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खुश होने को जी चाहता है…रोड शो!

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पटना में राहुल गांधी के रोड शो के बाद झूम उठे कांग्रेसी

भाजपा के गढ़ में राहुल चले रस के कदम, शत्रु बमबम, साथियों से कहा, चलो अब चैन की नींद सोया जाए

नयन, पटना, मौर्य न्यूज18 ।

16 मई 2019 कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पटना की सड़कों पर रहे। दो घंटे रहे। रोड शो किया। शायाद बिहार में पहला मौका है जब पटना में रोड शो किसी कांग्रेस अध्यक्ष ने किया हो। पर 16 मई गहवा बना रोड शो के नाम। कांग्रेस के नाम। कांग्रेस अध्यक्ष के नाम। पटना साहिब लोकसभा क्षेत्र के नाम।

कल तक शत्रुघ्न सिन्हा भाजपा के पाले में थे, तो निश्तित रहते थे, ऐसा मान कर चला करते थे कि पटना तो पटा ही है मेरे लिए। लेकिन पाला बदला तो पटना गुस्से से पट-पटाया औऱ हालत ये हो गई कि पटाए नहीं पट रहा था ।

पटना की जनता

सच कहें तो हाल. ऐसा था जनाब का कि इनपर ये गाना भी फिट बैठने लगा कि ये गलिया ये चौराहा यहां आना ना दोबारा…क्योंकि तुम तो हुए परदेसी…तेरा यहां कोई नहीं। ऐसी हालत हो गई थी। जनता स्वीकार करने को तैयार नहीं, भाजपा बिना पटना सून वाली बात कहते हैं सब इसलिए यहां उम्मीदवार कोई हो भाजपा से हो तो शत्रु भी चलेगा लेकिन भाजपा से नहीं तो दोस्त भी रिजेक्ट।

लेकिन शत्रु सबकी परवाह किए बिना कांग्रेसे का दमान थाम कर पटना में चुनावी जंंग में कूद पड़े। कूदे तो सही लेकिन कांग्रेसी बनने के बाद खुद शत्रु कंफर्ट जोन में नहीं दिखे।

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पटना की जनता भी इसे पचा ही नहीं पा रही थी। कह सकते है कि कुछ दिनों तक शत्रु भी शायद कांग्रेस में जाने को नहीं पचा पा रहे थे। इस बात से इनकार इसलिए नहीं किया जा सकता क्योकि वो भाजपा से कांग्रेस में आने के बाद काफी सुस्त दिखे। प्रचार-प्रसार के लिए भी पटना में जल्दबाजी नहीं की। आराम से निकलते रहे। कोई हड़बड़ी नहीं कि जनता से मिला जाए। बस औपचारिकता भर दिखती रही। लेकिन दो चार दिन कांग्रेस के आगंन में डेरा डालते-डालते दिल लगने लगा। पटना साहिब में कांग्रेसियों के साथ सभाएं करनी शुरू की। फिर तो जोश ऐसा आया कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी भी भागे चले आये। औऱ पटना की सड़कों पर उतर कर दिखाया कि शत्रु आप इन भाजपाइयों को छोड़ना नहीं। मैं तुम्हारे साथ हूं। आप ही पटना के शत्रु हो। आप ही पटना के साहिब हो।

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कहने की बात नहीं कि रोड शो धमाकेदार रहा। दुलहन की तरह गाड़ियां सजीं और दुल्हे की तरह शत्रु अपनी दुल्हनिया को लेकर रथ पर सवार हो गये औऱ सहवाले की तरह साथ हुए राहुल गांधी। मजेदार नजारा। बारात पूरी तरह से उड़ पड़ी। सड़के कांग्रेसी मय हो गईं। और राहुल गद-गद। शत्रु की आंखेभर आयीं औऱ खुशी के मारे झूम उठे। कल तक लग रहा था कि विरोधियों की कही बातें कहीं सच ना हो जाए कि” पटना से जमानत भी नहीं बचा पाएंगे”। जनता का रिशपॉंश देखकर जान में जान आया हो जैसे। अब शत्रु को लगता है कि भाजपा को पानी पीला -पिलाकर बाजीगर बनेगें।

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ऐसी उम्मीदें पाल कर कांग्रेसी झूमभी रहे है। खुशियां देखते बनती है। वो भी ऐसी किजैसे उन्होंने रोड शो मतदान से पहले नहीं। जीत के रिजल्ट निकलने के बाद किया हो। खैंर, खुशियां मनाइए।

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पटना में भाजपा और कांग्रेस का रोड शो – फर्क समझिए !

लेकिन सच्चाई पर गौर करें तो ये खुशियां काग्रेसियों के लिए इतना भर है कि आप रेस में है। अब अगर पटना में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी औऱ भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के रोड शो की तुलना करेंगे तो एक फर्क साफ दिखा – भाजपा के रोड शो में भीड़ भी थी। औऱ कसी हुई भीड़ औऱ उसमें जनता और भाजपा कार्यकर्ताओं का कमिटमेंट पावर दिखा। अर्गल उत्साह नहीं थी। जोश से भरा शो था। यहां कांग्रेस का उत्हास इस बात से दिखा कि हमने भी रोड शो में भीड़ जुटा ली। यही फर्क दिखा कांग्रेसी और बीजेपी में। कांग्रेस को अब भी सोचना होगा कि क्या ये रोड शो ही जीत दिला देगा या उम्मीदवार को और मेहनत करनी होगी। बुरा मानो या भला पटना शत्र

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पटना में रोड शो – बिहार कांग्रेस के पूर्वप्रदेश अध्यक्ष अनिल शर्मा, कार्यकारी अध्यक्ष कौकब कादरी सहित कई सिनियर लीडर रोड शो में शामिल और भीड़ का नजरा देख सकते हैं । पटना से मौर्य न्यूज18

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सिर्फ रोड शो से क्या शत्रु चैन की नींद सो पाएंगे !

क्योंकि काग्रेसी उम्मीदवार जिसतरह से रोड शो के बाद चैन से सोने की बात करने लगे। वो दुखद है > अब तो महज घंटों में समय बचे हैं- मतदान होना है। वैसे जनता की राय जानें, तो पटना की जनता बहुत पहले ही मूड बना चुकी है कि क्या करना है। भाजपा का गढ होने के बाद भी भाजपा के उम्मीदवार की कड़ी मेहनत करते दिख रहे है। वजह साफ है, वो कांग्रेस प्रतद्वंदी शत्रुघ्न सिन्हा को हलके में नहीं ले रहे । इसकी सराहना अंदर- ही अंदर कुछ कांग्रेसी भी करते हैं कि रविशंकर प्रसाद मेहनत बहुत कर रहे। शत्रु जी इस मामले में कमजोर दिखते हैं। आखिर ऐसी बातें क्यों हो रही। वजह साफ है, शत्रुघ्न सिन्हा भाजपा में रहकर भाजपा के गढ़ से चुनाव लड़ते रहे। मामूली मेहनत के भी जीत हांसिल हो जाती थी। वही आदात अब भी लगी हुई है। लेकिन ये समझना होगा कि लोकेशन वही है सिचुएशन बदला हुआ है। डॉयलॉग देने से काम नहीं चलेगा। सचाई भी यही है।

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इसलिए रोड शो कांग्रेसियों को ढेर सारी खुशियां जरूर दे गई लेकिन चुनावी जंग में अंतिम समय तक मेहनत करनी पड़ेगी पटना के उम्मीदवार को।

पटना से मौर्य न्यूज18 के लिए नयन की रिपोर्ट

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