इंडियन इंस्टीट्यूट आफ मैनेजमेंट रांची में तीन दिवसीय 10वें पैन-आईआईएम विश्व प्रबंधन सम्मेलन 2025 का समापन हुआ
समापन सत्र के दौरान, विद्वानों के योगदान को मान्यता देते हुए नौ शैक्षणिक ट्रैकों में उत्कृष्ट शोध पत्रों को सम्मानित किया गया
रांची : आईआईएम रांची (IIM Ranchi) में तीन दिवसीय 10वें पैन-आईआईएम विश्व प्रबंधन सम्मेलन 2025 का समापन हुआ। अंतिम दिन अकादमिक नेताओं और नीति निर्माताओं के नेतृत्व में विचारोत्तेजक चर्चाएं हुईं। बातचीत प्रबंधन अनुसंधान के महत्व, नेतृत्व में खुशी की भूमिका और विकसित भारत के दृष्टिकोण को प्राप्त करने में आईआईएम के योगदान जैसे विषयों पर केंद्रित थी। समापन सत्र के दौरान, विद्वानों के योगदान को मान्यता देते हुए नौ शैक्षणिक ट्रैकों में उत्कृष्ट शोध पत्रों को सम्मानित किया गया। निदेशक प्रो. दीपक कुमार श्रीवास्तव ने 1400 से अधिक शोध-पत्रों के प्रस्तुतीकरण पर प्रकाश डाला, जिनमें से 950 शोध-पत्रों का चयन किया गया। उन्होंने सभी हितधारकों के प्रयासों की सराहना की और सामाजिक प्रभाव के महत्व पर बल दिया। उन्होंने कहा प्रबंधन अनुसंधान किस प्रकार सार्थक सामाजिक मूल्य सृजन में योगदान देता है। उन्होंने कहा आईआईएम रांची भविष्य में ऐसी कई और पहलों को बढ़ावा देने के लिए तत्पर है।
पूर्व केंद्रीय रेल, वाणिज्य एवं उद्योग, नागरिक उड्डयन एवं विद्युत मंत्री सुरेश प्रभु अतिथि वक्ता के रूप में समापन सत्र में शामिल रहे। उन्होंने कहा आइआइएम को अपना प्रभाव कार्पोरेट क्षेत्रों से आगे बढ़ाना चाहिए तथा सकारात्मक सामाजिक परिवर्तन के चालक बनना चाहिए। उन्होंने आगाह किया कि यद्यपि भारत 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, फिर भी इसकी प्रति व्यक्ति आय रैंकिंग (130 से नीचे) गंभीर विकास अंतराल को दर्शाती है। सच्ची प्रगति के लिए मानव और सामाजिक पूंजी का निर्माण आवश्यक है, जैसा कि चीन और अन्य देशों में सफल माडल देखे गए हैं।
IIM Ahmedabad के निदेशक प्रो. भारत भास्कर ने उद्यमिता और गैर-रेखीय विकास को प्रमुख बताया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत की महत्वाकांक्षी 32 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था को प्राप्त करने के लिए उद्यमशीलता और गैर-रेखीय विकास की ओर मानसिकता में बदलाव की आवश्यकता है। उन्होंने कहा भारत वर्तमान में सालाना केवल 25000 गुणवत्ता प्रबंधन स्नातकों का उत्पादन करता है, जो भविष्य की आर्थिक मांगों को पूरा करने के लिए अपर्याप्त है। जबकि विदेशी विश्वविद्यालय मूल्य संवर्धन करते हैं, वास्तविक परिवर्तन केवल नौकरी चाहने वालों पर ही नहीं बल्कि नौकरी सृजक सृजन पर भी केंद्रित होना चाहिए। भारत में एमएसएमई भारत के निर्यात में 45 प्रतिशत का योगदान करते हैं तथा 30 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार देते हैं, जिससे वे आर्थिक तेजी के लिए केंद्रीय भूमिका निभाते हैं। नोवार्टिस के विपणन, रणनीति एवं नवाचार के प्रोफेसर तथा आइएसबी हैदराबाद के पूर्व डीन प्रो. राजेंद्र श्रीवास्तव ने सतत व्यवसाय नवाचार के माध्यम से विकास में तेजी लाना विषय पर एक व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि व्यावसायिक मानसिकता को बदलने के लिए यह समझना आवश्यक है कि उत्पाद-बाजार जीवनचक्र में मूल्य किस प्रकार बदलता है, जिसमें असेंबली, डिजाइन, ब्रांडिंग, सेवाएं और अनुसंधान एवं विकास शामिल हैं। समापन सत्र के दौरान गणमान्य व्यक्तियों ने 10वें पैन-आइआइएम डब्ल्यूएमसी 2025 की सार पुस्तक का अनावरण किया। सिद्धार्थ सिन्हा को सर्वश्रेष्ठ आफलाइन पेपर प्रजेंटेशन के लिए सम्मानित किया गया जबकि प्रप्ति अग्रवाल को सर्वश्रेष्ठ आनलाइन पेपर प्रजेंटेशन के लिए समग्र विजेता नामित किया गया। पोस्टर प्रेजेंटेशन श्रेणी में विक्रांत सिंह को समग्र विजेता घोषित किया गया। इसके अलावा, नौ आमंत्रित अनुसंधान डोमेन में विजेताओं की घोषणा की गई, जिसमें अर्थशास्त्र वरुण शर्मा, वित्त एवं लेखा गोखिलवानी आर., डा. लक्ष्मी सुब्रमणि और अमित त्रिपाठी, आइएसबीए सौर्या जय डे, जिम्मेदार व्यवसाय सिद्धार्थ सिन्हा, विपणन संस्कृति देशपांडे, ओबीएचआर प्रगति अग्रवाल, क्वांट और संचालन अर्नब अधिकारी, रणनीति एवं उद्यमिता संदीप यादव, अंतःविषय अध्ययन अपूर्व शामिल हैं। सम्मेलन के आयोजन में सम्मेलन के अध्यक्षों प्रो. मनीष बंसल, प्रो. सुभरो सरकार और प्रो. कृष्ण कुमार दाद की भूमिका रही। Maurya News18 Ranchi.