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सेक्स के लिए कितना गिरोगे यार, अब गधों की बारी, क्या है पूरी कहानी, पढ़िए। Maurya News18

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Maurya News18

Special Desk

इंसान कितना गिरेगा…जो पहले से ही मरा हुआ है, उसे कितना मारेगा। गधा तो पहले से बोझ तले दबा होता है। उसे कोई पूछता नहीं है। गाहे-बगाहे धोबी या फिर अन्य लोग सामान वगैरह ढोने के लिए उसका इस्तेमाल करते हैं लेकिन इससे भी लगता है कि इंसान का मन नहीं भरा। अब अपनी सेक्स क्षमता को बढ़ाने के लिए आदमी गधे का कत्ल कर रहा है। उसकी बेरहमी से हत्या की जा रही है।

आंध्र प्रदेश में वेस्ट गोदावरी जिले की एलुरु नहर के आसपास गधों के खून और अवशेष देखे गए हैं। यहां बड़ी संख्या में गधों को भेड़-बकरियों की तरह काटा जा रहा है। आलम यह है कि आंध्र प्रदेश में गधों की संख्या बहुत कम हो गई है, इसलिए उन्हें दूसरे राज्यों से लाकर मारा जा रहा है। केवल वेस्ट गोदावरी नहीं, आंध्र प्रदेश के कई जिलों में गधों की अंधाधुंध कटाई हो रही है।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, आंध्र प्रदेश के लोगों को लगता है कि गधे का मांस कई समस्याओं को दूर कर सकता है। वे मानते हैं कि इसे खाने से सांस की समस्या दूर हो सकती है। उन्हें यह विश्वास भी है कि गधे का मांस खाने से यौन क्षमता भी बढ़ती है। इस कारण केवल पश्चिम गोदावरी ही नहीं, बल्कि आंध्र प्रदेश के कई जिलों में गधों को मारा जा रहा है। इनमें कृष्णा, प्रकाशम और गुंटूर जिलों सहित कई दूसरे इलाके भी शामिल हैं। यहां उनके मांस की खपत बहुत तेजी से बढ़ी है। बाजार में उनका मांस करीब 600 रुपये किलो बिक रहा है। मीट बेचने वाला एक गधा खरीदने के लिए 15 से 20 हजार रुपये तक देता है।

हालांकि मेडिकल जानकारों ने गधे के मांस के औषधीय महत्व को बेतुका बताया है। मेडिसिन के प्रोफेसर अथिली वीरा राजू कहते हैं कि लोगों को इस तरह की अफवाहों पर भरोसा नहीं करना चाहिए। गधे के मांस के औषधीय महत्व को लेकर कोई वैज्ञानिक कारण या आधार नहीं है। ऐसा अभी तक साबित नहीं हुआ है कि गधे के मांस से पुरुषों की यौन शक्ति में बढ़ोतरी होती है।

बता दें कि भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण के मुताबिक, गधे ‘फूड एनीमल’ के तौर पर रजिस्टर्ड नहीं हैं। इन्हें मारना अवैध है।

आंध्र प्रदेश में गधे का मांस खाने की शुरुआत प्रकाशम जिले के एक गांव से हुई थी। यह इलाका एक वक्त चोरों का गढ़ माना जाता था। यहां एक मिथक था कि देर तक चलने और गधे का खून पीने से आदमी के घूमने की क्षमता बढ़ जाती है।

माना जाता है कि इस मिथक को लेकर ही चोरों ने गधे का मांस खाना शुरू किया था। वहीं आंध्र प्रदेश पशुपालन विभाग की सहायक निदेशक धनलक्ष्मी ने बताया है कि गधों की हत्या गैरकानूनी है।

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