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कांग्रेसगिरी : इस बार चिरंजीवी होंगे किनारे ! Maurya News18

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पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की जयंती समारोह के बाहाने कांग्रेस के अंदर खाने और क्या हुआ, जानिए इस रिपोर्ट में

SPECIAL REPORT BY

प्रीतकिरन सिंह, नई दिल्ली। मौर्य न्यूज18 ।

आहिस्ता-आहिस्ता फिर से बजने लगी राहुल डफली

दो दिन पहले पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की 75वीं जयंती के उपलक्ष्य में कांग्रेस पार्टी ने एक शानदार कार्यक्रम का आयोजन किया. इस कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिये देशभर के नेताओं, यूथ कांग्रेस के कार्यकताओं और केंद्रीय नेतृत्व को आमंत्रित किया गया. राजधानी दिल्ली के केडी जाधव इंडोर स्टेडियम में देर शाम तक समारोह चला.

कार्यक्रम इतना रोमांचक रहा की प्रस्तुति की समाप्ति पर प्रस्तुतकर्ताओं के सम्मान में पहली पंक्ति के नेताओं ने खड़े होकर तालियाँ बजाई. कुछ संस्कृतिक कार्यक्रमों के बीच-बीच पार्टी के कुछ युवा नेताओं तरुण गोगोई, मीनाक्षी नटराजन, राजा बरार संग कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने राजीव गांधी की याद करते हुए अपनी बात रखी. बॉलीवुड अभिनेत्री स्वरा भास्कर ने मंच सम्भाला.जिसने कार्यकर्ताओं के बीच स्वरा के कांग्रेस में शामिल होने या जेएनयू में होने वाले छात्रसंघ के चुनाव के लिये उनके प्रचार करने की एक उम्मीद जगा दी. वहीं प्रस्तुति प्रोफेसनल कलाकारों ने दी. 

कुछ कार्यकर्ताओं को समारोह में अजीब सा माहौल लगा !

विडम्बना ये है कि इतना सब करने के बाद भी कुछ कार्यकर्ताओं को समारोह दिलचस्प नहीं लगा. कुछ का मानना था कि वरिष्ठ नेताओं को बोलने का मौका ही नहीं दिया गया. कुछ ने कहा पार्टी अब केवल एक नेता के हित से ऊपर उठकर संगठन के लिये सोच रही है. इसीलिये पूर्व वित्त और गृहमंत्री पी चिदंबरम की मुश्किलें लगातार बढ़ने, उन्हें आईएनएक्स मीडिया घोटाले मामले में 4 दिनों तक सीबीआई की पूछताछ के बीच भी इसतरह कर कार्यक्रम का आयोजन किया जा सका.ये अलग बात है की चिदंबरम पर सीबीआई का शिकंजा कसने से पहले इस कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार की जा चूंकि थी. हालांकि चिदंबरम की गिरफ्तारी का पूरे कांग्रेस नेतृत्व ने भरपूर विरोध किया.

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सोनिया बोलीं-जो राजीव कर गए वो कोई नहीं कर सकता!

राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने कहा है कि सरकार विपक्ष को निशाना बना रही है. कार्यक्रम में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने भी कहा,’1984 में राजीव गांधी विशाल बहुमत से जीतकर आए थे लेकिन उन्होंने उस जीत का इस्तेमाल भय का माहौल बनाने और डराने या धमकाने के लिए नहीं किया, ‘ये आज कोई नहीं कर सकता है जैसा राजीव जी ने किया, राहुल (अध्यक्ष पद से इस्तीफा देकर) ने किया.’ सोनिया की ये टिप्पणी जरूर पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम की गिरफ्तारी की पृष्ठभूमि में आई.

एक दिलचस्प वाक्या !

एक दिलचस्प बात ये रही कि बीते 10 अगस्त को सीडब्ल्यूसी में वो चिदंबरम ही थे जिन्होंने लगभग 12 घंटों तक चली बैठक में अलग-अलग नामों पर विचार, कश्मकश के बाद, सोनिया गांधी को पार्टी का अंतरिम अध्यक्ष बनाये जाने का प्रस्ताव दिया. जिस पर प्रियंका गांधी वाड्रा ने जरूर आपत्ति जताई. लेकिन उन्होंने कहा कि अगर सोनिया गांधी तैयार होती हैं तो कोई भी इस मामले में कुछ नहीं कह सकता. लेकिन सोनिया गांधी के अंतरिम अध्यक्ष बनने के बाद भी एक नाम ऐसा रहा जिसने 22 अगस्त के उस समारोह में राहुल गांधी को कांग्रेस का अध्यक्ष बनाने के नाम पर खूब तालियां बटोरी. खुद कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी को तालियां बजाते देखा गया. 

यूथ कांग्रेस बोली – राहुल फिर से

यूथ कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और पंजाब से विधायक राजा बरार ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की 75वीं जयंती समारोह में राहुल को अध्यक्ष बनाने की मांग की. उन्होंने मंच से कहा कि राहुल गांधी की हमें जरूरत है. वो हमारा नेतृत्व करें. बरार जब मंच से बोल रहे थे तो राहुल भी उनकी ओर देखते रहे और इस दौरान हॉल में राहुल गांधी के लिए नारे लगे.  क्या ये स्पष्ट संकेत है कि राहुल गांधी अपने को एक फिर अध्यक्ष बनने के लिये तैयार कर रहें है और पार्टी नेताओं के प्रति उनकी नाराज़गी ख़त्म हो गई है. दरअसल यूथ कांग्रेस के इस कार्यक्रम का मक़सद बुजुर्ग नेताओं को साइडलाइन कर युवा नेतृत्व को पार्टी की कमान देना ही दिखा.जिस तरह से सोनिया गांधी के अध्यक्ष बनने के बाद

ये चिरंजीवी नेता एक बार फिर युवा खेप को किनारे कर अपनी कमर कसने लगे थे.पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, अशोक गहलोत, कमलनाथ,अहमद पटेल, गुलाम नबी आजाद, जयराम रमेश, आनन्द शर्मा, अम्बिका सोनी जैसे वरिष्ठ नेताओं के समक्ष तरुण गोगोई, मीनाक्षी नटराजन, राजा बरार जैसे युवाओं का मंच पर भाषण बहुत कुछ कहता है. क्या सोनिया गांधी का ये स्पष्ट संकेत है कि अब कांग्रेस राहुल के अंदाज़ में ही चलेगी.

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चलते-चलते एकबात और –

कांग्रेसियों को अंदाज-ए-राहुल ही चलना होगा !

अब यदि सोनिया गांधी ही इसी मूड में हैं कि सबकुछ राहुल के अंदाज में हो तो भला इससे किसी को इनकार रहा ही कब। तब ये सवाल उठता है कि जब ऐसा ही कांग्रेसियों को करना था तो फिर ये अध्यक्ष पद छोड़ा-छोड़ी का खेल आखिर हुआ ही क्यों ? किसे जताने के लिए किया। कोई आपसे अध्यक्ष पद छोड़ने को तो नहीं कह रहा था , फिर पद छोड़ने वाली जिद क्यों छेड़ रखी थी आपने । क्या अब पद छूटने के बाद दिमाग में फिर से कोई भूचाल आया है ? क्या राहुल को अपने निर्णय पर पछतावा हो रहा है। शायद इस पर राहुल ने अपनी मां सोनिया गांधी से ठंडे दिमाग से बात की हो। तभी तो फिर से अध्यक्ष पद के लिए नई स्किप्ट सोनिया गांधी खुद लिख रहीं हैं। अबकी बार इस स्किप्ट पर कैसी कांग्रेस तैयार होती है देखना दिलचस्प होगा। लेकिन समारोह में सबके रवैये से इतना तो तय हो चला है कि कांग्रेसी को अंदाज-ए-राहुल ही चलना होगा।

मौर्य न्यूज18 के लिए नई दिल्ली से प्रीति किरन सिंह की रिपोर्ट

 

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