतीश ही हमारे “वो” हैं…। अब चाहे नीतीश के चाल जैसे भी हों, उनके धुन से चाहे जैसे भी राग निकलते हों, शाह ने कह दिया तो अब इसमें इफ-बट नहीं है। अब समझने वाले समझ रहे हैं…जो ना समझे वो अनाड़ी है।

शाह ने मंच के नेताओं को कुछ यूं कहा…आप हमारे क्या हो…।

शाह के मंच पर उनके सेनाओं की मौजूदगी भी कमाल की थी। संबोधन की शुरूआती लब्जों पर गौर करें तो नेताओं को भी गदगद किया… मंच पर भाजपा के सिनियर लीडर पूर्व केन्द्रीय मंत्री डॉ सीपी ठाकुर, पूर्व केन्द्रीय मंत्री राजीव प्रताप रूढ़ी, केन्द्रीय मंत्री अश्विनी चौबे, सांसद औऱ प्रदेश अध्यक्ष डॉ संजय जायसवाल, सांसद जनार्दन सिंह सिग्रिवाल से लेकर विधान पार्षद संजय मयूख तक मौजूद रहे। लेकिन कुछ के नाम के आगे अपने अंदाज से विशेष महत्वपूर्ण शब्दों को जोड़ कर लिए। मसलन, जनता में हिन्दू सम्राट से पॉपुलर केन्द्रीय मंत्री गिरिराज सिंह को हमारे साथी और दिग्गज नेता कहा तो केन्द्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद को बड़े भाई, तो गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय को हमारे सहयोगी, वहीं उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी को हमारे बिहार की कमान संभालने वाला नेता बताया। यानि पब्लिक मंच से साफ संकेत कर गए कि हमारे लिए कौन क्या हैं।।  

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वैशाली की धरती से मौर्य न्यूज18 की खास रिपोर्ट

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