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चिराग पासवान क्यों चिल्लाते हैं…243 सीट पर लड़ूंगा, जानिए अंदरखाने का एक सच ! Maurya News18

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नयन की नज़र से पॉलिटिक्स :

 ये रामविलास-पारस की नहीं चिराग की लोजपा है…!

लोजपा में दौलत लाओ, टिकट पाओ का खेल शुरू

नयन, पटना, मौर्य न्यूज18 ।

लोक जनशक्ति पार्टी। अब रामविलास-पारस वाली नहीं। चिराग पासवान वाली पार्टी हो गई है। सो, सब स्वरूप बदला-बदला सा है। पार्टी दलित के नाम पर दौलत बनाती है। चुनाव लड़ती है। जीतती है और फिर दौलत बनाती है। ये कोई नई कहानी नहीं है पहले भी होता रहा है। पार्टी चुनाव लड़ने के लिए तरह-तरह से नोट इक्ट्ठा करती रही है। ये कहने की बात नहीं। सभी पार्टियां वसूली करती है। इसलिए इसमें कोई बुराई भी नहीं लेकिन अब यहां थोड़ा तौर-तरीका बदला-बदला सा है। दलित-गरीब-गुरबो के नाम पर चुनाव मैदान में कुदने वाली लोजपा किस तरह अपनी पार्टी के लिए नोट इक्ट्ठा करती है।

अंदरखाने के सच को जानेंगे तो आपकी रूह कांप जाएगी। आपको लगेगा कि सिर्फ दलित होने से नहीं दौलत होने से ही यहां बात बनेगी।

ऐसा भी नहीं है कि ये सब कोई चोरी-चुपके हो रहा। खुलेआम फरमान जारी कर तमाम कार्यकर्ताओं को दौलत लाओ, टिकट पाओ का ऑफर दिया हुआ है। नियम कानून भी बना हुआ है। कुछ बिना नियम कानून का भी हो रहा। इसलिए यहां कोई भ्रम नहीं है, सब क्लियर है। टिकट पाने के लिए करना क्या होगा। उम्मीदवारी के लिए करना क्या होगा। कौन हो सकता है उम्मीदवार। ये सब हम बताएंगे। और ये भी बताएंगे कि आखिर बिहार चुनाव में सभी 243 सीटों पर चुनाव लड़ने की बात क्यों कहते रहते हैं…लोजपा सुप्रीमो चिराग पासवान।

चलिए हम बतातें हैं…

लोक जनशक्ति पार्टी में अगर आप सदस्य बनेंगे। तो इसके लिए मात्र दस रूपये की रसीद कटानी होती है। दस रूपये देंगे तो आप लोजपा के प्राथमिक सदस्य बन जाएंगे। पहले इसके मात्र 5 रूपये देने होते थे।

फिर होता ता सक्रिय सदस्य 25 व्यक्ति को सदस्य बनाने पर आप पार्टी के सक्रिय सदस्य बन जाते थे। ऐसा ही लगभग सभी पार्टियों में है। लेकिन अब चिराग काल में लोजपा का सक्रिय सदस्य बनने-बनाने की प्रक्रिया लगभग नहीं के बराबर है, है भी तो सिर्फ कागजी ही है।

अब थोड़ा आगे बढ़िए तो पार्टी ने पूरे खुले तौर पर घोषित किया हुआ है कि विधानसभा चुनाव में उन्हीं को टिकट दिया जाएगा

जो 25 हजार सदस्य बनाएंगे यानि – 2 लाख 50 हजार रूपये ।

हरे बूथ के लिए कमेटी बनाकर देना

स्थानीय स्तर पर यानि लोकल मेनूफेस्टो तैयार करके देना।

बूथ स्तर पर समस्याओं के बारे में जानकारी देना।

ऐसी प्रक्रिया से जो गुजरेगा उसी का नाम उम्मीदवारी के लिए स्टेट कमेटी को भेजी जाएगी।

इस प्रक्रिया के बारे में हमने बिहार लोजपा के प्रदेश प्रवक्ता अशरफ अंसारी से भी बात की तो उन्होंने भी यही जानकारी दी।

खैर, अब आगे हम आपको जो हम बताने जा रहे हैं। उसे काफी ध्यान से समझिएगा । लोजपा ये सब करके किस तरह से पार्टी के लिए दौलत इक्ट्ठा कर रही है।

जो भी लोजपा कार्यकर्ता विधानसभा चुनाव लड़ना चाहता है उससे 2.50 लाख रूपये औऱ 10 हजार रूपये लेकर 25 हजार पार्टी सदस्यता रसीद दे दिए गए। एडवांस रूपये जमा करने पर ही सदस्यता रसीद दिए जाते हैं।

अब आप समझिए एक-एक विधानसभा से दस-दस उम्मीदवार चुनाव लड़ने को बेताब हैं। सो, ऐसी चाह रखने वालों के लिए लोजपा का काउंटर खुला हुआ है। 2.50 लाख जमा कर दीजिए।

अब जरा हिसाब करिए एक विधानसभा के लिए यदि दस-दस कार्यकर्ता उम्मीदवारी पेश कर रहे हैं तो कम से कम एक विधानसभा से 25 लाख रूपये पार्टी फंड में जमा हो गया। यदि इसी हिसाब को पकड़कर चलें तो बिहार में 243 विधानसभा सीट हैं…इस हिसाब से 243 गुना 25 लाख करिए तो बनता है 60 करोड़ 75 लाख होते हैं।

यदि एक विधानसभा से पांच-पांच कार्यकर्ता भी उम्मीदवारी ठोकते हैं तो पार्टी फंड में नोट आएंगे लगभग 30 करोड़ रूपये। ये तो शुरूआती बात हुई। जो वसूली जारी है। जानकारी के लिए बता दूं कि इसके लिए अबतक 150 से ज्यादा कार्यकर्ता उम्मीदवारी  के लिए 2.50 लाख की रकम दे चुके हैं। ऐसे देने वालों की कतार काफी लंबी है।

आपको बता दें कि लोजपा सुप्रीमो चिराग पासवान इसलिए हर रोज चिल्ला-चिल्ला के कह रहे हैं कि लोजपा सभी विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ेगी…ताकि हर विधानसभा से टिकट के दावेदार अधिक से अधिक आ जाएं। ऐसा हो भी रहा है। इसलिए वो पार्टी फंड को मोटा करने के स्कीम में कामयाब भी हो रहे हैं।

इस फंड को अब तक जिन कार्यकर्ताओं ने जमा करा दिया है अब उनसे फिर 2-2 लाख जमा करने को कहा जा रहा है। कहा जा रहा है कि विज्ञापन के लिए इस फंड को हर हाल में जमा करना ही होगा। ये फंड अलग से देना है, जो पार्टी नियम कानून से विल्कुल अलग। अब ये दो-दो लाख यदि हर एक विधान सभा से दस-दस उम्मीदवार भी देते हैं तो 20 लाख प्रति विधानसभा क्षेत्र से वसूली हो जाएगी। कुल मिलाकर इससे भी करोड़ों रूपये बनेंगे।

विश्वसनीय सूत्र बताते हैं कि लोजपा सुप्रीमो का टारगेट है कि चुनाव आने से पहले ही उम्मीदवारी के नाम पर 100 करोड़ से ज्यादा की वसूली कर ली जाए।

बात यहीं तक सीमित नहीं है… पार्टी के प्रधानमहासचिव शहनवाज अहमद कैफी से मिली जानकारी के अनुसार, जो भी कार्यकर्ता बताए गये फंड की राशि जमा करेंगे उन्हीं का नाम पार्टी की स्तरीय बोर्ड की कमेटी में रखी जाएगी। फिर केन्द्रीय कमेटी बोर्ड में संभावित उम्मीदवारों की सूची जाएगी।

बताया जाता है कि केन्द्रीय कमेटी में जिन उम्मीदवारों की सूची जाएगी उनमें से प्रत्येक को 25-25 लाख रूपये जमा करने होंगे। ये है लोजपा का पार्टी में फंड इक्ट्ठा करो अभियान। लेकिन श्री कैफी इस बात से मुकर गए।

इस संबंध में कई जिला के कार्यकर्ताओं से हमने बातचीत भी की। तो बिना नाम लिए बताते हैं कि पार्टी के अंदर कार्यकर्ता काफी त्रस्त हैं। हर बात के लिए रकम मांगी जा रही है। कदम कदम पर रूपये की बात हो रही है। आखिर कोई गरीब-गुरबा कार्यकर्ता इतनी बड़ी रकम कहां से जमा करेगा। फिर कहां से चुनाव लड़ेगा।

वैसे भी नोट लाओ, टिकट पाओ के लिए लोजपा शुरू से बदनाम रही है। आये दिन ऐसे आरोप लगते रहे हैं। और पार्टी के शीर्ष नेता खंडन भी करते रहे हैं। लेकिन पार्टी के अंदर वर्तमान में जो सीन है वो तो कुछ ऐसा ही है।

जिन कार्यकर्ताओं ने उम्मीदवारी के नाम पर फंड दिया है वो नाम ना छापने की शर्त पर कहते हैं कि  टिकट ना मिलने पर ये रकम भी तो डूब ही जाएगा। इसलिए अभी से सबके सब कार्यकर्ता हताश हैं। कहते हैं यहां सिर्फ और सिर्फ दौलत वालों की ही चल रही है। उसी की पूछ है।

कहने वाले ये भी कह रहे हैं कि पहले जब रामविलास पासवान औऱ पशुपति पारस के हांथों में पार्टी की कमान थी तो दलित उम्मीदवारों को काफी सहुलियत दी जाती थी।

सदस्यता की रकम भी काफी कम थी। अभी जिस बात के लिए पार्टी 10 हजार लेती है। पहले ये रकम दलित उम्मीदवारों के लिए मात्र 2.50 हजार रूपये ही थी। लेकिन अब सबके लिए एक समान रकम है। किसी को कोई छूट नहीं।

कार्यकर्ताओं के अंदर निराशा और रोष का भाव इतना है कि दबी जुबान से कहते हैं कि लोजपा नेता बात दलित की करते हैं। दलित उत्थान की करते हैं । दलितों के आरक्षण की करते है। दलित के नाम पर राजनीति करते हैं। गठबंधन में टिकट पाते हैं । जीतते हैं। सरकार बनाते हैं। लेकिन सच्चाई ऐसी है कि जानेंगे तो रोंगटे खड़े हो जाएंगे।

लोजपा नेता रामविलास पासवान के साथ पार्टी के सिनियर लीडर पशुपति कुमार पारस और लोजपा सुप्रीमो चिराग पासवान । फाइल फोटो।

पार्टी स्तर पर आंदोलन करो। लाठी खाओ । डंडा खाओ। खुद पैसा खर्च करो। गरीब-गुरबा जनता से वसूली करो। औऱ चुनाव के टाइम पर लाखों रूपये पार्टी फंड में जमा करो का नियम बन जाता है। ये सब क्या है। कैसे चलेगा। इससे बड़ा दलित उत्पीड़न, कार्यकर्ता उत्पीड़न क्या हो सकता है।

अब तो कोई सुनने वाला भी नहीं। पार्टी में रामविलास पासवान जब तक थे तो नेता के तौर पर सीधे कार्यकर्ताओं से जुड़े रहते थे । तब तक पार्टी के अंदर नियम चाहे जैसा भी हो, वो सबकी सुनते थे। परिस्थिति के अनुसार सबको सहुलियत देते थे। दलित उम्मदवारों को काफी सुविधा दी जाती थी। लेकिन अब सब कुछ दौलतमंदों के कब्जे में हैं। पशुपति कुमार पारस को भी पार्टी पर कब्जा करने वालों ने लगभग हांसिए पर ही ला दिया है। ऐसे में लोजपा सुप्रीमो चिराग पासवान आखिर किस दवाब में ये सब कर रहे हैं समझ में नहीं आ रहा। आखिर कौन है जो चिराग पासवान को ये सब करने को कह रहा है। कैसी मजबूरी है।

नाम ना छापने की शर्त पर पार्टी के नेता कहते हैं कि आपको क्या बताउं 2000 में रामविलास पासवान जी ने लोजपा का गठन किया औऱ अब 2020 आ चुका है। बिहार की जनता ने लोजपा को कई जनप्रतिनिधि दिए। काफी भरोसे के साथ पार्टी के साथ जनता खड़ी रही। पार्टी के शीर्ष नेता बिहार की जनता को काफी महत्व देते रहे लेकिन अब इसमें कमी दिखती है। इस पर लोजपा सुप्रीमो चिराग पासवान को गौर करना होगा। ध्यान देना होगा। ऐसी अंदर खाने से मांग उठ रही है। पार्टी प्रदेश महासचिव शहनवाज अहमद कैफी इन सबबातों से इनकार करते हैं ।

आप पढ़ रहे हैं मौर्य न्यूज18 । पॉलिटिकल खबरों के लिए बने रहिए मौर्य न्यूज18 के साथ ।

पटना से मौर्य न्यूज18 के लिए नयन की रिपोर्ट।

Nayan Kumarhttp://www.mauryanews18.com%20
MANAGING EDITOR MAURYA X NEWS18 PVT LTD . #March 2019 to till now ------- #20yrs Experience field of Journalism, #Mass Com - Print Media & Electronic Media #Former Sr. Subeditor, Dainik Jagaran, India's No-1 Hindi Daily News Paper, Patna, Bihar, 12 April 2000 -March2008 #Former Channel Co-Ordinator, Maurya Tv, Patna, Bihar/Jharkhand, April 2008 - March 2013 Channel Co-Ordinator, Zee Bihar/Jharkhand news from march 2013- march2014 #Editor, Ommtimes.com news portal, Patna, Bihar, April 2014 - AuG2018 #Former Editor, Maurya News, news Portal, Sept.2018-Feb2019

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