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होमBIHAR NEWSबिहार कांग्रेस को मिला युवराज! पहला इंटरव्यू ! Maurya News18

बिहार कांग्रेस को मिला युवराज! पहला इंटरव्यू ! Maurya News18

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खास बातचीत : कांग्रेस के युवा उम्मीदवार शाश्वत केदार पांडेय बोले – जनता मेरे साथ

पूर्व मुख्यमंत्री के पोते को बाल्मीकिनगर लोकसभा सीट से टिकट मिलने बिहार कांग्रेस उत्साहित

बोले, मां की मेहनत रंग लाई, करेंगे बाबा के सपने पूरे !

खास मुलाकात नयन के साथ

पटना। मौर्य न्यूज18 ।

बेतिया से सांसद रहे मनोज पांडेय। कैंसर ने उन्हें ज्यादा कुछ करने का मौका नहीं दिया। और 1996 में चल बसे। फिर मां नूतन पांडेय ने आठ साल की मासूम जिंदगी को आंचल में लेकर वो सपने संजोने लगी जो उनके पति ने देखे थे। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री केदार पांडेय की बहू होने का गौरव लिए और पति के सांसद होने का मान उन्हें ताकत देता रहा और इन्हीं ताकतों के बल पर अपने आठ साल के मासूम को पालने में जुट गईं। नौकरी कीं और विकलांगों की सेवा करती रहीं। इस काम में धुन की इतनी पक्की कि देश का दिल जीत लीं। फिर क्या था, राष्ट्रीय पुरस्कार पाईं और उठ खड़ा हुई, राजनीति के मैदान में।

समय बदला, पर सपने नहीं। 1996 में पति की मौत ने हिलाया जरूर था, पर मिटाया नहीं था, सो, सपने 2019 में भी लहलाती फसलों की तरह जिंदा है, । नूतन पांडेय के लिए ये कहने की बात नहीं, ये हकीकत है कि राजनीति में मुख्यमंत्री की बहू कहलाईं, एमपी की पत्नी कहलाईं और अब एमपी की मां कहलाने की तैयारी है। वो सपना शायद अब अपना होने को बेताब है। आठ साल का मासूम अब 32 का हो चला है। बाल्मीकिनगर लोकसभा सीट से कांग्रेस का उम्मीदवार बन चुका है। और नाम है शाश्वत केदार पांडेय।

मौर्य न्यूज18 के लिए हमने इस युवा कांग्रेसी से बातचीत की औऱ जानना चाहा कि ये सब कैसे हुआ ?

शाश्वत बताते हैं कि ये सब मां की देन है। पिता के निधन के टाइम मैं 8 साल का था और मुझसे 2 साल बड़ी मेरी दीदी थी। पिता का साया उठ जाने के बाद मां के सामने बच्चों की परवरिश की चुनौती थी और जनता से दूर ना होकर रहने की भी। क्योंकि हमारे बाबा केदार पांडेय बिहार के मुख्यमंत्री रहे। पिता मनोज पांडेय बेतिया सांसद रहे। ऐसे में मां के बीच दोनों के बिना दो बच्चों को पालना जरूरी था ना कि राजनीति लाभ उठाना। जबकि जनता का दवाब उस समय ऐसा था कि मां चाहती तो पारिवारिक पृष्ठभूमि और सहानभुति का लाभ लेकर राजनीति को कायम रख सकती थीं। लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। हम दोनों बच्चों को पढ़ाया लिखाया। खुद सरकारी नौकरी कीं और दिव्यांगों की सेवा में लगी रहीं। जनता से मिलना जुलना जरी रखा। हमने भी एमबीए करने के बाद मल्टीनेशनल कंपनी में नौकरी करनी शुरू कर दी।

लेकिन मां पर जनता का दवाब कायम था। हमारे चंपारण इलाके कि पब्लिक, चाहे वो बेतिया के हो या बाल्मिकीनगर के हों सबका मन था मां जनप्रतिनिधि के तौर पर फिर से जनता की सेवा में लगे। लेकिन मां ने इसके लिए मुझे चुना और कहा कि बेटा नौकरी छोड़ो और अपने बाबा और पापा के अधूरे सपने को पूरा करने का समय आ गया है। तुम्हें अब जनता की सेवा में लगना होगा और इस तरह मैं कांग्रेस पार्टी से जुड़ा और बिहार युवा कांग्रेस के सचिव के तौरपर मैं 2013 से संगठन के कार्यकर्ता के तौर पर काम करता आ रहा हूं। अब मुझे मौका मिला है, राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने मुझे बाल्मिकीनगर लोकसभा सीट से प्रत्याशी के तौर पर चुना है। भरोसा जताया है। इसके लिए उन्हें बहुत-बहुत बधाई देता हूं और बिहार की पूरी कांग्रेस टीम ने भी मेरे प्रति जो भरोसा औऱ विश्वास जताया है वो मेरे लिए बहुत बड़ी बात है। बहुत आभार सभी अभिभावक तुल्य पार्टी लीडरों का। मुझे पूरा भरोसा है कि जनता मुझे मेरे बाबा और पिता जी के सपने पूरा करने का मौका जरूर देगी।

प्रश्न- शाश्वत ! क्या आपकी राहुल गांधी से इस संबंध में कोई बातचीत हुई। या राहुल गांधी ने आपसे कोई इंटरव्यू वैगरह लिया ?

शाश्वत- नहीं ऐसा कोई इंटरव्यू तो नहीं लिया लेकिन हां ये था कि मुलाकात की थी उन्होंने। टिकट देने से पहले मिला था। बहुत सारी बातें तो नहीं हुई पर वहां कई शीर्ष नेता मौजूद थे, उनके बीच मुझे बुलाया गया था। मेरे बारे में पूरा फिडबैक उन्हें पता था। साथ में कुछ शीर्ष नेता बिहार के थे वो उन्हें ब्रिफ कर चुके थे। सो, उन्होंने मेरे अंदर जोश भरा और कहा कि बस जनता की सेवा करनी है। इसी संकल्प के साथ काम में लग जाइए। सब कुछ भुलाकर। यही बात मुझे भी पसंद आयी। हाथ मिलाया और फिर मिलेंगे कहकर बेस्टऑफ लक कहा। टिकट मिलने से पहले की यही एक छोटी सी मुलाकात थी।

प्रश्न- क्या आपका यकीन था कि मुझे इस बार सांसद का टिकट मिल जाएगा। या इतनी कम सीट बिहार में रही और उन 9 उम्मीदवारों में एक आप भी हैं। जबकि कई दिग्गज को बाट जोहते रह गए ?

शाश्वत– बात सही है कि मैं इस मामले में खुशकिस्मत निकला कि मुझे इतनी जल्दी टिकट मिलने में सफलता मिली। इसके लिए मैं अपनी मां और बाब-पापा के आशीर्वाद का नतिजा मानता हूं। औऱ बिहार के साथ-साथ उन तमाम लीडरों को इसका श्रेय देना चाहता हूं जिन्होंने मुझे इस योग्य समझा और भरोसा जताया। मेरे सामने सबके भरोसे पर खड़े उतरने की चुनौती है। रही बात दिग्गजों की तो सभी लोग मेरे से दिग्गज ही हैं। लेकिन जब 9 सीट बिहार कांग्रेस के हाथ आई तो उम्मीदवार भी तो उतने ही होंगे। और क्षेत्र के हिसाब से उम्मीदवार को चुनाना होता है। हर किसी लीडर को कहीं से भी टिकट दे दिया जाएगा ऐसा तो नहीं है। इसलिए पार्टी के सामने भी चुनौती तो रहती ही है। मेरा तो क्षेत्र बेतिया रहा है लेकिन गठबंधन में बेतिया राजद के खाते में गया तो बाल्मिकिनगर सीट मिली।

यहां भी शुरू में कई दिग्गजों का नाम आ रहा था। कीर्ति झा आजाद के नाम थे लेकिन उनके इनकार के बाद कई और नाम चल रहे थे। मैं तो दूर-दूर तक नहीं था, हां उम्मीदवारी के लिए हमने नाम भरे थे। लिस्ट में मेरा नाम जरूर था। मेरी मां इसके लिए पूरा प्रयास कर रहीं थीं। लेकिन प्रयास उतना ही किया था जितना कि पार्टी के बिहार के लीडरों से दिशा-निर्देश मिलता रहा। मेरी ओर से कोई जोर-जबर्दस्ती वाली बात नहीं थी। कि चाहिए ही। लेकिन जब एकाएक फोन आया मिलिए और टिकट दिए जाने की बात चलने लगी तो यकीन ही नहीं हो रहा था। लास्ट टाइम में चुना गया। बहुत खुशी हुई टिकट पाकर। वैसे पार्टी किसी औऱ उम्मीदवार को चुनती तो भी मैं उतनी ही मेहनत से संगठन के लिए काम में जुटता जितनी अब उम्मीदवार के तौर पर ।

प्रश्न- आपको  टिकट दिया गया लेकिन क्षेत्र में आपके विरोधी तो आप पर परिवारवाद का हमला करेंगे। कांग्रेस परिवार के बीच टिकट बांटती है ये आरोप तो लगेंगे। फिर कैसे सामना करेंगे। क्या कहेंगे।

शाश्वत- सही है। विरोधी कहेंगे। पारिवारिक होने का आरोप गलत भी नहीं है। जब मेरे बाबा केदार पांडेय मुख्यमंत्री रहे। मेरे पापा मनोज पांडेय बेतिया से सांसद रहे। ये सब तो जनता के जरिए चुने गए। अब जब मुझे बाल्मिकीनगर लोकसभा लड़ना है तो वहां कि जनता को इसका फैसला करना है कि किसे चुनेगी। जब मेरे परिवार ने जनता की सेवा ईमानदारी पूर्वक की है। तो मैं भी करूंगा। जनता को मुझे परखने की जरूरत नहीं। जनता जनती है कि उनका सांसद कैसा हो। किस तरह का हो और कौन हो। और जनता फिर अपना निर्णय  वोट के जरिए कर देती है। इसलिए विरोधियों की बातों पर मुझे कोई ध्यान नहीं देना है। जनता इसका जवाब खुद दे देगी। और रही बात उम्मीदवारी की तो मैं और मेरी मां लगातार बेतिया और बाल्मिकीनगर में जनता के बीच जाकर उनसे इस बारे में राय लेते रहे हैं। जनता की ईच्छा थी कि मैं चुनाव में हिस्सा लूं और जनप्रतिधि के तौर पर क्षेत्र का विकास करूं।

प्रश्न- चारो ओर मोदी-मोदी के नारे लग रहे। बिहार में नीतीशे कुमार औऱ देश में मोदी-मोदी इन सब के बीच आप कैसे अपनी नैया पार लगाएंगे।

शाश्वत- इससे इनकार नहीं किया जा सकता कि नारेबाजी में मोदी-मोदी सबसे आगे चलता है। कांग्रेस की रैली में भी, या सभा में भी मोदी-मोदी करने वाले पहुंच जाते। ये सब चलता रहेगा। लेकिन इससे मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता। मुझे पता है जनता के बीच क्या बात रखनी है। जनता खुद मुझे चुनने को बेताब है। कांग्रेस युवा चेहरे के तौर पर मुझे चुना है। जनता युवाओं की शक्ति को पहचाती है। भरोसा करती है। इलाके का मनमिजाज पूरी तरह से कांग्रेस की ओर है। औऱ दूसरी बात इलाके की जनता खुद चाहती कि मैं या मेरी मां चुनाव मैदान में आएं। सो, कांग्रेस ने जब जनता के मनमुताबिक उम्मीदवार दिया है तो कोई नारा काम नहीं करने वाला। सिवाय कांग्रेस के।

प्रश्न- क्या आपके चुनाव प्रचार में राहुल गांधी या प्रियंका गांधी आएंगी। क्या प्रियंका गांधी के आने से कांग्रेस को फायदा हो रहा है ?

शाश्वत – मैं तो चाहूंगा कि राहुल गांधी मेरे लिए चुनावी सभा करें। प्रियंका जी को यूपी का कमान दिया गया है। अगर वो भी आएंगी तो मेरे लिए और भी बड़ी बात होगी। लेकिन ये सब पार्टी तय करेगी। मुझे उम्मीद है कि राहल गांधी जरूर आएंगे। रही बात प्रियंका गांधी की तो उनके राजनीति में फिर से सक्रिय होने से पार्टी को काफी लाभ हो रहा है और नतीजे बेहतर होंगे। जिस तरह से प्रियंका जी जहां जा रहीं है और अपार जनसमर्थन उन्हें मिल रहा है। सत्ताधारियों के सामने चुनौती बनी हुई। प्रियंका गांधीजी का डर तो सत्ताधारी दलों में जरूर है। इसी बात से अंदाज लगाया जा सकता है कि उनके आने से क्या कुछ होने वाला है।

प्रश्न- आप सांसद बनेंगे तो आपकी प्राथमिकता में क्या रहेगी। कौन सा काम पहले करना चाहेंगे ?

शाश्वत- मैं इलाके में गन्ना किसानों के लिए सबसे पहले काम करूंगा। गन्ने का उत्पाद बढ़ाकर वहां के चीनी मीलों में अधिक से अधिक गन्ने उपलब्ध कराकर उत्पादन बढ़ाउंगा। इससे रोजगार और आदमनी बढ़ेगी। गन्ना किसानों आर्थिक तंगी से बाहर निकल आएंगे। और आर्थिक संपंता आएगी। दूसरी प्राथमिकता होगी। शिक्षा को लेकर। मैं इलाके के तमाम सरकारी स्कूलों को दूरूस्त करवाउंगा और बेहतर शिक्षा कैसे उपलब्ध हो इसपर जरूर काम करूंगा। युवाओं को रोजगार योग्य कैसे बनाया जाए इसपर काम करूंगा। ताकि बेरोजगारी दूर की जा सके। जनता के बीच हमेशा उपलब्ध रहना भी हमारी प्राथमिकता होगी।

प्रश्न- बिहार में सीएम नीतीश कुमार को किस रूप में देखते हैं। क्या राजद नेता तेजस्वी यादव की राजनीति चाल से आपको लगता है कि वो पार्टी को सही दिशा मे ले जा रहे। कांग्रेस से अच्छे रिश्ते निभा पाएंगे।

शाश्वत- बिहार के सीएम व्यक्तिगत तौर पर अच्छे हैं। मुख्यमंत्री के तौर पर भी काम को बेहतर करते रहे। लेकिन पिछले कार्यकाल से बिल्कुल भटक से गए लगते हैं। काफी भटकाव दिखता है। पहले की तरह एक चित वाले नहीं दिखते। ये साफ देखा जा सकता है। जो दुखद है। पाला बदलने की घटना से छवि पर भी असर पड़ता ही है। जीत हार अलग चीज है। और छवि अलग चीज है।  रही बात राजद नेता तेजस्वी की तो वो पार्टी को अपने पिता की अनुपस्थिति में सही दिशा में ले जा रहे। अभी उनकी जितनी उम्र है उस हिसाब से संगठन को बेहतर से चला रहे। हमें पूरा भरोसा है कि हमारे चुनावी सभा में भी साथ देने आएंगे। रही बात कांग्रेस से संबंध की तो ये तो पार्टीस्तर की बात है। पार्टी शुरू से साथ रही है। आगे में साथ रहेगी। जनता यही चाहती भी है।

पटना से मौर्य न्यूज18 की खास रिपोर्ट

Nayan Kumarhttp://www.mauryanews18.com%20
MANAGING EDITOR MAURYA X NEWS18 PVT LTD . #March 2019 to till now ------- #20yrs Experience field of Journalism, #Mass Com - Print Media & Electronic Media #Former Sr. Subeditor, Dainik Jagaran, India's No-1 Hindi Daily News Paper, Patna, Bihar, 12 April 2000 -March2008 #Former Channel Co-Ordinator, Maurya Tv, Patna, Bihar/Jharkhand, April 2008 - March 2013 Channel Co-Ordinator, Zee Bihar/Jharkhand news from march 2013- march2014 #Editor, Ommtimes.com news portal, Patna, Bihar, April 2014 - AuG2018 #Former Editor, Maurya News, news Portal, Sept.2018-Feb2019

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