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बिहार ने ही जन्म दिए भारत के पहले हृदय रोग विशेषज्ञ, नाम- डॉश्रीनिवास . Maurya News18

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29 दिसम्बर 2019 को पटना में मनाई गई 100वीं जयंती

केन्द्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि बिहार ने ऐसे विभूति को पैदा किया ये गर्व का विषय

मरीजों को परिवार का हिस्सा मानते थे और गरीबों के रहनुमा थे डॉक्टर साहब

पटना, मौर्य न्यूज18 ।

केन्द्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि गर्व का विषय है कि एक बिहारी देश का पहला ह्दय रोग विशेषज्ञ निकला। इस बिहार की धरती से डॉ श्रीनिवास जैसे महान व्यक्तित्व जन्म लिए जो अपने मरीजों को परिवार का हिस्सा मानकर ईलाज करते थे औऱ गरीबों के रहनुमा थे । केन्द्रीय मंत्री पटना के चाणक्या होटल में आयोजित डॉ श्रीनिवास की 100वीं जयंती समारोह में बोल रहे थे।

केन्द्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद डॉ श्रीनिवास की 100वीं जयंती समारोह में । चाणक्या होटल, पटना , बिहार।

आपको बता दें कि डॉ (प्रो) श्रीनिवास का परिवार उनकी 100 वीं जयंती पर उनकी याद में उनके बेटे ई. भैरव प्रियदर्शी, बहू डॉ श्रीमती मंजू प्रियदर्शी और पोते डॉ आदित्य श्रीनिवास और पोती डॉ सेवंती लिमये बिहार और झारखंड के कैंसर मरीजों के लिए एक नई पहल की घोषणा की । पहल कैंसर मरीजों की खोज कर उसकी मदद करने को लेकर है ताकि सही इलाज हो औऱ बिहार-झारखंड कैंसर मुक्त हो सके।

भारत के पहले ह्दय रोग विशेषज्ञ डॉ श्रीनिवास जो बिहार से थे। 29 दिसम्बर को 100वीं जयंती मनायी गई।

इस मौके पर बिहार के दिग्गज चिकित्सक भी जुटे और खुशनुमा गीत संगीत भी हुए ।

100वीं जयंती को यादगार बनाने के लिए डॉक्टर साहब का पूरा परिवार जुटा था। इसमें उनके पोते डॉ आदित्य श्रीनिवास औऱ पोती डॉ सेवंती लेमये जो अमेरिका में चिकित्सीय सेवा दे रहे हैं उन्होंने कहा कि ये हमारे लिए हर्ष का विषय है और बहुत ही पावन दिन है। हम अपने दादाजी के सपनों को और आगे बढ़ाना चाहते। और निरंतर चिकित्सीय सेवा देश और सूबे के अंदर देना चाहते हैं। डॉ आदित्य ने कहा कि कैंसर पेसेंट बिहार औऱ झारखंड में ज्यादा देखे जा रहे हैं इनकी हम सबको मिलकर सेवा करनी है और आगे किसी को ना हो इसके प्रति जागरूक भी करना है। और इसके साथ ही तमाम अतिथियों के स्वागत में लगे रहे। इस मौके पर बिहार के नामचीन चिकित्सक पारस हॉस्पिटल के डॉ हई, महावीर कैंसर के संस्थापक पूर्व आईपीएस अधिकारी आचार्य किशोर कुणाल । कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ मनीषा सहित कई चिकित्सक आये। और उन्हें याद किया।

इस मौके पर युवा गायिका वागिशा झा ने अपनी मधुर आवाज से पूराने नगमों को उनके नाम समर्पित किया। वागिशा की गायिकी से देश-विदेश से आये डॉनिवास के परिजन और अन्य अतिथि काफी मुग्ध हुए।

अब थोड़ा जानिए डॉ श्रीनिवास के बारे में

डॉ श्रीनिवास का जीवन डॉ श्रीनिवास एक प्रसिद्ध चिकित्सक और भारत के पहले हृदय रोग विशेषज्ञों में से एक हैं। वह खुद को ‘‘भगवान का सेवक‘‘ और हर व्यक्ति के दिल को ‘‘भगवान का मंदिर‘‘ कहते थे।

बिहार के समस्तीपुर में हुआ जन्म, वहीं से की स्कूलिंग

आगे की पढ़ाई – हार्वर्ड मेडिकल स्कूल (बोस्टन) यूएसए में अपनी कार्डियोलॉजी फेलोशिप पूरी की

वह बिहार के समस्तीपुर जिले के गर्दशिशई गांव (दलसिंहसराय के पास) के एक बहुत ही मामूली परिवार से आये थे। समस्तीपुर से अपनी स्कूली शिक्षा पूरी करने और साइंस कॉलेज (पटना) से इंटरमीडिएट करने के बाद, उन्होंने आगे की पढ़ाई के लिए प्रिंस ऑफ वेल्स मेडिकल कॉलेज अस्पताल (अब पीएमसीएच) में प्रवेश लिया, जहाँ उन्होंने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। वे अपने बैच के सबसे प्रतिभाशाली छात्र थे और सम्मान और स्वर्ण पदक के साथ एमबीबीएस पूरा किया। अपने एमडी (स्नातकोत्तर) के पूरा होने के बाद, उन्हें उच्च अध्ययन और प्रशिक्षण के लिए दो बार विदेश भेजा गया। उन्होंने कार्डियोलॉजी में अग्रणी डॉ पॉल डी व्हाइट के निर्देषन में हार्वर्ड मेडिकल स्कूल (बोस्टन) यूएसए में अपनी कार्डियोलॉजी फेलोशिप पूरी की।

पीएमसीएच के हर्ट हॉस्पिटल उन्हीं की देन

वतन वापसी पर वे पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल में चिकित्सा विभाग के प्रमुख बने। उन्होंने उत्तरी भारत और नेपाल में पहले हार्ट हास्पीटल की नींव रखकर, अपनी दृष्टि को एक ठोस आकार दिया (संयुक्त राज्य अमेरिका के मानकों के अनुरूप)। इसे आगे एक शिक्षण संस्थान के रूप में विकसित किया गया, जिसमें ओपन हार्ट के सर्जिकल सुविधाओं वाले  अस्पताल का नाम भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री- इंदिरा गांधी के नाम पर रखा गया, जिनसे वे व्यक्तिगत रूप से लिखित सहमति प्राप्त करने के लिए मिले थे। तब से कई डॉक्टरों ने इंदिरा गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियोलॉजी में प्रशिक्षण प्राप्त किया है और देश-विदेश में लोगों की सेवा कर रहे हैं। यह संस्थान अमीर और गरीब के लिए एक समान था।

देश के पहले राष्ट्रपति डॉ राजेन्द्र प्रसाद भी लेते थे सेवा

92वें वर्ष की आयु में दुनिया छोड़ गए

डॉ श्रीनिवास ने भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद, श्री जय प्रकाश नारायण, बिहार के कई मुख्यमंत्रियों और राज्यपालों सहित कई गणमान्य व्यक्तियों के व्यक्तिगत चिकित्सक और हृदय रोग विशेषज्ञ के रूप में काम किया। 60 से अधिक वर्षों तक सक्रिय नैदानिक अभ्यास में रहने के बाद, 8 नवंबर 2010 को 92 वर्ष की आयु में उन्होंने स्वर्गवास किया। चिकित्सा पद्धति में अपने सक्रिय दिनों के दौरान उन्होंने कई शोध प्रोजेक्ट का बीड़ा उठाया और उन्हें अंतर्राष्ट्रीय और राष्ट्रीय पत्रिकाओं में प्रकाशित किया।

उनकी ईसीजी मेथड (फिंगर प्रिंट के उस समय के प्रचलन के जरिए  ) की विधि को एफबीआई द्वारा यूएसए और स्कॉटलैंड यार्ड (यूके) में अपनाया गया

यह रिकॉर्ड पर है कि उनकी ईसीजी मेथड (फिंगर प्रिंट के उस समय के प्रचलन के जरिए  ) की विधि को एफबीआई द्वारा यूएसए और स्कॉटलैंड यार्ड (यूके) में अपनाया गया। उन्होंने योग और कई बीमारियों का इलाज करने की क्षमता पर विश्वास किया और इंदिरा गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियोलॉजी में कार्डिएक डिजिज के इलाज में इसे शामिल किया था। उन्होंने अपने हृदय रोगियों के लिए योग के लिए एक अलग इकाई भी बनाई थी। दिवंगत पीएम इंदिरा गांधी ने इस क्षेत्र में की गई सफलताओं का आकलन करने के लिए योगीराज धीरेंद्र ब्रम्हचारी को भेजा था। वह एक महान परोपकारी भी थे। उन्होंने अपनी अधिकांश आय निजी प्रैक्टिस से जरूरतमंद और गरीबों को दे दी। उन्होंने गरीब जनता को मुफ्त में दवाइयां और उपचार परामर्श भी दिया करते थे। डॉ.श्रीनिवास एक महान मानवतावादी थे और उनकी सोच अपने समय से पहले थी, वे धर्मनिरपेक्षता और जातिवाद से परे समाज में दृढ़ विश्वास करते थे।

जाति धर्म से हटकर बेटे का नाम भैरव उस्मान प्रियदर्शी और तांडव आइंस्टीन समदर्शी रखा

उन्होंने अपने मेडिकल करियर के शुरुआती चरण में अपने नाम से ‘‘सिन्हा‘‘ शीर्षक लगाया और अपने दो बेटों का नाम भैरव उस्मान प्रियदर्शी और तांडव आइंस्टीन समदर्शी रखा। यह उद्देश्य जाति और धर्म के आधार पर पहचान से बचने के लिए किया गया था। उन्होंने दलित परिवार को मार्गदर्शन और समर्थन भी प्रदान किया जो उनके साथ जुड़े हुए थे। उन्होंने पीएमसीएच के एक दलित कार्यकर्ता की बेटी का कन्यादान भी किया और उसके बेटे और दामाद के लिए एक सरकारी नौकरी की व्यवस्था की।

बड़े-बड़े संत-विद्वान भी जिनकी करते थे सराहना

वह कई संतों द्वारा पूजनीय थे, जो पटना आए थे। उर्दू के कवियों और बिहार के विद्वानों के बीच भी बहुत लोकप्रिय हैं। अपने स्वयं के पैसे से उन्होंने शायर अजीमाबादी के लिए एक मकबरा बनाया जो कि डॉ.श्रीनिवास के बड़े प्रशंसक और मरीज थे।डॉ श्रीनिवास ने अध्यात्मवाद में दृढ़ विश्वास किया और इस पर कई किताबें लिखीं। स्वामी विवेकानंद के संबोधन के 100 साल बाद विश्व धर्म संसद (यूएसए) के उत्सव में, आयोजकों द्वारा डॉ श्रीनिवास को शिकागो में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया गया था जो भारत सरकार द्वारा प्रायोजित किया गया था। श्रीनिवास ने अपने वैज्ञानिक ज्ञान और भगवान और हिंदू जीवन के हिंदू तरीकों के बारे में अपने दृढ़ विश्वास के साथ एक युगांतरकारी भाषण दिया।

उनके जीवन के कुछ अन्य रोचक तथ्यः –

1. जय प्रकाश नारायण की शांति सेना और उपचार में सक्रिय रूप से भाग लिया 2.  चिकित्सा उपचार नेपाल का राजा,  रामगढ़ के राजा कामख्या नारायण सिंह, आनंद मार्ग के गुरुजी बिहार के कुछ ज्ञात राज्यपाल जाकिर हुसैन,  देवकान्त बरूआ, अनंत शयनम अयंगर भारत के राष्ट्रपति राजेन्द्र प्रसाद, बीरपुर में कोसी बांध के उद्घाटन के दौरान भारत के प्रधान मंत्री जवाहर लाल नेहरू एवं बिहार के मुख्यमंत्री श्रीकृष्ण सिंह, अनुग्रह नारायण सिंह, बिनोदानंद झा, सत्येंद्र नारायण सिंह।

कैंसर मरीजों के लिए नई पहल,

डॉ पोता और डॉ पोती टीम बनाकर करेंगे काम

बिहार में कैंसर मरीजों के आंकड़े चौकाने वाला , काबू नहीं पाया गया तो भूगतने होंगे बड़े परिणाम

भारत में कैंसर एक महामारी बन गया है। हाल ही में प्रकाशित अनुमानों के अनुसार, भारत में 2026 तक एक वर्ष में होने वाले 1.87 मिलियन तक कैंसर के मरीजों की संख्या पहुँच सकती हैं। इन नए मामलों में से हर साल बिहार में 10 प्रतिषत मामलों का डायग्नोज किया जाता है। इसमें से अधिकांश मरीज ऐसे सामाजिक आर्थिक स्थिति से जुड़े होते हैं, जहां कैंसर का इलाज बहुत अधिक मंहगा होता है। गरीब सामाजिक-आर्थिक स्थिति के मरीजों  को उपचार के लिए समय पर पहुंच की कमी, सरकार द्वारा संचालित योजनाओं से धन प्राप्त करने में देरी और अपूर्ण या आंशिक चिकित्सा, उच्च मृत्यु दर और गरीब अस्तित्व दर के साथ सीधे जुड़े हुए हैं।

डॉ आदित्य और डॉ सेवंत लमये करेंगी मदद, आप कैंसर मरीज खोजिए और टीम को सूचना दीजिए, होगा निदान

इसके अतिरिक्त, कैंसर के उपचार के लिए जेब खर्च में वृद्धि से चिकित्सा खर्च बढ़ सकता है और इन रोगियों और उनके परिवारों के लिए वित्तीय बोझ बढ़ सकता है। कैंसर देखभाल में असमानताओं को अच्छी तरह से पहचाना जाता है और यहां इस तरह की पहल की तत्काल आवश्यकता है। इसको ध्यान में रखते हुए, बिहार और झारखंड में कैंसर की देखभाल में सुधार की आवश्यकता है और इस प्रकार इन रोगियों की रुग्णता और मृत्यु दर में मदद करने के लिए, हम एक परिवार के रूप में एक नई पहल की घोषणा करने के लिए आए हैं।

इस पहल का व्यापक लक्ष्य समाज के नेतृत्वकर्ता, शोधकर्ताओं, चिकित्सकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और लोगों को बिहार में कैंसर की देखभाल में सुधार करने में मदद करने और मदद करने के लिए एक मंच प्रदान करना होगा। कैंसर देखभाल में आवश्यकता वाले क्षेत्रों की पहचान करने के लिए कैंसर के लिए एक संयुक्त कार्य बल की स्थापना की जाएगी। इस पहल के कुछ लक्ष्य पेसेन्ट नेविगेशन और देखभाल के समन्वय में सुधार करना है, नैदानिक बायोप्सी और इमेजिंग की सहायता से उपचार में देरी को कम करना, ऑन्कोलॉजी में अनुसंधान और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग की खोज करना और सर्वाइवरषिप और पैलिएटिव केयर  के तरीके खोजना है।

पटना से मौर्य न्यूज18 की रिपोर्ट

Nayan Kumarhttp://www.mauryanews18.com%20
MANAGING EDITOR MAURYA X NEWS18 PVT LTD . #March 2019 to till now ------- #20yrs Experience field of Journalism, #Mass Com - Print Media & Electronic Media #Former Sr. Subeditor, Dainik Jagaran, India's No-1 Hindi Daily News Paper, Patna, Bihar, 12 April 2000 -March2008 #Former Channel Co-Ordinator, Maurya Tv, Patna, Bihar/Jharkhand, April 2008 - March 2013 Channel Co-Ordinator, Zee Bihar/Jharkhand news from march 2013- march2014 #Editor, Ommtimes.com news portal, Patna, Bihar, April 2014 - AuG2018 #Former Editor, Maurya News, news Portal, Sept.2018-Feb2019

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