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अब ‘शताब्दी भवन’ से लोगों को मिलेगा न्याय, भारत के चीफ जस्टिस ने किया उद्घाटन! Maurya News18

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Maurya News18, Patna

Legal Desk

बिहार में अब लोगों को नये बने शताब्दी भवन से न्याय मिलेगा। शनिवार को भारत के चीफ जस्टिस (CJI) शरद अरविंद बोबडे ने फीता काटकर इस भवन का उद्घाटन किया। इससे वकील और मुवक्किल दोनों में खुशी की लहर दौड़ गई।

उद्घाटन कार्यक्रम में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ ही सुप्रीम कोर्ट के कई जज और देश भर के हाईकोर्ट के जज के अलावे बिहार के एडवोकेट जनरल ललित किशोर और केंद्रीय कानून और न्याय मंत्री रविशंकर प्रसाद भी पहुंचे थे। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भारत के मुख्य न्यायाधीश शरद अरविंद बोबडे को गार्ड ऑफ ऑनर दिया।

कार्यक्रम में अपने संबोधन में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि कोरोना का दौर नहीं आता तो पिछले वर्ष ही नये भवन का उद्घाटन हो जाता। मेरे लिए यह खुशी की बात है कि इस भवन का शिलान्यास भी मैंने किया था और इसके लोकार्पण समारोह में भी मैं मौजूद हूं। पुराने भवन के अनुरूप विस्तारित भवन बना है। इसमें 203 करोड़ 94 लाख रुपये खर्च हुए। यह पांच मंजिला है। पटना हाईकोर्ट का पुराना और नया दोनों भवन जुड़े हुए हैं। नये भवन में 43 न्यायायल कक्ष बनाए गए हैं। छह कमेटी रुम, 90 लोगों के बैठने के लिए हॉल और 129 गाडि़यों की पार्किंग आदि की व्यवस्था है।

नीतीश कुमार ने कहा कि जब हमारी सरकार बनी तो उस समय 2006 में पटना हाईकोर्ट में भी मिटिंग की गई और अपराध पर नियंत्रण और उसके लिए प्रयास किया गया। एक -एक जिले पर नजर रहती थी कि तेजी से ट्रायल हो। अपराध पर नियंत्रण हुआ। इसके बावजूद कुछ लोगों की मानसिकता में गड़बड़ी होती है। वे कुछ-न-कुछ करते रहते हैं। हम प्रार्थना करेंगे कि ट्रायल का काम तेजी से होता रहेगा तो अपराध पर नियंत्रण होता रहेगा। अपराध नियंत्रण सिर्फ सरकार का काम नहीं है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ज्यादा से ज्यादा नियुक्ति या भवनों के निर्माण का मामला हो तो हम उसे करेंगे। न्यायपालिका सबसे जरूरी चीज है। विधायिका कानून बना सकती है। कार्यपालिका या सरकार अपना काम करती है। संविधान के मुताबिक सबसे बड़ी भूमिका न्यायपालिका की है। गड़बड़ करने वाला बच नहीं सकता है।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि मैं वचन देता हूं एक-एक चीज स्वीकार करेंगे ताकि सबको न्याय मिले। हाईकोर्ट और उसके दिशानिर्देश में यहां की न्यायपालिका बेहतर कार्य करे, इससे कई तरह का विकास होगा।

भारत के CJI जस्टिस शरद अरविंद बोबडे ने अपने संबोधन में नए भवन के लिए सभी को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने अपने भाषण में कई मुद्दों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि मुकदमे से पहले किसी जज के साथ मध्यस्थता कराने का इंतजाम किया जाना चाहिए। इससे अदालतों पर निर्भरता पर असर पड़ेगा।

न्यायपालिका में तकनीक के इस्तेमाल पर मुख्य न्यायाधीश  ने कहा कि इस पर पूरी तरह से निर्भरता नहीं रहनी चाहिए। इसके कई खतरे हो सकते हैं।

इससे पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने वृक्षारोपण किया। स्मृति चिन्ह और पौधा देकर अतिथियों का स्वागत किया गया। पटना हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजय करोल ने सभी अतिथियों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि शताब्दी भवन में बेहतर बुनियादी सुविधाएं होंगी। यह हाईकोर्ट के पुराने भवन के बगल में ही है। यहां दो लाइब्रेरी के साथ अत्याधुनिक सुविधाएं हैं।

जस्टिस संजय करोल के संबोधन के बाद सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस हेमंत गुप्ता और जस्टिस इंदिरा बनर्जी का भी संबोधन हुआ। जस्टिस इंदिरा बनर्जी ने बिहार और पाटलिपुत्र की ऐतिहासिकता का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उनके लिए गर्व की बात है कि उनकी मां का जन्म बिहार के मुंगेर में हुआ था।

जस्टिस इंदिरा बनर्जी के बाद सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस नवीन सिन्हा का भाषण हुआ। जस्टिस नवीन सिन्हा पटना हाईकोर्ट के जज रह चुके हैं।

जस्टिस नवीन सिन्हा के बाद केंद्रीय कानून और न्याय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने अपना संबोधन दिया। उन्होंने कार्यक्रम में मौजूद सभी न्यायाधीशों और मेहमानों का स्वागत किया। कहा कि पटना का सांसद होने के नाते मैं भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस शरद अरविंद बोबडे और देश भर से आए न्यायाधीशों और मेहमानों का स्वागत करता हूं। उन्होंने कहा कि आज मुझे बहुत गर्व महसूस हो रहा है कि मैंने पटना हाईकोर्ट से वकालत शुरू की। आज यहां बैठे कई न्यायाधीशों के कोर्ट में मैं विभिन्न मुकदमों में बहस कर चुका हूं।

उन्होंने कहा कि आज कुछ लोग सोशल मीडिया का गलत इस्तेमाल कर हैं। अपना एजेंडा सेट करने के लिए लोग अपने हिसाब से फैसला चाहते हैं। मनचाहा फैसला नहीं आने पर जजों के खिलाफ सोशल मीडिया पर मुहिम चलाते हैं। इसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है। भारत स्वतंत्र देश है, बोलने की आजादी है, लेकिन नया ट्रेंड शुरू किया गया है।

आधुनिक सुविधाओं से लैस इस शताब्दी भवन का शिलान्यास मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 4 फरवरी 2014 को तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रेखा एम दोषित की उपस्थिति में किया था। 203.94 करोड़ की लागत से निर्मित इस शताब्दी भवन में 43 कोर्ट रूम और 57 चैम्बर्स के अलावा दो लाइब्रेरी तथा अन्य सुविधाएं मौजूद हैं। हाईकोर्ट के पुराने भवन के ठीक पूरब इस नए भवन का निर्माण किया गया है।

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