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बिहार सरकार के पूर्व शिक्षा मंत्री की कोरोना से मौत, व्यवस्था पर उठ रहे सवाल। Maurya News18

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Maurya News18, Patna

Health Desk

बिहार की राजधानी पटना से कोरोना को लेकर एक बड़ी खबर आ रही है। कोरोना की रफ्तार बेलगाम हो चुकी है। इसकी जद में अब पूर्व शिक्षा मंत्री और जेडीयू विधायक मेवालाल चौधरी भी आ गए हैं। कोरोना के कारण मेवालाल चौधरी की सोमवार को पटना के पारस हॉस्पिटल में मौत हो गई।

बता दें कि मेवालाल चौधरी तारापुर विधान सभा सीट से जेडीयू के विधायक थे। तीन दिन पहले वे कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे। उसके बाद उन्हें पीएमसीएच लाया गया था लेकिन वहां पर जगह न होने की वजह से पारस अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

आपको बता दें कि 2020  में तारापुर सीट से जीतने वाले मेवालाल चौधरी को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कैबिनेट में जगह दी थी। उन्हें शिक्षा मंत्री बनाया गया था। विपक्ष ने दागी नेता को शिक्षा मंत्री बनाए जाने का मुद्दा उठाया था। विपक्ष के हंगामे के कारण मेवालाल चौधरी को शिक्षा मंत्री बनने के चंद घंटों के बाद ही इस्तीफा देना पड़ा था।

बिहार में अभी 44 हजार से अधिक एक्टिव केस


बिहार में कोरोना के मामले बढ़ते जा रहे हैं। रविवार शाम को स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, बीते 24 घंटे में बिहार में कुल 1,00,604 सैंपल की जांच हुई है। इसके साथ ही अबतक कुल 2,77,667 मरीज ठीक हुए हैं। वर्तमान में राज्य में एक्टिव मरीजों की संख्या 44 हजार से अधिक है।

सरकार की व्यवस्था पर उठ रहे सवाल

कोरोना संकट से उबरने को लेकर सरकार की ओर से जो इंतजाम किए गए हैं, उसको लेकर सवाल उठने लगे हैं। ऑक्सीजन का अकाल पड़ा तो सरकार ने फैक्ट्रियों पर पहरा बैठा दिया। मदद के लिए घर-घर ऑक्सीजन का सिलेंडर लेकर दौड़ने वाले मददगारों के हाथ भी बांध दिए गए। सरकारी अस्पतालों में बेड नहीं है और प्राइवेट में ऑक्सीजन नहीं है।

एजेंसियां भी अब प्राइवेट अस्पतालों से ऑक्सीजन रीफिलिंग के खाली सिलेंडर मांग रही हैं। प्रशासन ने बेड की गिनती बढ़ाने के लिए ऐसे हॉस्पिटलों को कोविड केयर सेंटर बना दिया जहां बेड के हिसाब से ऑक्सीजन सिलेंडर तक की व्यवस्था नहीं है।

मजिस्ट्रेट की निगरानी में दिया जा रहा पहरा

पटना में तीन एजेंसियों से ऑक्सीजन की सप्लाई होती है। जब ऑक्सीजन का संकट गहराया तो प्रदेश के सरकारी से लेकर प्राइवेट अस्पतालों में हाहाकार मच गया। पटना के एक-दो नहीं, सभी अस्पतालों में ऑक्सीजन सिलेंडर को लेकर मारामारी मच गई। आज तक व्यवस्था पटरी पर नहीं आई है।

प्रशासन लगातार ऑक्सीजन की आपूर्ति का दावा कर रहा है लेकिन प्राइवेट अस्पतालों में समस्या नहीं सुधर रही है। पटना में स्थिति गंभीर होने के बाद से DM डॉ. चंद्रशेखर सिंह ने तीनों एजेंसियों पर मजिस्ट्रेट तैनात कर दिया है। इसके बाद मजिस्ट्रेट की निगरानी में ही सिलेंडरों की डिलीवरी होने लगी।

इसके बाद समस्या बढ़ गई, अब न तो प्राइवेट हॉस्पिटलों को पर्याप्त सिलेंडर मिल पा रहा है और ना ही घर-घर सिलेंडर पहुंचाने वाले समाजसेवियों के लिए ही इसकी व्यवस्था हो पा रही है।

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