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एक चौकाने वाली खोज – छत्तीसगढ़ के एलियंस ! Maurya News18

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सबूत पूरी दुनिया को आश्रचर्य में डाल रखा है

GUEST REPORT

डॉ ध्रुव गुप्त की कलम से

प्रचीन काल में एलियंस

वैसे तो प्राचीन काल में एलियंस के धरती पर आने के सबूत दुनिया भर के शैलचित्रों, मूर्तियों और अबूझ ज्यामितिक संरचनाओं में मिलते हैं, लेकिन अपने देश में भी इस तथ्य के ऐसे प्रमाण मिले हैं जिसने पूरी दुनिया को आश्चर्य में डाल दिया है। कुछ अरसे पूर्व भारतीय पुरातत्ववेत्ताओं द्वारा छत्तीसगढ़ के चारामा क्षेत्र की गुफाओं में खोज के दौरान  प्रागैतिहासिक काल के कुछ शैलचित्र मिले जिनकी उम्र दस हजार वर्षों से भी ज्यादा है। प्राकृतिक रंगों से बने इन सभी चित्रों में स्पष्ट रूप से उड़नतश्तरी दिखाई दे रही है।

एक चित्र में उड़न तश्तरी से निकल रहा एलियन भी नज़र आता है जिसने अपने सिर पर एंटीना लगे हेलमेट जैसा कुछ पहन रखा है। भारतीय और नासा के वैज्ञानिक इन चित्रों का अध्ययन कर रहे हैं। इसे प्राचीन भारत में एलियंस की मौजूदगी के एक और प्रमाण के तौर पर देखा जा रहा है।वैज्ञानिक यह मानते हैं कि दस हज़ार साल पहले की दुनिया में ऐसे उन्नत उपकरणों और मनुष्यों की कल्पना मुश्किल है। 

एक प्रमाण 2008-09 में मिला था

छत्तीसगढ़ में में एलियंस की उपस्थिति का एक और प्रमाण तब मिला जब 2008-09 में पुरातत्ववेत्ता डॉ अरुण शर्मा के नेतृत्व में सिरपुर में उत्खनन का कार्य हुआ। इस उत्खनन में एक भूकंपरोधी सुरंग के अलावा ढाई हजार वर्ष पुराने पकी मिट्टी के बने पुतले मिले। ये पुतले पाश्चात्य देशों में मिले विचित्र चेहरों और मास्क पहने एलियंस की कुछ विख्यात मूर्तियों के समान हैं। कुछ पाश्चात्य वैज्ञानिको ने सिरपुर का दौरा किया तो वे पाश्चात्य और एवं सिरपुर की मूर्तियों में समानता देखकर आश्चर्य में पड़ गए। उनका मानना था कि एलियन को देखे बगैर ऐसी समानता नहीं आ सकती। 

प्रमाणों से बल मिला

प्रमाणों से इस धारणा को बल मिला है कि दुनिया के कई-कई हिस्सों की तरह छत्तीसगढ़ के इन इलाकों में भी एलियंस आए थे जो तकनीकी मामले में हमसे कम से कम दस हजार साल आगे थे। आश्चर्य यह भी है कि इस इलाके में सदियों से मान्यता चली आ रही है कि ‘रोहेला’ अर्थात छोटे कद के लोग गोल उड़नतश्तरी में बैठकर यहां आते थे और गांव से कुछ लोगों को उठाकर ले जाते थे। जिन लोगों को रोहेला ले गए, वे फिर कभी वापस नहीं लौटे। 

देखकर ये ख्याल आता है ….

धरती पर प्राचीन एलियंस के ऐसे प्रमाणों को देख यह ख्याल आता है कि पुराणों और प्राचीन कहानियों में वर्णित आकाश मार्ग से विमानों से उतरने वाले शक्तिशाली और दिव्य गुणों से लैस लोग एलियंस ही तो नहीं थे जिनकी असाधारण शक्तियों से प्रभावित होकर प्राचीन लोग उनके आगे नतमस्तक हुए और उन्हें देवता या देवदूत का नाम दिया ?

GUEST REPORT

आपने रिपोर्ट लिखी है

डॉ ध्रुव गुप्त

आप आईपीएस हैं। आप बिहार से हैं। आप जाने-माने रचनाकार, लेखक, साहित्यकार हैं। आपकी लेखनी से देश और समाज को नई दिशा मिलती रहती है। आपकी लेखनी देश-दुनिया की प्रतिष्ठत पत्र-पत्रिकाओं में आये दिन प्रकाशित होती रहती है ।

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आभार।



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