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चीन युद्ध के बाद अगर नेहरू लंबी जिंदगी जीते तो तभी बदल जाती भारत की विदेश नीति -सुरेंद्र किशोर

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GUEST REPORT

वरिष्ठ पत्रकार सुरेन्द्र किशोर की कलम से

नेहरू समय-समय पर अपनी गलतियों को सार्वजनिक स्वीकारते भी रहे !

चीन और सोवियत संघ से झटके खाने के बाद यदि प्रधान मंत्री जवाहर लाल नेहरू कुछ अधिक दिनों तक जीवित रहते तो वे संभवतः भारत की विदेश नीति को पूरी तरह बदल देते।  उसका असर घरेलू नीतियों पर भी पड़ सकता था। चीन के हाथों भारत की शर्मनाक पराजय के दिनों के कुछ दस्तावेजों से यह साफ है कि नेहरू के साथ न सिर्फ चीन ने धोखा किया बल्कि सोवियत संघ ने भी मित्रवत व्यवहार नहीं किया। याद रहे कि जवाहर लाल नेहरू उन थोड़े से उदार नेताओं में शामिल थे जो समय -समय पर अपनी गलतियों को सार्वजनिक रूप से स्वीकार करते रहे। कांग्रेस पार्टी के भीतर भी कई बार वे अपने सहकर्मियों की राय के सामने झुके।

चीन औऱ सोवियत संघ पर भरोसा किया पर धोखा मिला

नेहरू ने समाजवादी व प्रगतिशील देश होने के कारण चीन और सोवियत संघ पर पहले तो पूरा भरोसा किया। पर जब उन देशों  ने धोखा दिया तो नेहरू टूट गए।उन्होंने अपनी पुरानी लाइन के खिलाफ जाकर अमेरिका की ओर दोस्ती का हाथ बढ़ा दिया।अमेरिका के भय से ही तब चीन ने हमला बंद कर दिया था।  यह आम धारणा है कि 1962 में सोवियत संघ ने कहा कि ‘दोस्त भारत’ और ‘भाई चीन’ के बीच के युद्ध में हम हस्तक्षेप नहीं करंेगे। पर  मशहूर राजनीतिक टिप्पणीकार ए.जी.नूरानी ने 8 मार्च , 1987 क साप्ताहिक पत्रिका  इलेस्ट्रेटेड वीकली आॅफ इंडिया में एक लंबा लेख लिख कर यह साबित कर दिया कि सोवियत संघ की सहमति के बाद ही चीन ने 1962 में भारत पर चढ़ाई की थी।

सोवियत संघ औऱ चीनी अखबारों ने तो सबूत भी पेश किए

नूरानी ने सोवियत अखबार ‘प्रावदा’ और चीनी अखबार पीपुल्स डेली में 1962 में छपे संपादकीय को सबूत के रूप में पेश किया है।  उससे पहले खुद तत्कालीन प्रधान मंत्री जवाहर लाल नेहरू वास्तविकता से परिचित हो चुके थे। इसीलिए उन्होंने अमेरिका के साथ के अपने ठंडे रिश्ते को भुलाकर राष्ट्रपति जाॅन एफ.कैनेडी को मदद के लिए कई त्राहिमाम संदेश भेजे।  उससे कुछ समय पहले कैनेडी से नेहरू की एक मुलाकात के बारे में खुद कैनेडी ने एक बार कहा था कि ‘नेहरू का व्यवहार काफी ठंडा रहा।’ चीन ने 20 अक्तूबर, 1962 को भारत पर हमला किया था।चूंकि हमारी सैन्य तैयारी लचर थी।हम ‘पंचशील’ के मोहजाल में जो फंसे थे !

कैनेडी के नाम वो त्राहिमाम पत्र…

नतीजतन चीन हमारी जमीन पर कब्जा करते हुए आगे बढ़ रहा था। उन दिनों बी.के.नेहरू अमेरिका में भारत के राजदूत थे। नेहरू का कैनेडी के नाम त्राहिमाम संदेश इतना दयनीय और समर्पणकारी था कि नेहरू के रिश्तेदार बी.के नेहरू कुछ क्षणों के लिए इस दुविधा में पड़ गए कि इस पत्र को व्हाइट हाउस तक पहुंचाया जाए या नहीं। पर खुद को सरकारी सेवक मान कर उन्होंने वह काम बेमन से कर दिया। दरअसल, उस पत्र में अपनाया गया रुख उससे ठीक पहले के नेहरू के अमेरिका के प्रति विचारों से  विपरीत था। लगा कि इस पत्र के साथ नेहरू अपनी गलत विदेश नीति और घरेलू नीतियों को बदल देने की भूमिका तैयार कर रहे थे।

इस देश की कम्यूनिस्ट पार्टी दो हिस्सों में बंट गयी, एक गुट मानता रहा कि भारत ने ही चीन पर चढ़ाई की

शायद नयी पीढ़ी को मालूम न हो, इस देश की कम्युनिस्ट पार्टी  चीन-भारत युद्ध  पर दो हिस्सों  में बंट गयी । एक गुट यानी आज का सी.पी.एम.यह मानता था कि भारत ने ही चीन पर चढ़ाई की थी। याद रहे कि नेहरू ने 19 नवंबर, 1962 को कैनेडी को लिखा था कि ‘न सिर्फ हम लोकतंत्र की रक्षा के लिए बल्कि इस देश के अस्तित्व की रक्षा के लिए भी चीन से हारता हुआ युद्ध लड़ रहे हैं।इसमें आपकी तत्काल सैन्य मदद की हमें सख्त जरूरत है।’भारी तनाव, चिंता और डरावनी स्थिति के बीच उस दिन नेहरू ने अमेरिका को दो -दो चिट्ठियां लिख दीं। इन चिट्ठियों को पहले गुप्त रखा गया था ताकि नेहरू की दयनीयता देश के सामने न आए।पर चीनी हमले की 48 वीं वर्षगाठ पर ‘इंडियन एक्सप्रेस’ ने उन चिट्ठियों को छाप दिया। 

युद्ध के बाद नेहरू अंदर से टूट चुके थे

याद रहे कि आजादी के बाद भारत ने गुट निरपेक्षता की नीति अपनाने की घोषणा की थी। पर वास्तव में कांग्रेस सरकारों का झुकाव सोवियत लाॅबी की ओर था। यदि नेहरू 1962 के बाद कुछ साल और जीवित रहते तो अपनी इस असंतुलित विदेश नीति को बदल कर रख देते। पर एक संवदेनशील प्रधान मंत्री, जो देश के लोगों का ‘हृदय सम्राट’ था, 1962 के  धोखे के बाद भीतर से टूट चुका  था। इसलिए वह युद्ध के बाद सिर्फ 18 माह ही जीवित रहे।  चीन युद्ध में पराजय से हमें यह शिक्षा मिली कि किसी भी देश के लिए राष्ट्रहित और सीमाओं की रक्षा का दायित्व सर्वोपरि होना चाहिए।भारत सहित विभिन्न देशों की जनता भी आम तौर इन्हीं कसौटियों पर  हुक्मरानों को कसती रहती है।

गेस्ट परिचय

आपने रिपोर्ट लिखी है।

सुरेन्द्र किशोर

आप देश के जाने-माने प्रतिष्ठत पत्रकार हैं। देश की आजादी के टाइम से आप लेखन करते रहे हैं। आप देश के प्रतिष्ठ अखबारों में अपना योगदान दिया है और देश व समाज को लेखनी के जरिए दिशा दी है। आपकी लेखनी विश्वसनीय और तथ्यपूर्ण मानी जाती है। विभिन्न समाचार पत्रों में आपकी रिपोर्ट संपादकीय कॉलम में प्रकाशित होती रही है। आप मूल रूप से बिहार के हैं।

आपका आभार !

मौर्य न्यूज18 की गेस्ट रिपोर्ट !

Nayan Kumarhttp://www.mauryanews18.com%20
MANAGING EDITOR MAURYA X NEWS18 PVT LTD . #March 2019 to till now ------- #20yrs Experience field of Journalism, #Mass Com - Print Media & Electronic Media #Former Sr. Subeditor, Dainik Jagaran, India's No-1 Hindi Daily News Paper, Patna, Bihar, 12 April 2000 -March2008 #Former Channel Co-Ordinator, Maurya Tv, Patna, Bihar/Jharkhand, April 2008 - March 2013 Channel Co-Ordinator, Zee Bihar/Jharkhand news from march 2013- march2014 #Editor, Ommtimes.com news portal, Patna, Bihar, April 2014 - AuG2018 #Former Editor, Maurya News, news Portal, Sept.2018-Feb2019

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