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चलो बुलाबा आया है…राजद-जदयू ने बुलाया है…! Maurya News18

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नयन की नज़र से पॉलिटिक्स

राजद का सवर्ण प्रेम और जदयू का माय प्रेम कहीं दोनों को ले ना डूबे !

नयन, पटना, मौर्य न्यूज18

बिहार में विधान सभा का चुनाव मुंहाने पर है। और सत्ताधारी जदयू और विपक्ष राजद दोनों में एक होड़ सी मची है। कौन किसकी तरफ कितना विधायक खींच लाता है। कौन किस पार्टी के नेता को फोड़ कर लाता है यही चल रहा है। यानि कह सकते हैं इन दिनों बिहार पॉलिटिक्स में यही राग अलापा जा रहा है कि चलो बुलावा आया है…राजद-जदयू ने बुलाया है।

पिछले 15 दिनों का सीन देखें तो जदयू और राजद के बीच तोड़-फोड़ की गणित सबके सामने है।

अब तक राजद के पाले में जदयू के मंत्री श्याम रजक आए हैं।

जबकि जदयू में राजद के छह विधायक…

विधायक चंद्रिका राय, फराज फातमी, जयबर्धन यादव, डॉ अशोक कुमार कुशवाहा, प्रेमा चौधरी और महेश्वर यादव।

और महागठबंधन छोड़ कर जदयू के पाले में आने को बेताब हम के सुप्रीमो जीतनराम मांझी भी कतार में हैं। ये है वर्तमान पॉलिटकिक्स। ये सब जदयू सुप्रीमों नीतीश कुमार चुनाव करीब आने के टाइम में करते रहते हैं।

खैर, यहां हो क्या रहा है। इसे समझना भी जरूरी है। क्या यही तोड़-फोड़ के साथ ये दोनों पार्टियां पब्लिक के बीच जाएगी। या इन्हीं तोड़-फोड़ की नीति के दम पर दोनों पार्टियां आने वाले चुनाव में खुद को सत्ता का मजबूत दावेदार समझ रही है। तो, ऐसा नहीं है। यहां इसी समीकरण को लेकर हम आपको बताने आएं हैं कि ये दोनों पार्टियां कितनी भ्रम में अपना समीकरण तैयार कर रही है।

अब तक जो हो रहा है या हुआ है पहले उसपर गौर करें।

राजद क्या कर रही है…इस बार के चुनाव में इसे समझिए।

अबतक “भूरा वाल साफ करो” वाली छवि के लिए बदनाम राजद अब अपने माथे से इस कलंक को साफ करना चाहती है। जाहिर है … सवर्ण प्रेम जाग उठा है राजद का। औऱ दूसरी तरफ जदयू क्या कर रही है …राजद के माय समीकरण में सेंध मार रही है। यानि मुस्लिम-यादव में सेंध। अगर आप इन दोनों जाति-प्रजाति के हैं और राजद से जदयू में जाने का मन बना रहे हैं तो आपको जदयू इस तरह बुलाएगी…कहेगी।

आओ तुम यादव हो…तो आओ …तुम मुस्लिम हो तो आओ.. मेरे पास आओ …मेरे करीब आओ…मैं तुम्हें मुंह मांगा दूंगा…राजद में क्या रखा आ है…आ जाओ..मेरे पास आओ…। इसके लिए जदयू सुप्रीमो नीतीश कुमार अपनी पार्टी के सुरमाभोपालियों को मार्केट मे छोड़ भी रखा है। यानि कुल मिलाकर… चुनाव है सो, कोरोना में भी माय समीकरण को गले लगाने को बेताब है जदयू । जदयू को लगता है ऐसा करके हम राजद को पटखनी दे देंगे।

लेकिन मैं आपको बताता हूं कि राजद और जदयू दोनों भ्रम में हैं। ना तो राजद सवर्ण प्रेम से मजबूत हो सकता ना ही जदयू माय समीकरण से।

आप सवाल करेंगे । आखिर ऐसा क्यों। तो साफ है। यादव जाति कभी भी, किसी भी परिस्थिति में लालू यादव को छोड़ नहीं सकते…चाहे जदयू लाख यादव विधायक या मुस्लिम विधायक अपनी ओर खींच ले।

ठीक उसी तरह राजद लाख सवर्ण को लॉली पॉप दिखा ले। गले लगा ले। पुचाकारे। मिन्नत आरजू करे अपने पाले में ले आये । सवर्ण भाजपा को छोड़ नहीं सकते।

ऐसी स्थिति में राजद औऱ जदयू यदि इसी कुस्ती में लगी रही तो दोनों की नैया डूबने से कोई बचा नहीं सकता।

अब तक जो हुआ है उसमें आप देख सकते हैं…वही घिसापिटा लीडर …कभी राजद में जा रहा तो कभी जदयू में जा रहा। आखिर भाजपा में कोई क्यों नहीं जा रहा। आखिर लोजपा में कोई क्यों नहीं जा रहा। जबकि दोनों एनडीए का हिस्सा है।

महागठबंधन में भी कांग्रेस है। रालोसपा है। सहनी की पार्टी है। तो आखिर इन पार्ट्रियों में कोई विधायक क्यों नहीं जा रहा। साफ है बिहार की राजनीति में राजद और जदयू दोनों खुद को अपना सबसे बड़ा प्रतिद्वंदी मानती है।


यादव जाति के प्रति प्रेम का एक नमूना जाप के सुप्रीमो पप्पू यादव ने दिखाया तो आपको पता है…कि लोकसभा चुनाव में पप्पू यादव का क्या हश्र हुआ। ये सबने देखा। खुद भी साफ हो गए। उनकी पत्नी रंजीता रंजन भी नहीं जीत पाई। यानि पक्का है कि यादव लालू प्रसाद को छोड़ ही नहीं सकते इसके लिए कोई कुछ भी कर ले।

 

भाजपा भी कोशिश कर चुकी है। भूपेन्द्र नारायण यादव को बिहार का प्रभारी बना रखा है । सांसद नित्यानंद राय को बिहार भाजपा का अध्यक्ष बनाया…अब केन्द्र में गृह राज्यमंत्री भी है। लेकिन आप सुदूर गांव में यादवों के बीच जाएं तो बिहार में लालू यादव की ही बात करते दिखेंगे। हां, केन्द्र की सरकार चुनने में इनका झुकाव पीएम नरेन्द्र मोदी की ओर जरूर देखा गया लेकिन जदयू की ओऱ तो कतई नहीं।

 जदयू चाहे जितना बड़ा यादव लीडर ले आए। यादव जाति अब तक ये नहीं भूलें हैं कि जदयू नेता नीतीश कुमार किस तरह से राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद को छोड़कर भाजपा को गले लगा लिये। इसे यादव कॉम्युनिटी धोखा के रूप में देख रही है। जिसका खामियाजा जदयू से सटने वाले विधायकों को भी करेंट की तरह झटका दे सकता है।

वैसे, जदयू को अपने यादव नेताओं पर गुमान है कि उनके पास मंत्री विजेन्द्र यादव, मंत्री नरेन्द्र नारायण यादव हैं लेकिन ये लोग अपनी विधानसभा सीट जीतने के अलावे आगे कुछ नहीं कर सकते।

अब जरा राजद का सवर्ण प्रेम पर भी गौर करिए तो इस चक्कर में राजद दिग्गज सवर्ण लीडर रघुवंश प्रसाद सिंह को अघोषित रूप से खो चुकी है।  

लेकिन प्रेम तो अंधा होता है…सो, प्रेम जारी है। शुरूआत दिग्गज नेता जगदानंद सिंह से हुई। बिहार राजद का प्रदेश अध्यक्ष बनाया। फिर आगे अमरेन्द्र धारी सिंह को राज्य सभा भेजा। अहमद अफाक करीम को भी राज्य सभा भेजा। प्रो. मनोज झा को दिल्ली में राष्ट्रीय प्रवक्ता के रूप में पेश किया औऱ राज्यसभा भी भेजा। सबके सब सवर्ण हैं। धनपशु हैं । धनपशु की बात कहें तो इनके पास एक और महान धनपशु प्रेम गुप्ता भी हैं जो दौलत के बल पर राज्यसभा में हैं। ये अलग बात है कि ये वैश्य समाज से आते है।

खैर, हम बात राजद के सवर्ण प्रेम की कर रहे हैं तो फिर उसी बिंदू पर आते हैं।

आप देख सकते हैं कि आए दिन राजद के कर्ताधर्ता नेता तेजस्वी यादव ये कहते नहीं थकते कि अब सवर्ण भी हमारे हैं। उनके साथ मैं हूं। हमारी पार्टी है। पुरानी कोई नाराजगी है तो छोड़िए । आइए गले मिलिए। काफी कोशिश में लगे हैं। अपनी पार्टी के साथ-साथ कांग्रेस में भी जब राज्यसभा उम्मीदवार भेजने की बात हुई तो कभी राजद में रहे अब कांग्रेस के अखिलेश प्रसाद सिंह को राज्यसभा भेजने में भरपूर साथ दिया। सबको पता है कि राजद सुप्रीमो की कृपा से ही अखिलेश सिंह राज्यसभा तक पहुंच पाए।

कुल मिलाकर देखें तो राजद से पांच सदस्य राज्यसभा में है, इसमें तीन सवर्ण हैं। यादव से एक हैं तो वो राजद सुप्रीमो की बेटी मीसा भारती ही है। यानि राज्यसभा भेजने के लिए पूरे बिहार में कोई औऱ यादव लीडर नहीं मिला। वहीं अगर सवर्ण से किसी को ही भेजना था तो राजद के दिग्गज नेता रघुवंश प्रसाद सिंह भी थे लेकिन उनको पूछा नहीं गया।

कुल मिलाकर जदयू और राजद जिस ट्रेंड को पकड़ के चल रही है उसमें दोनों की नैया डूबने जैसी ही दिखती है। ये साफ दिखता है कि दोनों के पास कोई अपना लीडर नहीं है, जिसके दम पर चुनाव मैदान में उतरा जाए। एक दूसरे की तोड़-फोड़ की राजनीति का कब और कहां अंत होगा कहना मुश्किल है। लेकिन इतना तो साफ है कि जदयू खेमे में दिखाने के दांत जरूर पहुंच रहे हैं। राजद भी क्या उसी राह पर चलती रहेगी।

देखते रहिए और पढ़ते रहिए नयन की नज़र से प़ॉलिटिक्स।

Nayan Kumarhttp://www.mauryanews18.com%20
MANAGING EDITOR MAURYA X NEWS18 PVT LTD . #March 2019 to till now ------- #20yrs Experience field of Journalism, #Mass Com - Print Media & Electronic Media #Former Sr. Subeditor, Dainik Jagaran, India's No-1 Hindi Daily News Paper, Patna, Bihar, 12 April 2000 -March2008 #Former Channel Co-Ordinator, Maurya Tv, Patna, Bihar/Jharkhand, April 2008 - March 2013 Channel Co-Ordinator, Zee Bihar/Jharkhand news from march 2013- march2014 #Editor, Ommtimes.com news portal, Patna, Bihar, April 2014 - AuG2018 #Former Editor, Maurya News, news Portal, Sept.2018-Feb2019

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