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नीतीश सरकार के पास एक है रॉबिन हुड टाइप विधायक ! चलिए मिलवाते हैं…Maurya News18 !

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खास मुलाकात : राजगीर विधायक के साथ !

जब सीएम नीतीश कुमार ने एक दलित इंस्पेक्टर को थमा दिया था विधानसभा का टिकट, फिर क्या हुआ !

क्या राजगीर में इसबार भी जलेगी नीतीश के रवि की ज्योति !

रवि बोले…नीतीश कुमार की बदौलत ही बना विधायक

नयन, राजगीर, मौर्य न्यूज18 !

मिथलांचल के एक दलित युवक ने पढ़ाई की। पुलिस इंस्पेक्टर बना। जहां भी नौकरी की अपराधियों को धुल चटाई। गरीब-गुरबों के न्याय के लिए, सच्चाई के लिए अपने सिनियर ऑफिसर से भी भिड़ता रहा। गरीबों का रहनुमा और अपराधियों के लिए काल बनकर अपनी पुलिसिया और कानूनी ताकत से जनता में रॉबिन हुड वाली छवि बनाई। सफर यूं ही आगे बढ़ता रहा और पहुंच गए राजगीर। यहां भी रॉबिन हुड वाली हनक कायम रही। बात मुख्यमंत्री नीतीश कुमार तक पहुंची और साथियों ने सनक पैदा की। फिर खुद के अंदर भी जुनून चढ़ा- विधायक बनने का । फिर क्या था, रिस्क ली, नौकरी छोड़ी और कूद पड़े चुनावी मैदान में और बन गए राजगीर के विधायक । कहलाए रॉबिन हुड विधायक !!!

इस तरह एक रॉबिन हुड टाइप इंस्पेक्टर यानि एक “मुलाजिम” से “माननीय” बनने के सफर को जानने मौर्य न्यूज18 पहुंचा राजगीर और मिला उस रॉबिन हुड से जिससे आप भी मिलिए….नाम है रवि ज्योति। विधायक रवि ज्योति।

खाकी से खादी का सफर

एक इंस्पेक्टर विधायक कैसे बन गया।

कहते हैं, बस बन गया। कभी सोंचा ना था। पढ़ाई की, पुलिस में नौकरी मिली। इंस्पेक्टर बना। और फिर एक जुनून लिए काम शुरू कर दिया। गलत करने वालों खौफ खाओ, सही करने वाले निडर रहो। इसी फार्मूले पर काम करता रहा। दरभंगा से राजगीर आना पुलिसिया नौकरी की वजह से हुआ। राजगीर में लोगों ने इंस्पेक्टर वाली बर्दी में जब काम को देखा तो काफी तारीफ मिली। यहां के लोगों ने मुझे विधायक बनने के लिए प्रेरित किया और मैं नौकरी छोड़-छाड़ के कूद पड़ा विधायक बनने।

2015 में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मेरे जैसे दलित युवक को राजगीर सुरक्षित सीट से जदयू का टिकट थमा दिया। जबकि ये हमेशा से भाजपा का गढ़ रहा। 1995 से भाजपा टिकट पर डॉ एस एन आर्या जीतते रहे। मंत्री तक बने। ऐसे दिग्गज को मात देने के लिए पार्टी के मुखिया नीतीश कुमार ने मुझ पर भरोसा किया और उसी भरोसे के बल पर मैं विधायक बन गया। अब तो पांच साल हो गए। जबतक इंस्पेक्टर रहा, राजनेताओं को जानता था पर राजनीति को नहीं, लेकिन परिस्थितियों ने सब सीखा दिया। 2020 में पार्टी जो आदेश देगी करूंगा। हमारे नेता तो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ही हैं औऱ वही रहेंगे। इसके अलावा कुछ भी नहीं सोंचता ।

जब हमने पूछा —

खाकी या खादी दोनों में से अब कौन पसंद है।

कहने लगे…दोनों का अपना महत्व है, दोनों को अपना कर देखा। यहां बहुत धोखा, फरेब और मक्कारी है। मैं जरा बेवाकी से बोलने वाला इंसान हूं। मैंने जब खाकी पहनी तो वहां भी ईमानदारी ही हमारी पूंजी रही, लेकिन बहुत मुस्किलों का सामना करना पड़ा । मुझे ये कहने में कोई हिचक नहीं है कि कानून के रखवाले ही कानून का जमकर दुरूपयोग करते हैं। अपराधियों को अपराधी बनाए रखना खाकी और खादीधारी ही करते हैं। इसी बदनामी को मैंने खत्म करने की कोशिश की। क्या मजाल की कोई अपराधी मेरे खादी का इस्तेमाल कर ले और खाकी वाले हमारी जनता को तबाह कर ले। ये मैंने होने नहीं दिया। इसका खामियाजा भी मुझे भुगतना पड़ा।

कहने की बात नहीं कि जनता कहीं भोली दिखी, कहीं लाचार दिखी और कहीं जरूरत से ज्यादा होशियार ऐसे में नौकरी हमेशा दाव पर लगी रही। लेकिन मैं कभी व्यक्तिगत आमदनी के लिए किसी भी काम को चुना ही नहीं । सो, वही किया जो कानून के दायरे में रहा, हर पल…हर क्षण…निडर बना रहा ।

रही बात खादी की तो ये भी जनता से जुड़ा ही काम था, जब मैं खाकी में था तो खादी का रौब सहना पड़ता था, अपने सिनियर ऑफिसर पर भी खादी का जबर्दस्त दवाब दिखता था, तो मुझे लगा कि शायद ये खाकी तो खादी से भी ज्यादा पावर की चीज है…और जनता की सेवा भी इससे जुड़ी हुई है।

दूसरी बात ये जो खाकी वाले ऑफिसर बाबू लोग हैं वो आखिर खादी के सामने भिंगी बिल्ली क्यों बन जाते हैं…ये भी समझना था मुझे। इसलिए मन में आया कि खादी भी पहनी जाए..विधायक भी बना जाए…और देखा जाए कि कैसे क्या होता है..कितना पावर होता है। सो, एक जिद लिए आगे बढ़ा और बन गया विधायक ।

अब पांच साल हो गए…

विधायक बने …अब पांच साल हो गए…यहां जनता की सेवा का मौका है…लेकिन गंदगी का आलम कुछ और ही है। यहां किसी चीज का दवाब नहीं है लेकिन सामाजिक बुराई…जातिवाद, झूठ-फटंग, धोखा, साजिश इन सब चीजों का बोलवाला है। इन सब के बीच ईमानदारी से जीने और नेकी अपनाने की कोशिश की तो दम घुटने लगा। यही मैंने महसूस किया है।

लेकिन मानसिक मजबूती यहां आपको जीत दिला सकती है। जनता की सेवा करने पर कुछ बुद्दिजीवी आपके खिलाफ साजिश करने में लग जाते हैं। मानसिक रूप से तबाह कर देते हैं। ये मेरा व्यक्तिगत अनुभव है।  

…मेरे ही साथ देखिए..मैं एक दलित परिवार से हूं…और मेरा जो इलाका है वो सभी जातिधर्म के लोगों से भरा है। मैंने कभी जातिवाद को प्रमोट नहीं किया। ना ही इस नाम पर राजनीति की औऱ ना ही आगे करूंगा।

कहते हैं मैं मिथिलांचल से हूं…औऱ नालंदा की धरती पर राजगीर से विधायक बना…मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मुझे भरोसे के साथ टिकट दिया और जनता यहां हाथों हाथ मुझे ली औऱ मैं खादी पहनने के काबिल हो गया। अब जिस तरह से साजिश और सामाजिक अपराध का समना कर रहा हूं, उससे यही लगता है…अभी और बहुत कुछ करना पड़ेगा। लेकिन इतना साफ है कि जनता की सेवा करने का कोई विकल्प नहीं है ।

हमारी पार्टी के मुखिया और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार हम जैसे जनप्रतिनिधियों को काफी इज्जत देते हैं। खुलकर काम करने का मौका देते हैं। हम जैसों लोगों की भावनाओं को अच्छी तरह समझते हैं। साजिश करने वाले लाख साजिश कर लें…मैं तो हनक के साथ…ईमानदारी से जनता के लिए काम करता रहूंगा। और अपने काम की रिपोर्ट कार्ड भी जारी करता हूं। क्योंकि हमारे नेता भी काम देखते हैं इसलिए हमारे नेता हमेशा से नीतीश कुमार रहे हैं और वही रहेंगे, किसी को भ्रम नहीं होना चाहिए। आप देख सकते हैं जो रिपोर्ट कार्ड मैं सार्वजनिक करता हूं।

सोशल मीडिया पर अपने विधानसभा इलाके में किए काम की रिपोर्ट कार्ड भी दिखाई । कुछ यहां भी देखिए…।

चलते-चलते कुछ और कहना चाहेंगे –

कहने लगे । बस यही कहना चाहूंगा कि जनप्रतिनिधियों को अपने अंदर झांक कर देखना चाहिए कि हमने जनता की कितनी ईमानदारी से सेवा की। क्षेत्र का कितना विकास किया। जनता कभी भी आपके किए को भूलती नहीं। और दूसरी बात जनता दल यू के मुखिया और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जिस तरह से मेरे जैसे साधारण दलित युवक …एक साधारण इंस्पेक्टर को विधायक बनने का अवसर दिया। बिहार की जनता को …जातिवाद की राजनीति करने वालो…या दलित के नाम पर नेतागिरि करने वालों को समझना चाहिए कि मुख्यमंत्री का विजन दलितों के विकास के प्रति भी कितना साफ-सुथरा है। मुझे वो व्यक्तिगत रूप से जानते भी नहीं थे, सिर्फ उन्हें लोगों के जरिए ये जानकारी मिली कोई ईमानदार इंस्पेक्टर है और जनता को न्याय दिलाने के लिए किसी भी हद तक जाता है। लोगों में ईमानदार पुलिस कर्मी की छवि है। दलित है। सेवा का भाव है और आगे बढ़ा दिया। कह सकते हैं विधायक के काबिल समझा। ये बातें बिहारभर के दलित समाज को भी कभी नहीं भूलना चाहिए।

राजगीर से मौर्य न्यूज18 के लिए नयन की रिपोर्ट ।

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