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आंतरिक ऊर्जा से खुद को स्वस्थ कैसे बनाएं बता रहीं रेकी मास्टर शेफाली ! Maurya News18

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खास मुलाकात : कोच शेफाली रस्तोगी

बबली सिंह, नई दिल्ली, मौर्य न्यूज18

मौर्य न्यूज 18 कि खास पेशकश में हम आपको एक अनोखी शक्ती रेकी के बारे में बताने जा रहे है, कि कैसे हमारे शरीर में उत्पन्न होने वाले बिकार को हम अपनी ऊर्जा द्वारा ठीक कर सकते हैं ,आइए विस्तार से जानते हैं रेकी के बारे में हमारी आज की मेहमान हैं दिल्ली की सुप्रसिद्ध रेकी मास्टर शेफाली रस्तोगी ।

मन के हारे हार है मन के जीते जीत

रेकी चिकित्सा जो किसी भी बीमारी से लडने की क्षमता को बढ़ा सकता है ,सचमुच सकारात्मक ऊर्जा हमे हर बाधाओं से लडने की सकती प्रदान करता है ,और आज हमने इसके बारे में ज्यादा से ज्यादा जाना । दोस्तो ये तो हम सभी जानते है कि प्रार्थना में बहुत शक्ति होती है और विश्वास से बढ़कर कोई औषधि नहीं है, मस्तिष्क को बलवान बनाने के लिए अगर हम किसी भी बिकट परिस्थती में खुद को स्वस्थ और वलवान मानेंगे तो हमारा शरीर भी वैसे रिएक्ट करेगा । इसलिए तो कहते है कि मन के हारे हार है, मन के जीते जीत ।

हम आज पहाड़ों और बड़े बड़े तीर्थ स्थल घूमने जाते है तो वहां देखते है कि बहुत सारे साधु महात्मा तप में बिना कुछ खाए पिए निर्वस्त्र अवस्था में लीन होते है क्या उन्हें ठंड ,गर्मी ,बारिश ओले या कोई भी प्राकृतिक मौसम क्षति नहीं पहुंचाती , उनपर क्षणिक भी भाव नहीं होते इन सब चीजों का । ऐसा इसलिए क्योंकि उन्होंने अपने अंदर की ऊर्जा को बढ़ाए रखा है उनके मस्तिष्क पर उनका पूरा नियत्रं है जिससे उनको इन सब चीजों का आभास ही नहीं होता है ,ये वो ऊर्जा है जो उन्हें शक्ति प्रदान कर रहीं है उन्हें कोई बीमारी भी छू नहीं सकती क्यूंकि उन्होंने अपनी ऊर्जा को ही उपचार बना लिया है ,ये जो ऊर्जा है यह हम सभी के अंदर है बस इसे पहचानने कि जरूरत है ।

हम इसपर ही चर्चा करेंगे कि कैसे रेकी से जुड़े और इसका लाभ उठाए आइए जानते है हमारे कुछ प्रश्न।

रेकी क्या है ?

मास्टर शेफाली बताती हैं कि रेकी एक हीलिंग टेक्निक है ,रेकी एक जैपनीज वर्ड है, जिसके अनुसार रे यानी यूनिवर्स और की मतलब होता है शक्ति, इसके बहुत सारे अर्थ है जैसे कि संस्कृत में इसको प्राण ऊर्जा भी बोलते है जो सर्वव्यापी है । इसको ईश्वरीय शक्ति के नाम से भी जाना जाता है।रेकी को गुरु शिष्य परंपरा की तरह सिखाया जाता है । इसमें एक रेकी टीचर इसको एक चैनल की तरह बनाता है ।

चैनल बनाने का मतलब है कि गुरु परंपरा में दीक्षा दी जाती है, वैसे ही रेकी में भी एक तरह की दीक्षा दी जाती है जिसके अन्तर्गत आपके बॉडी में जो एनर्जी सिस्टम है उसके ग्रह और चक्रों कि क्लीन किया जाता है,उसके बाद रेकी के सिंबल डाले जाते है ताकि आप रेकी चैनल बन जाए,इसके बाद आपको एक प्रेक्टिस करवाई जाती है कि कैसे आप रेकी का आवाहन कर सकते है,इसमें हम बताते है कि कैसे हम अपने हाथों को अपने शरीर के विभिन्न भागों पर रखते है , तो हमे एक ऊर्जा महसूस होती है,जैसे कि हमारे हाथों से कुछ निकल रहा है और हमारे शरीर को एक गर्माहट महसूस हो रहा है। और इस अनुभव को हीलिंग पॉवर कहते है।

क्या स्वयं अपना उपचार कर सकते है ?

रेकी मास्टर शेफाली कहती हैं कि रेकी के आवाहन से हम खुद को स्वस्थ बना सकते है । जैसे कि हमारे सिर में ,पेट में या शरीर के किसी भी भाग में दर्द महसूस होता है तो उसे ठीक कर सकते है ।बस रेकी का आवाहन करे और अपने एनर्जी को पहचाने और जिस भी हिस्से में दर्द हो वहां अपना हाथ रख दे यकीन मानिए दर्द धीरे धीरे कम होना शुरू हो जाएगा ।मास्टर का ये भी कहना था कि अगर किसी को सुगर ,ब्लड प्रेशर , हैपर्टेंशन, डिप्रेशन , पैरालाइसिस भी हो तो उसका भी उपचार संभव है रेकी के द्वारा जिसके अन्तर्गत दो महीने की रेगूलर हीलिंग करने के बाद जब वो टेस्ट करवाते है तो उनकी सारी बीमारियां नॉर्मल हो जाती है,और इसके बाद उन्हें मेडिसिन भी खाने की जरूरत नहीं होती है ।

अपने शरीर में एनर्जी कैसे स्टोर कर सकते

हमारा जो शरीर है वो सेल्स यानी कोशिकाओं से बना है और हर सेल को एनर्जी चाहिए होती है काम करने के लिए फिर वो एनर्जी आप खाने से दे जिससे की बॉडी के सेल्स में खाने के द्वारा ऊर्जा मिल सके या मेडिटेशन और हीलिंग के द्वारा हम हमारे बॉडी की जो नेचुलर एनर्जी है उसे रिस्टोर कर सकते है । एक ऊर्जा जो खाने से मिल रहीं थीं वहीं दूसरी हमे मेडिटेशन से मिल रहीं है लेकिन दोनों में बस यहीं फर्क है कि खाने से जो ऊर्जा मिलती है वो कड़ी मेहनत के बाद ख़त्म हो जाती है और थकान महसूस होने लगती है और नींद भी बहुत आती है वहीं दूसरी ओर मेडिटेशन करने वाले प्राणी को थकान महसूस नहीं होती क्योंकि उनके अंदर हमेशा ऊर्जा भरा होता है ,और उन्हें नींद और भूख भी कम लगती है क्यूंकि कोशिकाओं को जरूरत ही महसूस नहीं होती भोजन और शयन कि।हमारे वेदों में भी कहां गया है कि हमारा जो हाथ है वो औषधि से युक्त है,हमारी जो स्पर्श शक्ति है वो किसी भी विकार को ठीक करने की क्षमता रखती है।

अब जानते है रेकी के इतिहास के बारे में इसका चलन कहां से शुरू हुआ और किसने किया?

रेकी दरअसल जापान के डॉक्टर मिकाऊ से आया है । जो पेशे से एक चिकित्सक थे,कुछ समय बाद उन्होंने अपने पेशे से संन्यास ले लिया और बुद्धिष्ट मऊंक बन गए,बहुत पहले कि बात है ये,1922 में उन्होंने अपना पहला रेकी क्लिनिक शुरू किया जापान में वो एक ऐसी खोज करना चाहते थे जिससे कि बिना किसी पे आश्रित हुए अपना उपचार स्वं कर सके ,ऐसा भी माना जाता है कि वो भारत आय और उन्होंने वेदों को पढ़ा आयुर्वेद के बारे में जाना तो इस तरीके से उन्होंने बहुत सारे ज्ञान अर्जित किया ,और उसके बाद जापान के माउंट कुउबा पहाड़ पर 21 दिनों का मेडिटेशन और फास्टिंग किया उसके बाद जब वो वहां से नीचे आ रहे थे तब उन्होंने एक बीमार बच्ची के सिर पर हाथ रखकर उसे ठीक कर दिया और उनके पैर से खून निकल रहा था जिसपर उन्होंने अपना हाथ रखा तो खून निकलना बंद हो गया और भी बहुत सारे अविश्वसनीय कार्य उन्होंने किया ।

रेकी के जनक जापान के डॉ मिकाउ । फाइल फोटो ।

अब इसके बाद उन्होंने सोचा कि क्यूं ना इस विद्या को और लोगो तक पहुंचाया जाए,पहले तो वे इस विद्या को मुफ्त में सिखाना चाहते थे लेकिन उन्होंने देखा कि फ़्री में कोई भी इस विद्या का महत्व नहीं दे रहा था ।फिर उन्होंने इसकी एक अच्छी फीस लेनी शुरू कर दी तब जाके लोग इसके प्रति अपनी रुचि लेने लगे ।डॉक्टर मिकाऊ के बाद आए डॉक्टर चिर्जो हायासी,इनके बाद आती मैडम फकाटा,इन्होंने यूएस में अपनी क्लिनिक ओपन कि उनके बाद आए विलियम ली रैंड ये अभी भी जिंदा है जो 90 ईयर्स के है उन्होंने रेकी में एडिशन भी दिया है इनके बाद सी एस हौफ ,और अंत में आए डॉक्टर एन के शर्मा जिनका दिल्ली में रेकी हीलिंग फाउंडेशन है ।और मास्टर शेफाली का शिक्षण एन के शर्मा और दो और शिक्षक के पास हुआ है।डॉक्टर शर्मा इनके गुरु है।

क्या दूर रहकर भी रेकी का लाभ उठा सकते है ? क्या इसके कोई नुकसान भी है ?

उन्होंने कहां कि रेकी एक पॉजिटिव एनर्जी है फिर इससे नुकसान संभव नहीं है एक सकारात्मक ऊर्जा कभी भी नुकसान नहीं पहुंचा सकती इसलिए रेकी एक ऐसा माध्यम है जिसके द्वारा दूर रहकर भी हम इसका लाभ उठा सकते है और फिर जहां एनर्जी कि बात होती है वहां टाइम और स्पेस कि जगह ख़त्म हो जाती है, हम दूर रहकर ही उनकी हर समस्याओं को दूर कर सकते है सिर्फ मेडिटेशन और हीलिंग करवा के ।मिस रश्तोगी का ये कहना था कि अब लोग धीरे धीरे इसको अपनाने लगे है क्यूंकि सभी चाहते है कि बिना डॉक्टर और मेडिसिन के वह हर रोग से मुक्त हो जाए बल्कि आज तो विदेशो में लोगो हॉस्पिटल में वकायादा रेकी करवाते है मरीजों को ठीक करने के लिए चाहे वो कैंसर के मरीज़ हो जिनको दवाईयो कि वजह से बहुत परेशानी होती है उनका इम्यून डाउन हो जाता है इसके लिए उन्हें प्री और पोस्ट ट्रीटमेंट दिया जाता है जिससे कि उनका इम्यून सिस्टम बढ़ जाता है तो दवाओं के साथ रेकी भी काम करता मरीज़ को दोबारा स्वस्थ बनाने में।

क्या हर समस्याओं का समाधान है रेकी?

मास्टर शेफाली का कहना था कि समस्या कोई भी हो उसका समाधान जरूर होता है ,आपकी कोई भी समस्या हो ,आर्थिक ,शारीरिक,पारिवारिक ,इत्यादि इसको हीलिंग के द्वारा ठीक किया जा सकता है ,क्यूंकि हर चीज एनर्जी से रिलेटेड है ,अगर समस्या जो है वो एनर्जी से है तो निवारण भी एनर्जी से ही होगा बस फर्क ऊर्जा का है कि वो पॉजिटिव है या नेगेटिव इसका सबसे बड़ा उदाहरण है कि जब कोई इंसान मर जाता है तो हम कहते है उसका नाम लेके जैसे कि राम चल बसा तो मरने वाला राम नहीं था वो एक बॉडी का एनर्जी था जो राम के रूप में था और जब वो एनर्जी बाहर निकल गई तो कहते है की राम मर गया तो ये सब एक ऊर्जा है जब तक शरीर में है हम जिंदा है और जब बाहर निकाल गया तो मर जाते है बस समझना जरूरी है कि उस एनर्जी का इस्तेमाल कैसे कर सकते है ।इसलिए रेकी से हर समस्याओं का समाधान संभव है।

आपको ये रिपोर्ट कैसी लगी। यदि आपको पसंद आयी तो इसे जरूर शेयर करें। और पढ़ते रहिए मौर्य न्यूज18 । ऐसी ही जानकारी के साथ फिर किसी हस्ती से मिलवाएंगे।

धन्यवाद ।

नई दिल्ली से मौर्य न्यूज18 के लिए बबली सिंह की रिपोर्ट ।

BABLI SINGH
Correspondent, Delhi. Maurya News18 Experience - field of business correspondent

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