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होमSTATEशुक्रिया हिमालय...खुली आंखों से तुझे देखा, समझा...।

शुक्रिया हिमालय…खुली आंखों से तुझे देखा, समझा…।

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एक साक्षात्कार ऐसा भी :

हिमालय पहुंचा, बादल फटा…फिर क्या हुआ…

नुबार घाटी से वारिला होते हुए पैंगोंग का सफर

हिमालय से विकास वैभव…की आंखों देखी ।

हिमालय पहुंचकर

हिमालय से साक्षात्कार के क्रम में बादल फटने की प्रथम अनुभूति लेह के निकट शक्ति में कल हुई, जब नुबरा घाटी से वारिला होते हुए पैंगोंग की यात्रा पर था ! केवल 5 सेकेंड से यदि चूके होते तो बादल फटने के कारण तीव्र जलधारा में बह गए होते ! पत्थरों से बाधित मार्ग से 4 घंटे पश्चात स्थानीय प्रशासन के सहयोग से निकल सके ! बादल फटने की प्रथम अनुभूति अद्भुत थी !

प्रकृति अचानक किस प्रकार का वीभत्स रूप धारण कर सकती है, यह प्रत्यक्ष दर्शित हुआ ! सर्वशक्तिमान की कृपा से तीव्र जल धारा जो पत्थरों के साथ बहती आ रही थी, वह टकराने से 5 सेकेंड पूर्व दिख गई और वाहन तुरंत पीछे लौटाने से हम सुरक्षित रहे !

काश कुछ पलों के लिए समय रूक ही जाता..!

इसी हिमालय से साक्षात्कार के क्रम में ही जब यात्री मन प्राकृतिक सौंदर्य से अभिभूत होकर पर्वत श्रृंखलाओं के मध्य समाहित शीतलता में समाता चला जाता है तब ऐसे भावों की जागृति अवश्य होती है कि काश कुछ पलों के लिए समय रूक ही जाता ! आज प्रातः पैन्गोंग सरोवर पहुँचकर जब परिदृश्य में लीन होने लगा तब मन में कुछ ऐसे ही भाव उमड़ रहे थे और तब इच्छा हुई कि वहीं सरोवर के किनारे बस रूका ही रहूँ ! कुछ समय के लिए जब रूका रहा तब आनंद की अलौकिक अनुभूति होने लगी और ऐसा प्रतीत होने लगा मानो समय वास्तव में स्थिर हो गया हो ! परंतु कुछ समय पश्चात ही चिंतनरत मन ने मानो झकझोरा और यह कहा कि उपर आकाश की ओर भ्रमणशील बादलों को देखकर गतिशीलता को अनुभव करो और जान लो कि समय का ठहराव तो असंभव है !

समय का भी धर्म है… !

यही तो समय का धर्म है चूंकि परिवर्तन ही ऋत है ! शेष जो प्रतीत हो रहा, वह भी निमित्त ही है और जिस जीवन रूपी यात्रा का लक्ष्य सत्य से वास्तविक साक्षात्कार है, उसके हर यात्री का धर्म गतिमान यात्रा के क्रम में सकारात्मकता के साथ सर्वाधिक योगदान समर्पित करते रहना मात्र ही है !

और मन कहने लगा…

मन कहने लगा कि भले अल्पावधि हेतु विश्राम कर लो परंतु यह जान लो कि रूकना नहीं है और यथासंभव हर यत्न के साथ लक्ष्यों की प्राप्ति तक दृढ़ निश्चय तथा भविष्यात्मक दृष्टिकोण के साथ सुदृढ़ रूप में गतिमान बने ही रहना है ! यदि कभी अल्पावधि विश्राम के लिए कुछ पल रूके भी, तो भी वहाँ मन में ध्येय अत्यंत स्पष्ट होना चाहिए कि यह अवसर दीर्घ चिंतन हेतु ही निर्धारित है जिसमें पूर्व की अनुभूतियों पर मंथन करतें हुए भविष्य में प्रस्तुत होने वाली संभावित चुनौतियों हेतु आंतरिक संकल्प को और सुदृढ़ करना है ! ध्येय मन में लिए बढ़ते जाना है !

चरैवेति ! चरैवेति !

यात्री की यात्रा गतिमान है…

हिमालय पहुँचकर यात्री मन कर रहा है यशस्वी पूर्वजों का स्मरण !

अभी लेह में सिंधु के किनारे बैठकर उन ऋषियों तथा मनीषियों का स्मरण कर रहा हूँ…,

जिनके तत्वदर्शी विचार आज भी प्रेरित करते हैं ! कभी वह भी इन्हीं पर्वतों के मध्य सिंधु के किनारे बैठकर उन तत्वों को ग्रहण करने का प्रयास करते रहे होंगे जिनके कारण हिमालय की आध्यात्मिक उर्जा मर्त्यलोक में प्रसिद्ध होती चली गई ! आज ऋषियों का स्मरण करते हुए धीरे-धीरे जब काल के क्रम में आगे बढ़ने लगा तब इसी क्षेत्र के मूल निवासी रहे प्रसिद्ध आचार्य रत्नवज्र तआ साक्यश्री का स्मरण आने लगा जो आज से लगभग एक सहस्त्र वर्ष पूर्व अध्ययन हेतु यहाँ से विक्रमशिला महाविहार तक यात्रा कर पहुँचे थे और वहाँ अपनी विद्वता के कारण केवल प्रसिद्ध ही नहीं हुए थे अपितु विक्रमशिला के द्वारपालाचार्य के रूप में नियुक्त भी हुए थे । आज भी विक्रमशिला के मौन में उन आचार्यों के वाणी की प्रतिध्वनि कहीं न कहीं अवश्य अनुभव होती है !

चलते-चलते प्रकृति की गोद में चिंतन ।

आज प्रकृति की गोद में चिंतन करने पर यह अनुभूति अवश्य हो रही है कि अत्यंत सौभाग्यशाली हूँ कि ऐतिहासिक सिंधु के किनारे बैठा हूँ और पर्वतराज हिमालय से साक्षात्कार का क्रम गतिमान है ! ऐसे में जब मन अत्यंत आध्यात्मिक हो उठता है, तब पर्वत श्रृंखलाओं के मध्य समाहित शीतलता में मानवीय चिंतन से परे परंतु दीर्घकालिक एकांत में ग्राह्य उस अत्यंत अद्भुत दृष्टि की आत्मिक अनुभूति अवश्य होती है, जिसने प्राचीनतम काल से ही ऋषियों तथा मनीषियों को भी कालमुक्त चिंतन हेतु निश्चित रूप से प्रेरित किया होगा ! हिमालय भ्रमण के क्रम में अनुभूतियां समय-समय पर साझा करता रहूँगा !

शुृक्रिया हिमालय !

सभी को हिमालय के मध्य अवस्थित क्षेत्र से हार्दिक शुभकामनाएं !

आपका परिचय ।

आपने रिपोर्ट लिखी है …आपका परिचय ।

आप बिहार से हैं । आईपीएस हैं । बिहार सरकार में निरंतर अपनी सेवा दे रहे हैं । वर्तमान में गृह विभाग विशेष शाखा में आईजी पद पर हैं । लेखनी में काफी गहरी रूची रखते हैं । बिहार की भूमि और ऐतिहासिक स्थलों पर आप अपनी लेखनी से दुनियाभर को अवगत कराते रहते हैं । आपकी लेखनी से बिहार के बारे में दुनिया बहुत कुछ जान और समझ पा रही है । ये आपका नये तरीके का एक मिशन है, जो युवाओं को भी ज्ञानवान बना रहा है ।

मौर्य न्यूज18 की गेस्ट रिपोर्ट ।

Nayan Kumarhttp://www.mauryanews18.com%20
MANAGING EDITOR MAURYA X NEWS18 PVT LTD . #March 2019 to till now ------- #20yrs Experience field of Journalism, #Mass Com - Print Media & Electronic Media #Former Sr. Subeditor, Dainik Jagaran, India's No-1 Hindi Daily News Paper, Patna, Bihar, 12 April 2000 -March2008 #Former Channel Co-Ordinator, Maurya Tv, Patna, Bihar/Jharkhand, April 2008 - March 2013 Channel Co-Ordinator, Zee Bihar/Jharkhand news from march 2013- march2014 #Editor, Ommtimes.com news portal, Patna, Bihar, April 2014 - AuG2018 #Former Editor, Maurya News, news Portal, Sept.2018-Feb2019

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