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फाइलेरिया मरीजों को दिव्यांगता सर्टिफिकेट दिलाने का करें सामूहिक प्रयास : सिविल सर्जन

  • राज्य के 4 जिलों में फाइलेरिया उन्मूलन में अवरोधक, सहयोगी एवं आगे की रणनीति बनाने पर बैठक का आयोजन
  • पटना, पूर्णिया, बेगूसराय एवं मोतिहारी जिलों के बारे में की गई चर्चा
  • एम्स पटना, जिला स्वास्थ्य समिति एवं वीमेंस कोलेबोरेटिव फोरम के द्वारा बैठक का हुआ आयोजन

पटना : राज्य के चार जिलों पटना, पूर्णिया, बेगूसराय एवं मोतिहारी में फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम में अवरोधक, कार्यक्रम में सहयोगी एवं भविष्य की रणनीति बनाने पर पटना के एक निजी होटल में बैठक का आयोजन किया गया। बैठक का आयोजन एम्स पटना, जिला स्वास्थ्य समिति एवं वीमेंस कोलेबोरेटिव फोरम के द्वारा किया गया। बैठक में मुख्य अतिथि डॉ. अविनाश कुमार सिंह, सिविल सर्जन पटना, जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. सुभाष चंद्र प्रसाद, एम्स पटना के कम्युनिटी एंड फैमिली मेडिसिन के विभागाध्यक्ष डॉ. संजय पांडेय, राज्य फाइलेरिया सलाहकार डॉ. अनुज सिंह रावत, पिरामल स्वास्थ्य के स्टेट एनटीडी लीड बासब रूज, विश्व स्वास्थ्य संगठन से डॉ. अरुण कुमार, एम्स पटना के कम्युनिटी एंड फैमिली मेडिसिन के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. संतोष कुमार निराला एवं डॉ. बिजय नंदा नायक, पटना एम्स के सीनियर रेजिडेंट डॉ. दीपिका अग्रवाल, डॉ. वेंकटेश, डॉ. राम्या, पटना डीपीआरओ लोकेश कुमार झा, आईजीआईएमएस से विशेषज्ञ, जिला स्वास्थ्य समिति के पदाधिकारी एवं कर्मी, जिला फाइलेरिया कार्यालय के अधिकारी एवं कर्मी, सीएचओ, आशा कार्यकर्ता, सिफार के प्रतिनिधि, फाइलेरिया मरीज, जीविका, आईसीडीएस तथा ने विभागों के प्रतिनिधि तथा एम्स पटना के कई चिकित्सक मौजूद रहे।

MDA कार्यक्रम का हुआ है सकारात्मक प्रभाव :
बैठक को संबोधित करते सिविल सर्जन डॉ. अविनाश कुमार सिंह ने कहा सभी योग्य फाइलेरिया मरीजों को जांच के बाद जल्द से जल्द दिव्यांगता सर्टिफिकेट दिलाने के लिए सभी प्रयास करें ताकि उन्हें दिव्यांगता पेंशन प्राप्त हो सके। उन्होंने कहा MDA कार्यक्रम का प्रभाव दिखता है लेकिन अभी और मेहनत करने की आवश्यकता है। सिविल सर्जन ने कहा राज्य की आबादी के 50 प्रतिशत लोग अपने जीवनकाल में कभी न कभी हाइड्रोसिल से ग्रसित होते हैं और यह फाइलेरिया संक्रमण के कारण होता है। फाइलेरिया को लेकर समुदाय में व्याप्त भ्रम और गलतफहमी को दूर करने की आवश्यकता है।

दुनिया के 40% फाइलेरिया रोगी भारत में :
स्वागत संबोधन में एम्स पटना के कम्युनिटी एंड फैमिली मेडिसिन के विभागाध्यक्ष डॉ. संजय पांडेय ने कहा दुनिया के 40 प्रतिशत फाइलेरिया रोगी अकेले भारत में हैं। राज्य के सभी 38 जिले फाइलेरिया से प्रभावित हैं। बैठक का उद्देश्य है कि सभी प्रतिभागी अपनी बात खुलकर सामने रखें। राज्य फाइलेरिया सलाहकार डॉ. अनुज सिंह रावत ने कहा बिहार देश का एकमात्र राज्य है जो MMDP किट में विशेष चप्पल फाइलेरिया मरीजों को देता है। पिरामल स्वास्थ्य के स्टेट एनटीडी लीड बासब रूज ने फाइलेरिया उन्मूलन के लिए अंतर्विभागीय समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया। विश्व स्वास्थ्य संगठन के जोनल को-ऑर्डिनेटर डॉ. अरुण कुमार ने फाइलेरिया बीमारी एवं इसके उन्मूलन के तकनीकी पहलुओं पर बात की।

पटना जिले में 1500 हाइड्रोसिल मरीजों का किया जा चुका है ऑपरेशन :
बैठक को संबोधित करते जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. सुभाष चंद्र प्रसाद ने कहा जिला के 1500 हाइड्रोसिल मरीजों का ऑपरेशन किया जा चुका है। सभी चिन्हित हाइड्रोसिल मरीजों का ऑपरेशन शीघ्र किया जाएगा। उन्होंने कहा सभी फाइलेरिया मरीजों को MMDP किट उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने स्वास्थ्य कर्मियों को कहा किट देते समय उसके इस्तेमाल का सही तरीका फाइलेरिया मरीजों को दिखाएं। उन्होंने कहा क्रॉस वेलिडेशन के लिए नाईट ब्लड सर्वे में एकत्रित किया गए सैंपल की स्लाइड को अविलंब भेजें। बैठक में पैनल डिस्कशन का आयोजन किया गया, जिसमें विभिन्न विभागों के प्रतिनिधि, सहयोगी संस्थानों के प्रतिनिधि, स्वास्थ्य अधिकारी एवं आशा कार्यकर्ताओं ने अपनी बात रखी। पैनल डिस्कशन का संचालन विश्व स्वास्थ्य संगठन के जोनल को-ऑर्डिनेटर डॉ. अरुण कुमार ने किया। पैनल डिस्कशन के दौरान सिफार के सहयोग से आए फाइलेरिया मरीज जितेंद्र कुमार एवं बाबूनंद सिंह ने फाइलेरिया से अपने संघर्ष की चर्चा की। डॉ. संतोष कुमार निराला ने बताया फाइलेरिया जैसी संक्रामक बीमारी केवल भारत ही नहीं बल्कि विश्व के कई देशों में फैली हुई है। भारत में यह बीमारी 20 राज्यों के 348 जिलों में फैली है। इस रोग को समाप्त करने के लिए समुदाय के बीच मौजूद समस्याओं को समझना और उनका प्रबंधन करना बेहद आवश्यक है। इसी उद्देश्य से यह कार्यशाला आयोजित की गई। इसके लिए सभी को अपनी सकारात्मक भूमिका निभानी होगी। एम्स पटना के कम्युनिटी एंड फैमिली मेडिसिन के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. संतोष कुमार निराला ने सभी प्रतिभागियों को धन्यवाद ज्ञापित कर बैठक का समापन किया। बैठक का संचालन एम्स पटना के कम्युनिटी एंड फैमिली मेडिसिन के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. बिजय नंदा नायक ने किया।
Maurya News18 Patna.

गर्भाशय ग्रीवा कैंसर से सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है HPV टीका

– यूनिसेफ और स्वास्थ्य विभाग द्वारा पूर्णिया में मीडिया उन्मुखीकरण कार्यशाला, विशेषज्ञों ने मिथकों के विरुद्ध जागरूकता बढ़ाने का आह्वान किया

– महिलाओं के स्वास्थ्य की सबसे बड़ी अनदेखी पीड़ा सर्वाइकल कैंसर के विरुद्ध जागरूकता की आवश्यकता

पूर्णिया : देश में महिलाओं के बीच गर्भाशय ग्रीवा (सर्वाइकल) कैंसर एक ऐसी स्वास्थ्य समस्या बन चुकी है, जो पूरी तरह रोके जाने योग्य होने के बावजूद जागरूकता की कमी और सामाजिक मिथकों के कारण हजारों जीवन को प्रभावित कर रही है। समाज में फैली भ्रांतियों को खत्म करने और विज्ञानी जानकारी को जन-जन तक पहुंचाने में मीडिया की भूमिका आज पहले से अधिक महत्वपूर्ण है। इसी उद्देश्य से पूर्णिया में एक मीडिया उन्मुखीकरण कार्यशाला आयोजित की गई, जिसने महिलाओं के स्वास्थ्य-सुरक्षा को नई दिशा देने का संदेश दिया। कार्यक्रम में प्रमंडल के सभी जिलों के सिविल सर्जन, जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी, डीपीएम, यूनिसेफ के पदाधिकारी एवं प्रमंडल के सभी जिलों के मीडिया कर्मी ने भाग लिया है।

पूर्णिया में मंडल-स्तरीय मीडिया उन्मुखीकरण कार्यशाला :
होटल सेंटर प्वाइंट में यूनिसेफ बिहार और स्वास्थ्य विभाग द्वारा आयोजन किया गया। जिसमें गर्भाशय ग्रीवा कैंसर और एचपीवी टीके (HPV) के संबंध में जागरूकता बढ़ाने के लिए एक दिवसीय मंडल-स्तरीय मीडिया उन्मुखीकरण कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक तथा डिजिटल मीडिया के प्रतिनिधियों ने भाग लिया और वैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित रिपोर्टिंग के विभिन्न पहलुओं पर प्रशिक्षण प्राप्त किया।

मीडिया मिथकों को खत्म करने का सबसे प्रभावी माध्यम :
कार्यक्रम की शुरुआत क्षेत्रीय अपर निदेशक (स्वास्थ्य), पूर्णिया प्रमंडल डॉ. प्रमोद कुमार कनौजिया के स्वागत संबोधन से हुई। उन्होंने कहा गर्भाशय ग्रीवा कैंसर जागरूकता और समय पर टीकाकरण से रोका जा सकने वाला रोग है। इसके बावजूद समाज में इससे जुड़े अनेक भ्रम हैं। इन्हें दूर करने का सबसे सशक्त माध्यम मीडिया ही है, जो सही और प्रमाणित जानकारी जनता तक पहुंचा सकता है। कार्यशाला की रूपरेखा डॉ. पूजा, संचार, वकालत एवं साझेदारी विशेषज्ञ, यूनिसेफ बिहार द्वारा प्रस्तुत की गई। उन्होंने कहा HPV और सर्वाइकल कैंसर के विषय में कई मिथक लोगों के निर्णय को प्रभावित करते हैं। तथ्य आधारित संवाद ही इन भ्रांतियों को दूर करेगा और इसमें मीडिया का योगदान महत्वपूर्ण है।

सार्वजनिक स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से HPV और सर्वाइकल कैंसर :
मुख्य तकनीकी सत्र में डॉ. अंशुमन, स्वास्थ्य अधिकारी, यूनिसेफ बिहार ने गर्भाशय ग्रीवा कैंसर की गंभीरता और भारत में इसके प्रसार पर विज्ञानी प्रस्तुति दी। उन्होंने कहा भारत में सर्वाइकल कैंसर महिलाओं की मृत्यु का प्रमुख कारण है। HPV टीका सुरक्षित, प्रभावी और आवश्यक है। समय पर टीकाकरण और जागरूकता से इस रोग के खतरे को लगभग समाप्त किया जा सकता है। उन्होंने पत्रकारों से अपील की कि वे तथ्यों पर आधारित रिपोर्टिंग जनता तक पहुंचाए।

मीडिया रिपोर्टिंग टूलकिट, CAS और एचपीवी रिपोर्टिंग दिशा निर्देश पर प्रशिक्षण :
सत्र में मीडिया रिपोर्टिंग टूलकिट (MRT) के 12 महत्वपूर्ण बिंदुओं, क्रिटिकल एप्रीजल स्किल्स और HPV टीकाकरण से संबंधित रिपोर्टिंग दिशा-निर्देशों की विस्तृत जानकारी दी गई। जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी किशनगंज डॉ देवेंद्र कुमार ने कहा स्वास्थ्य संबंधी खबरें लिखते समय वैज्ञानिक तथ्यों की सटीकता सर्वोपरि है। अपूर्ण या असत्यापित जानकारी जन स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकती है।

HPV टीका पूरी तरह सुरक्षित मीडिया मिथक तोड़ने में मदद करें :
कार्यक्रम के अगले हिस्से में शादाब मलिक, स्टेट सीएपी कंसल्टेंट, यूनिसेफ बिहार ने मीडिया को तथ्य-जांच, मिथक निर्धारण और जिम्मेदार स्वास्थ्य रिपोर्टिंग के वास्तविक तकनीकी पहलुओं पर प्रशिक्षित किया। उन्होंने कहा कि समाज में एचपीवी टीके के बारे में जो भी भ्रांतियां फैली हैं, वे वैज्ञानिक जानकारी की कमी का परिणाम हैं। मीडिया इन मिथकों को तोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

व्यावहारिक अभ्यास समूह कार्य एवं प्रस्तुति :
दोपहर के बाद प्रतिभागियों को समूहों में विभाजित कर उनसे एचपीवी और सर्वाइकल कैंसर पर नमूना जागरूकता रिपोर्ट तैयार करने को कहा गया। प्रत्येक समूह ने तथ्य, वैज्ञानिक आधार और सामाजिक प्रभाव को शामिल करते हुए अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की।

जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव :
समापन सत्र में मो. कैशर इकबाल, क्षेत्रीय कार्यक्रम प्रबंधक और यूनिसेफ ने सभी प्रतिभागियों का धन्यवाद ज्ञापन किया। उन्होंने कहा कार्यशाला केवल ज्ञान-विनिमय का कार्यक्रम नहीं बल्कि महिलाओं की स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए एक सामूहिक प्रतिबद्धता है। मीडिया इस बदलाव की सबसे प्रभावी शक्ति है। समापन के बाद सामूहिक फोटो लिया गया और कार्यक्रम संपन्न हुआ।
Maurya News18 Purnea.

फाइलेरिया उन्मूलन में रोगी हितधारक मंच के सदस्य कर रहे सहयोग

  • फाइलेरिया उन्मूलन की मुहिम को मजबूत बनाने की हो रही कवायद

भोजपुर : फाइलेरिया उन्मूलन के लिए स्वास्थ्य विभाग लगातार प्रयासरत है। इस मुहिम को सफल और सशक्त बनाने के लिए जिला के 7 प्रखंडों के 27 आयुष्मान आरोग्य मंदिर (हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर) पर रोगी हितधारक मंच यानी पेशेंट स्टेकहोल्डर प्लेटफॉर्म का गठन किया गया है। जिला के चयनित 7 प्रखंड हैं, बड़हरा, कोईलवर, चरपोखरी, शाहपुर, संदेश, आरा सदर ग्रामीण और गढ़हनी। रोगी हितधारक मंच के गठन का उद्देश्य लोगों में वेक्टर जनित रोग व अन्य बीमारियों के प्रति जागरूकता लाने, फाइलेरिया मरीजों को स्वास्थ्य सुविधाओं से जोड़ने, नाइट ब्लड सर्वे में सहयोग करने आने वाले सर्वजन दवा सेवन अभियान के दौरान फाइलेरियारोधी दवा सेवन कराने तथा इसका काम में स्वास्थ्य कर्मियों को सहयोग प्रदान करने तथा हाथीपांव व हाइड्रोसील के मरीजों तक समाज कल्याण की योजनाओं की पहुंच को बढ़ाना है। इस प्लेटफॉर्म के तहत वार्ड सदस्य, हाथीपांव मरीजों, पंचायत प्रतिनिधियों, राशन डीलर, सामाजिक उत्प्रेरक, आशा, आंगनबाड़ी सेविका सहायिका, शिक्षक और ग्रामीणों आदि को शामिल किया गया है।

फाइलेरिया की समझ बढ़ाने में PSP मददगार :
शाहपुर प्रखंड के बिलौटी आयुष्मान आरोग्य मंदिर की CHO प्रीति सिंघानिया ने बताया कि संपन्न हुए नाइट ब्लड सर्वे के दौरान रोगी हितधारक मंच के सदस्यों के द्वारा जागरूकता ले जाने का काम किया गया है। मंच के सदस्य फाइलेरिया से बचाव संबंधी जागरूकता अभियान भी चला रहे हैं। आगामी वर्ष फाइलेरिया उन्मूलन के लिए 10 फरवरी से सर्वजन दवा सेवन अभियान होना है। हाथीपांव रोग के प्रति जनजागरूकता लाने तथा आमजन को फाइलेरिया रोधी दवा सेवन कराने के लिए मोबिलाइजेशन आवश्यक है। इसमें हाथीपांव मरीजों की महत्वपूर्ण भूमिका है। हाथीपांव रोगी इस अभियान में पूरी मदद करेंगे। CHO ने बताया कि आगामी सर्वजन दवा सेवन अभियान के दौरान समुदाय को जागरूक कर दवा सेवन के लिए प्रेरित कर विभाग की हरसंभव मदद की जाएगी। फाइलेरिया मरीज सह रोगी हितधारक मंच की सदस्य रूपा देवी बताती हैं कि उन्होंने फाइलेरिया का दंश झेला है और वह चाहती हैं कि कोई और व्यक्ति फाइलेरिया से ग्रसित न हो। उन्होंने कहा मैं हाथीपांव की मरीज हूं और मंच से जुड़कर मैंने जाना यह रोग अगर एक बार हो जाए तो इसका उपचार संभव नहीं है। इसलिए मैं समुदाय के लोगों को फाइलेरिया से बचाव की जानकारी देती हूं। नाइट ब्लड सर्वे के लिए मैंने समुदाय को रक्त के नमूने देने का लिए जागरूक किया और सबसे जरुरी बात यह है कि आगामी एमडीए अभियान के दौरान मेरे गांव के सभी योग्य व्यक्ति फाइलेरिया की दवा का सेवन करें और इसके लिए मैं लोगों से नियमित संवाद करती हूं।

क्या है रोगी हितधारक मंच :
डॉ. अतिउल्लाह, प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, शाहपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ने बताया कि रोगी हितधारक मंच की अवधारणा आयुष्मान आरोग्य मंदिर के स्तर पर होती है। इसके तहत CHO के साथ एवं उनकी अध्यक्षता में फाइलेरिया (Filaria) रोगी और पंचायत स्तर के प्रमुख प्रतिनिधि जिनकी आसान पहुंच समुदाय तक होती है, शामिल रहते हैं। इनका मुख्य मकसद समुदाय स्तर पर फाइलेरिया उन्मूलन को गति देना और जागरूकता फैलाना है। इसके अलावा नए फाइलेरिया रोगियों की खोज कर उन्हें स्वास्थ्य सुविधाओं से जोड़ना भी है।
Maurya News18 Bhojpur.

हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर चोपड़ा बायसी में परिवार नियोजन मेला का हुआ आयोजन

– उपस्थित लोगों को परिवार नियोजन के विभिन्न योजनाओं की दी गई जानकारी

– इच्छुक लोगों को परिवार नियोजन के विभिन्न सुविधाओं का दिया गया लाभ

पूर्णिया : जिले के विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों में 28 नवंबर से 12 दिसंबर तक पुरुष नसबंदी पखवाड़े का संचालन किया जा रहा है। इस दौरान स्वास्थ्य विभाग द्वारा योग्य दंपतियों को परिवार नियोजन के सभी स्थायी और अस्थायी सुविधाओं की जानकारी उपलब्ध कराते हुए इच्छुक दंपतियों को परिवार नियोजन के स्थायी और अस्थायी परिवार नियोजन सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही है। लोगों को परिवार नियोजन के विभिन्न सुविधाओं की जानकारी उपलब्ध कराते हुए इच्छुक लोगों को संबंधित परिवार नियोजन सुविधा उपलब्ध कराने के लिए जिले के बायसी प्रखंड में संचालित हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर चोपड़ा में स्वास्थ्य विभाग द्वारा परिवार नियोजन मेला का आयोजन किया गया। इस दौरान उपस्थित लोगों को स्वास्थ्य कर्मी, एएनएम, आशा कर्मियों द्वारा परिवार नियोजन के स्थायी और अस्थायी सुविधाओं की जानकारी प्रदान करते हुए परिवार नियोजन मेला के दौरान इच्छुक लोगों को परिवार नियोजन के अस्थायी सुविधा उपलब्ध कराई गई।

उपस्थित लोगों को परिवार नियोजन के विभिन्न विधियों की दी गई जानकारी :
प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी बायसी डॉ अहमर हसन ने बताया पुरूष नसबंदी पखवाड़े के दौरान लोगों को परिवार नियोजन के विभिन्न सुविधाओं की जानकारी उपलब्ध कराने के लिए हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर चोपड़ा में परिवार नियोजन मेला का आयोजन किया गया। इस दौरान उपस्थित लोगों को परिवार नियोजन के स्थायी सुविधाओं में महिला बंध्याकरण और पुरुष नसबंदी सुविधाओं के साथ साथ अस्थायी सुविधाओं के लिए परिवार नियोजन के अस्थायी विकल्पों आया लाभ उठाने की जानकारी उपलब्ध कराई गई। मेले में आए महिलाओं और पुरुषों को परिवार नियोजन अस्थायी विधियों में शामिल कंडोम, छाया गोली, अंतरा इंजेक्शन, आईयूसीडी आदि की विस्तृत जानकारी दी गई। मेले में उपस्थित लोगों को सभी परिवार नियोजन विधि के लाभ, सुरक्षा और उपयोग की प्रक्रिया को समझाया गया जिससे कि स्थानीय लोगों द्वारा परिवार नियोजन के सभी सुविधाओं का लाभ उठाते हुए परिवार को नियंत्रित और स्वस्थ्य रखा जाए।

इच्छुक लोगों को परिवार नियोजन के विभिन्न सुविधाओं का दिया गया लाभ :
BHM किंकर घोष ने कहा परिवार नियोजन मेला में उपस्थित लोगों को परिवार नियोजन के अस्थायी सुविधाओं में शामिल कंडोम, छाया गोली, अंतरा इंजेक्शन, आईयूसीडी सुविधाओं की जानकारी उपलब्ध कराते हुए इच्छुक लोगों को निःशुल्क अस्थायी सुविधाओं का लाभ उपलब्ध कराया गया। मेला में दंपतियों को अस्थायी सुविधाओं का लाभ उपलब्ध कराते हुए दंपतियों को स्वास्थ्य केंद्रों द्वारा परिवार नियोजन के सभी सुविधाओं का सभी स्वास्थ्य केंद्रों में नियमित रूप से लाभ उठाने के लिए उपलब्ध रहने की जानकारी दी गई जिससे दंपतियों द्वारा सभी सुविधाओं का लाभ आसानी से कभी भी उठाया जा सकता है। बीएचएम ने बताया कि परिवार नियोजन मेला में इच्छुक दंपतियों की पहचान करते हुए स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा उपयुक्त स्वास्थ्य संस्थान में परिवार नियोजन के सभी सुविधाओं का लाभ आसानी से उठने के लिए रेफर किया गया।

समुदाय में परिवार नियोजन के प्रति जागरूकता में वृद्धि हुई :
BHM किंकर घोष ने कहा मेले के माध्यम से समुदाय में परिवार नियोजन के प्रति जागरूकता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। मेले में महिलाएं एवं पुरूष दोनों ही परिवार नियोजन से जुड़े सवाल खुलकर पूछते हुए संबंधित सुविधाओं का लाभ उठाने में अपनी इच्छुकता दर्ज कराई। मेले में कई महिलाओं ने अपने विकल्पों को बेहतर तरीके से समझा और निर्णय लेने में आत्मविश्वास महसूस कराई। उन्होंने कहा परिवार नियोजन मेले के दौरान आशा एवं एएनएम द्वारा समुदाय को परिवार नियोजन मेले से जोड़ने, जानकारी देने और परिवार नियोजन विकल्पों की जानकारी उपलब्ध कराने में अहम और सराहनीय भूमिका निभाई जिससे लोगों द्वारा परिवार नियोजन के विभिन्न विकल्पों के प्रति जागरूकता पैदा हुई और लोगों द्वारा स्वास्थ्य केंद्रों में संबंधित परिवार नियोजन सुविधाओं का लाभ उठाने में सहमति जताई गई।
Maurya News18 Purnea.

विभिन्न जिलों से आए छात्रों ने सड़क पर उतरकर भरी हुंकार, किया जनाक्रोश मार्च

  • आजसू छात्र संघ का जनाक्रोश मार्च
  • शिक्षा के लिए भिक्षा : जनाक्रोश मार्च में आजसू छात्र संघ ने दिखाई ताकत
  • पुलिस के साथ हुई तीखी झड़प, सड़क पर बैठे आजसू नेता
  • एसटी, एससी, ओबीसी छात्रों के लंबित छात्रवृत्ति भुगतान करने की उठाई आवाज

रांची : शिक्षा के लिए भिक्षा : जनाक्रोश मार्च में गुरुवार को आल झारखंड स्टूडेंट यूनियन के आजसू छात्र संघ ने अपनी ताकत दिखाई। बापू वाटिका से निकलकर छात्रों ने राजभवन की ओर बढ़ने का प्रयास किया तो मछलीघर के पास पुलिस ने जनाक्रोश मार्च को कांके रोड होते हुए रातू रोड की ओर डायवर्ट कर दिया। इसके बाद छात्र रातू रोड की ओर से राजभवन की ओर बढ़े तो पुलिस ने फ्लाईओवर के पास रोक दिया। आजसू नेताओं को पुलिस के साथ तीखी झड़प हो गई। इसके बाद आजसू कार्यकर्ता नेता वहीं सड़क पर बैठ गए और हेमंत सरकार के विरोध में नारेबाजी करने लगे। इसके बाद प्रशासन ने आजसू छात्र संघ को राजभवन को ज्ञापन देने के लिए आमंत्रित किया। राज्यपाल की अनुपस्थिति में आजसू नेताओं ने राजभवन कार्यालय को ज्ञापन सौंप दिया। आजसू के कार्यकर्ताओं ने बापू वाटिका मोरहाबादी से राजभवन के लिए जनाक्रोश मार्च शुरू किया। मार्च में रांची, लोहरदगा, गुमला, हज़ारीबाग, रामगढ़, धनबाद, गिरिडीह, बोकारो सहित विभिन्न जिलों के कालेजों और विश्वविद्यालयों के हजारों छात्र छात्राओं ने बड़ी संख्या में मार्च में शामिल होकर लंबित पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति भुगतान के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया। जनाक्रोश मार्च का नेतृत्व आजसू छात्र संघ के प्रदेश अध्यक्ष ओम वर्मा, कार्यकारी अध्यक्ष बबलू महतो, वरीय उपाध्यक्ष ऋतुराज शाहदेव, पीयूष चौधरी, महासचिव विशाल महतो, युवा आजसू के महानगर अध्यक्ष अमित यादव समेत अन्य नेताओं ने किया। इस दौरान वरीय नेता संजय मेहता भी उपस्थित रहे। हाथों में बैनर, पोस्टर, स्लोगन और छात्रवृत्ति भुगतान की मांग को ले छात्र समूह राजभवन की ओर बढ़ा और मार्ग में सरकार की लापरवाही के विरोध में आवाज बुलंद की। राजभवन पहुंचकर छात्र प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा और आग्रह किया कि लंबित 2024-25 छात्रवृत्ति का तत्काल भुगतान किया जाए और ई-कल्याण पोर्टल पर सभी लंबित आवेदनों की स्थिति सार्वजनिक किया जाए। जिला स्तर पर हुई देरी की जांच हो और पारदर्शी तथा समयबद्ध प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए हस्तक्षेप किया जाए।

छात्र नेताओं ने किया सरकार से सीधा सवाल :

  • प्रदेश अध्यक्ष ओम वर्मा ने कहा यह मार्च किसी पार्टी या व्यक्ति का आंदोलन नहीं था। यह उन लाखों विद्यार्थियों की पुकार थी, जो बेहतर शिक्षा, समान अवसर और सुरक्षित भविष्य चाहते हैं। झारखंड सरकार को स्पष्ट संदेश मिल गया है, शिक्षा के साथ अन्याय अब बर्दाश्त नहीं होगा।
  • कार्यकारी अध्यक्ष बबलू महतो ने कहा आज की वर्तमान सरकार अगर हर अंतिम छात्र को उसकी पूर्ण छात्रवृत्ति नहीं देती है, तो यह आंदोलन एक पल के लिए भी नहीं रुकेगा। न एक छात्र छूटेगा, न एक मांग अधूरी रहने दी जाएगी। आज सत्ता मौन है, इसलिए हमारी आवाज और प्रखर होगी। यह लड़ाई छात्रवृत्ति की नहीं, न्याय, अधिकार और जवाबदेही की है।
  • प्रदेश उपाध्यक्ष ऋतुराज शाहदेव ने कहा छात्रवृत्ति कोई दया नहीं, यह हमारा अधिकार है। सरकार की चुप्पी ने लाखों विद्यार्थियों का अकादमिक वर्ष खतरे में डाल दिया है। अगर समाधान नहीं मिला तो छात्रों की आवाज और ऊंची होगी। यह लड़ाई शिक्षा बचाओ की है और इसे पूरे दमखम के साथ लड़ा जाएगा।
  • इसके अलावा देवा महतो, प्रताप सिंह, सत्यम सिंह, शुभम राणा, अमित सोनी, सक्षम झा, अमन साहू, मोहन रविदास, रवि रोशन, सौरभ यादव, कार्तिक गुप्ता, विक्की हरिवंश, राजकिशोर महतो, जमाल गद्दी, अमित यादव, दीपक महतो, प्रशांत महतो आदि नेताओं ने जनाक्रोश मार्च को सफल बनाने में योगदान दिया।

स्वत:स्फूर्त रहा आंदोलन :
संजय मेहता ने कहा छात्र आजसू का आंदोलन व्यापक तौर पर सफल रहा। आजसू पार्टी के केंद्रीय महासचिव संजय मेहता ने कहा आजसू छात्र संघ का छात्रवृति की मांग को लेकर आंदोलन व्यापक तौर पर सफल रहा। सरकार छात्रों की बातों को सुने और संज्ञान में ले। यह आंदोलन स्वतः स्फूर्त था। आजसू छात्र संघ के आह्वान पर कैंपस से छात्र स्वयं आंदोलन में सम्मिलित होने पहुंचे। इस आंदोलन ने यह साबित कर दिया कि सरकार आवेदन के जरिए किसी की बात को नहीं सुन रही। समाज के सभी वर्गों को सरकार ने सड़क पर उतरने को मजबूर कर दिया है। लाखों छात्रों की छात्रवृति को पेंडिग रखना युवा पीढ़ी को पढ़ाई से वंचित करने जैसा है। सरकार छात्र एवं युवाओं की भावनाओं को समझे। एक ओर सरकार बड़े बड़े इवेंट में खर्च कर रही है तो दूसरी ओर छात्र छात्रवृत्ति से वंचित हैं। लाखों मेधावी छात्र-छात्राओं की पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति महीनों से पेंडिंग पड़ी है। इसका सीधा मतलब है कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को उच्च शिक्षा से वंचित किया जा रहा है। वक्ताओं ने कहा एक ओर सरकार बड़े-बड़े आयोजनों, विज्ञापनों और इवेंट्स में करोड़ों रुपये पानी की तरह बहा रही है, तो दूसरी ओर छात्र छात्राएं दो वक्त की रोटी व कापी-किताब के लिए मोहताज हो रहे हैं।
Maurya News18 Ranchi.

लगातार गिर रहा राज्य का तापमान, इसी सप्ताह से बढ़ जाएगी ठिठुरन

  • राजधानी रांची समेत पूरे राज्य में ठंड का असर लगातार बढ़ता ही जा रहा है

रांची : राजधानी रांची समेत पूरे राज्य में ठंड का असर लगातार बढ़ता ही जा रहा है। रांची समेत सभी 24 जिलों में कनकनी बढ़ गई है और न्यूनतम तापमान में लगातार गिरावट आ रही है। मौसम विज्ञान केंद्र रांची द्वारा जारी पूर्वानुमान में बताया गया है कि अगले चार दिनों तक यानी 29 और 30 नवंबर की साथ साथ 1 और 2 दिसंबर तक रांची के तापमान में बढ़े बदलाव की संभावना नहीं है। इस दौरान 3 से 5 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि होगी, जिससे ठंड का असर कम होगा। पिछले 24 घंटे के मौसम की बात करें तो राज्य का मौसम शुष्क बना रहा। उत्तर पश्चिमी और निकटवर्ती मध्य भाग में शीतलहर देखने को मिली। बता दें कि उत्तर पश्चिमी दिशा से आ रही ठंडी हवा ने तापमान गिरा दिया है। राजधानी में अहले सुबह और देर रात कनकनी का असर कुछ अधिक ही बढ़ जाता है। जिस कारण रात में लोगों की आवाजाही भी सड़कों पर कम हो गई है। राज्य में सबसे अधिक अधिकतम तापमान 29.7 डिग्री गोड्डा का जबकि सबसे कम न्यूनतम तापमान 5.7 डिग्री सेल्सियस सिमडेगा का रिकार्ड किया गया। वहीं, राजधानी रांची का अधिकतम 22.4 डिग्री और न्यूनतम 8.4 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया। राज्य के अधिकांश क्षेत्रों में दिनभर पछुआ हवाएं चलने से ठंड और बढ़ गई है। सर्द हवा और कनकनी के कारण लोग सुबह से स्वेटर, जैकेट, मफलर, टोपी और ग्लब्स पहनकर बाहर निकल रहे हैं।

बंगाल की खाड़ी में चक्रवाती तूफान हो रहा है तैयार :
एक ओर जहां राजधानी रांची समेत पूरे राज्य में ठंड का असर लगातार बढ़ रहा है तो दूसरी ओर बंगाल की खाड़ी में एक और चक्रवाती तूफान तैयार हो रहा है। फिलहाल यह चक्रवाती तूफान श्रीलंका और तमिलनाडु तट पर तेजी से बढ़ रहा है। मौजूदा स्थिति के अनुसार इसके उत्तर पश्चिम की ओर बढ़ने की संभावना है। वर्तमान में मौसम विज्ञान केंद्र इस चक्रवाती तूफान पर नजर बनाकर रखा जा रहा है। हालांकि झारखंड पर इस तूफान का अधिक असर पड़ने की संभावना नहीं है और सिर्फ आंशिक बादल और तेज हवा बहने की संभावना है। 30 नवंबर को रांची में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच है और मौसम विज्ञान केंद्र रांची के अनुसार मैच के आयोजन में कोई बाधा नहीं आएगी। इसका झारखंड पर फिलहाल तो कोई असर दिखाई नहीं देता है लेकिन सब कुछ इसकी दिशा और गति पर निर्भर करेगा। इससे पहले एक और चक्रवाती तूफान बना था जिसका नाम सीनियार था। दित्वा इस वर्ष का पांचवा चक्रवातीय तूफान है। इससे पहले भी नवंबर के महीने में एक चक्रवात आ चुका है। मौसम विज्ञानी अभिषेक आनंद ने बताया कि चक्रवाती तूफान मोंथा ने दुर्गा पूजा के समय तबाही मचाई थी। मौजूदा तूफान दित्वा कितना नुकसानदायक होगा यह उसकी दिशा और गति पर निर्भर करेगा।

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सीएम हेमंत सोरेन ने 10 हजार चयनित अभ्यर्थियों को बांटा नियुक्ति पत्र

– झारखंड सरकार के एक साल पूरे होने पर समारोह आयोजित

रांची : झारखंड में हेमंत सरकार 2.0 के एक वर्ष पूरे होने के अवसर पर शुक्रवार को राजधानी रांची के मोरहाबादी मैदान में राज्यस्तरीय समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन रहे। उनके साथ राज्य सरकार के कई मंत्री और जनप्रतिनिधि भी विशेष अतिथि के तौर पर मंच पर मौजूद रहे। मंच पर वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर, स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी, ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह, कृषि एवं पशुपालन मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की सहित झामुमो के मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू, योगेंद्र प्रसाद, दीपक बिरुआ, हफिजुल हसन और चमरा लिंडा उपस्थित रहे।

भरे मैदान में आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने लगभग 10 हजार चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र सौंपे। चयनित अभ्यर्थियों में सहायक आचार्य, कीटपालक, पुलिस उपाधीक्षक (DSP), राज्य कर पदाधिकारी, काराधीक्षक, झारखंड शिक्षा सेवा से जुड़े अधिकारी सहित अन्य महत्वपूर्ण विभागों में नियुक्ति पाए युवा शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराना सरकार की शीर्ष प्राथमिकता है और आने वाले दिनों में भी विभिन्न विभागों में बड़े पैमाने पर नियुक्तियां की जाएंगी। मोरहाबादी मैदान इस दौरान युवाओं के जोश और उत्साह से सराबोर रहा।
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बिहार कला और संस्कृति के क्षेत्र में अपार संभावनाओं वाला राज्य : प्रणव कुमार

– 56वें इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ इंडिया के तीसरे दिन वेब्स फिल्म बाजार में बिहार राज्य फिल्म विकास एवं वित्त निगम का पवेलियन फिल्मकारों, कलाकारों, प्रोड्यूसर और फिल्म उद्योग से जुड़े लोगों के आकर्षण का केंद्र बना रहा

पटना : गोवा में आयोजित 56वें इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ इंडिया (56th international film festival of india) के तीसरे दिन वेब्स फिल्म बाजार में बिहार राज्य फिल्म विकास एवं वित्त निगम (कला, संस्कृति एवं युवा विभाग) का पवेलियन फिल्मकारों, कलाकारों, प्रोड्यूसर और फिल्म उद्योग से जुड़े लोगों के आकर्षण का केंद्र बना रहा है। निवेशकों ने बिहार में फिल्म उद्योग में निवेश करने में रूचि दिखाई है। इस मौके पर पेवेलियन का उद्घाटन किया गया। उद्घाटन कला, संस्कृति एवं युवा विभाग, के सचिव सह बिहार फिल्म निगम के प्रबंध निदेशक प्रणव कुमार, बिहार फिल्म निगम के महाप्रबंधक रूबी, अभिनेता मनोज जोशी, आने वाली हिंदी फीचर फिल्म ‘तिया’ के अभिनेता दर्शन कुमार, अभिनेत्री नीतू चंद्रा, अभिनेता विकास कुमार, इम्पा के अध्यक्ष अभय सिन्हा, प्रोड्यूसर सागर श्रीवास्तव, निर्देशक राव देवेंद्र सिंह आदि मौजूद रहे।

बिहार फिल्म निगम के प्रबंध निदेशक प्रणव कुमार (आईएएस) ने कहा बिहार में शूट होने वाली फिल्मों को अनुदान के तौर पर प्रोत्साहन देने का प्रावधान है। साथ ही, शूटिंग को आसान बनाने के लिए भी वन विंडो सिस्टम अपनाया गया है। बिहार कला और संस्कृति के क्षेत्र में अपार संभावनाओं वाला राज्य है और सरकार फिल्म, संस्कृति तथा रचनात्मक उद्योगों को मजबूत आधार देने के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने कहा गोवा अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव जैसे प्रतिष्ठित मंच पर बिहार की भागीदारी राज्य की सकारात्मक छवि को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुदृढ़ करती है।

उद्घाटन के बाद अभिनेता मनोज जोशी ने बिहार राज्य फिल्म विकास एवं वित्त निगम लिमिटेड और कला संस्कृति विभाग की ओर से फिल्म उद्योग को विकसित करने की पहल की सराहना की। उन्होंने कहा बिहार बहुत सुंदर है और बिहार में ही मौर्य साम्राज्य की स्थापना हुई। वहीं से भारत का विस्तार हुआ और देश संगठित रूप में सामने आया। बिहार में शूटिंग करना निश्चित रूप से हर फिल्मकार को आकर्षित करेगा। बिहार चित्रिकरण के लिए बहुत उत्तम है। उन्होंने कहा वह बिहार में फिल्म उद्योग को विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। अभिनेता दर्शन कुमार ने बिहार में शूटिंग के अनुभव को साझा करते कहा बाल्मीकि नगर में 40 दिनों तक शूटिंग हुई थी, जो किसी जन्नत से कम नहीं है। यहां के लोग काफी प्यारे हैं। उन्होंने कहा बिहार में शूटिंग देखने आने वाले लोग अनुशासित रहते थे और पूरा सहयोग करते थे। हमने बहुत बड़ा सेट लगाया था, इसलिए भी लोग उसे देखने के लिए पहुंचते थे। उन्होंने कहा बिहार में शूटिंग करने का एक फायदा यह भी है कि आपको साफ आवोहवा में रहने का मौका मिलता है। उन्होंने कहा यह लोगों का प्यार ही था कि वे हमारे लिए देशी अंडे और गाय का शुद्ध दूध लेकर आते थे। उन्होंने कहा कि बिहार में शूटिंग के दौरान जितना लोगों का प्यार मिला है, उसकी वजह से वह हर फिल्म की शूटिंग बिहार में ही करना चाहेंगे। उन्होंने कहा बिहार में खूबसूरत लोकेशन की कमी नहीं है और आने वाले समय में फिल्मकार बिहार की ओर रुख करेंगे, क्योंकि यहां प्रशासन का पूरा सहयोग मिलता है और सारी सुविधाएं भी मिल रही हैं। उन्होंने कहा आने वाले समय में बिहार में शूटिंग ही शूटिंग होगी और वह अपने साथी कलाकारों से भी बिहार में शूटिंग करने को बोल रहे हैं। मौके पर अभिनेत्री, मॉडल, फिल्म प्रोड्यूसर और थियेटर आर्टिस्ट नीतू चंद्रा ने कहा भोजपुरी, मैथिली, मगही जैसी बिहार की स्थानीय भाषाओं में बन रही फिल्मों को दर्शकों का प्यार मिलना जरूरी है। उन्होंने कहा बिहार में फिल्म उद्योग को विकसित करने के लिए बिहार के कलाकारों और फिल्मकारों को आगे आना होगा। उन्होंने कहा बिहार की स्थानीय भाषाओं में बनी फिल्मों को प्रोत्साहन देने से ही बिहार में फिल्म उद्योग का अपना वजूद कायम होगा। अभिनेता विकास कुमार ने प्रबंध निदेशक प्रणव कुमार से बिहार के फिल्म उद्योग और फिल्म नीति पर चर्चा के दौरान कहा वह अगले वर्ष बिहार से जुड़ी फिल्म की शूटिंग करने की योजना बना रहे हैं। प्रणव कुमार ने कहा कि बिहार में किसी भी विषय पर फिल्म बनाने की स्वतंत्रता है, सिर्फ ध्यान रखना है कि बिहार के बारे में जानबूझकर निगेटिव बातें न कही गई हो। तिया फिल्म के प्रोड्यूसर सागर श्रीवास्तव ने कहा कि बिहार में शूटिंग करना अपने मातृभूमि का कर्ज उतारने जैसा है। उन्होंने कहा कि फिल्म की शूटिंग करने से लेकर पैक-अप करने तक प्रशासन ने पूरा सहयोग किया है।

फिल्म के निर्देशक राव देवेंद्र सिंह ने कहा बिहार में कहानियों की कमी नहीं है। यह विविधताओं से भरा राज्य है। यहां हर तरह की फिल्मों की शूटिंग की जा सकती है। बिहार फिल्म निगम की महाप्रबंधक रूबी (IAS) ने भी बिहार फिल्म निगम के पवेलियन पहुंचे फिल्म उद्योग से जुड़े लोगों से बिहार में फिल्म उद्योग की संभावना पर चर्चा की। उन्होंने कहा बिहार में फिल्म की शूटिंग से रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं और अनुदान और सहुलियत के कारण निवेशकों का आकर्षण बढ़ा है। मौके पर इंडियन मोशन पिक्चर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन के (IMPAA) के अभय सिन्हा ने कहा कि बिहार में खूबसूरत लोकेशन हैं। पिछले साल जब बिहार में फिल्म नीति लागू हुई तब उन्हें अतिरिक्त प्रसन्नता हुई, क्योंकि वह खुद भी बिहार के पटना से हैं। उन्होंने इम्पा से जुड़े सभी प्रोड्यूसर से अपील की कि वह बिहार में अपनी फिल्म की शूटिंग की योजना बनाएं। ओटीटी प्लेटफॉर्म स्टेज के प्रतिनिधियों से मुलाकात में प्रणव कुमार ने साथ मिलकर काम करने की संभावनाओं पर चर्चा की, और आगे इस पर विस्तार से योजना बनाने की बात कही ताकि बिहार में बनने वाली फिल्मों को आसानी से रिलीज किया जा सके। बांग्ला फिल्म अमि जोखोन हेमा मालिनी और केभमैन की निर्देशक परमिता मुंशी ने बिहार में अगले साल जनवरी में सस्पेंस थ्रिलर वेब सीरिज बनाने पर सहमति जताई है। एफटीआईआई (FTII) एलुमनी और सुप्रसिद्ध फिल्म संपादक असीम सिन्हा फिल्म निगम के पेवेलियन पहुंचे। उन्होंने कहा कि बिहार में फिल्म की शूटिंग शुरू होने के बाद बिहार में पोस्ट प्रोडक्शन के अवसर भी बढ़े हैं, जिससे बड़ी संख्या में फिल्म एडिटर, साउंड डिजाइनर के साथ ही परदे के पीछे काम करने वाले सिनेमाकर्मियों के लिए नए अवसर पैदा हो रहे हैं।
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संरक्षित खेती को बढ़ावा देने के लिए 36 लाभुकों के बीच उपादान का वितरण

– मांडर एवं बेड़ो प्रखंड में उद्यानिकी प्रशिक्षण, कार्यशाला सह-उपादान वितरण कार्यक्रम का आयोजन

रांची : कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की की उपस्थिति में जिला उद्यान कार्यालय रांची द्वारा मांडर एवं बेड़ो प्रखंड में उद्यानिकी प्रशिक्षण, कार्यशाला सह-उपादान वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित मंत्री द्वारा उद्यान निदेशालय, झारखंड द्वारा संचालित उद्यान विकास योजना के अंतर्गत कुल 200 महिला लाभुकों को 30 से 40 बैग क्षमता वाले मशरूम किट तथा 40 मधुमक्खी पालक कृषकों को 20-20 मधुमक्खी बॉक्स एवं मधुमक्खी छाता (Bee Hive & Accessories) का वितरण किया गया। इसके अतिरिक्त उद्यानिकी क्षेत्र में संरक्षित खेती को बढ़ावा देने के लिए कुल 36 लाभुकों के बीच निम्नलिखित अवसंरचना आधारित इकाइयों का आवंटन किया गया।

अवसंरचना आधारित इकाइयों का किया आवंटन :

– पॉलीहाउस

– किट-रहित सब्जी उत्पादन इकाई

– बिछड़ा (Nursery) उत्पादन इकाई

– संरक्षित फूल उत्पादन के लिए शेडनेट हाउस

कार्यक्रम के दौरान मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने तथा कृषि आधारित रोजगार सृजन के लिए प्रतिबद्ध है। विशेष रूप से महिलाएं, युवा एवं कृषक समूहों को उद्यानिकी आधारित आजीविका से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है।कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसान, विभागीय पदाधिकारी, तकनीकी विशेषज्ञ एवं स्थानीय जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।
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…ताकि समुदाय स्तर पर शिशुओं और माताओं के लिए सुनिश्चित हो गुणवत्तापूर्ण सेवाएं

– शिशु संवर्द्धन विषय पर फ्रंट लाइन कर्मियों (FLWs) की क्षमता वृद्धि की दिशा में प्रखंड स्तरीय कर्मियों के साथ हुआ तीन दिवसीय प्रशिक्षण

– प्रशिक्षण के दौरान FLWs को EGF की चार-चरणीय पहचान एवं प्रबंधन प्रक्रिया आकलन, वर्गीकरण, देखभाल के स्तर का निर्धारण तथा सामुदायिक प्रबंधन का विस्तृत अभ्यास कराया गया

पूर्णिया : जिले में शिशुओं के शुरुआती छह महीनों में होने वाले आरंभिक वृद्धि अवरोध (EGF) की पहचान एवं प्रबंधन को सुदृढ़ करने के लिए 17 से 19 नवंबर तक होटल सेंटर प्वाइंट पूर्णिया में प्रखंड पूर्णिया पूर्वी के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ शरद कुमार एवं परियोजना पूर्णिया ग्रामीण के बाल विकास परियोजना पदाधिकारी रूपम कुमारी की अध्यक्षता में तीन दिवसीय प्रखंड स्तरीय प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। प्रशिक्षण अंतर्गत प्रखंड पूर्णिया पूर्वी के परियोजना पूर्णिया ग्रामीण के चयनित 25 आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, 25 आशा सहित आशा फैसिलिटेटर, महिला पर्यवेक्षिका की क्षमता को विकसित करना था ताकि समुदाय स्तर पर शिशुओं और माताओं के लिए गुणवत्तापूर्ण सेवाएं सुनिश्चित की जा सके। यह प्रशिक्षण यूनिसेफ बिहार के तकनीकी सहयोग से आयोजित किया गया, जिसमें पटना से वृंदा, अनूप तथा पूर्णिया से पोषण समन्वयक निधि भारती ने प्रमुख संसाधन व्यक्ति के रूप में सत्रों का संचालन किया।

तीनों प्रशिक्षकों ने प्रतिभागियों को शिशु पोषण, वृद्धि निगरानी, स्तनपान परामर्श, जोखिम पहचान तथा समुदाय-आधारित प्रबंधन प्रक्रियाओं पर व्यापक मार्गदर्शन प्रदान किया। अनिमिया मुक्त भारत समन्वयक शुभम गुप्ता एवं ईजीएफ सलाहकार मो. शब्बीर के सहयोग से प्रशिक्षण कार्यक्रम हुआ। प्रशिक्षण में प्रतिभागियों को बताया गया कि बिहार में जन्म के शुरुआती महीनों में कम वजन, समय से पहले जन्म, संक्रमण तथा अनुचित स्तनपान जैसी वजहों से बड़ी संख्या में शिशु विकास की दृष्टि से जोखिम में रहते हैं।

विशेषज्ञों ने रेखांकित किया कि पहले छह माह शिशु की शारीरिक, मानसिक और संज्ञानात्मक वृद्धि का सर्वाधिक संवेदनशील समय है, इसलिए इस अवधि में किसी भी प्रकार की पोषण-संबंधी कमी लंबे समय तक प्रभाव डाल सकती है। प्रशिक्षण के दौरान FLWs को EGF की चार-चरणीय पहचान एवं प्रबंधन प्रक्रिया आकलन, वर्गीकरण, देखभाल के स्तर का निर्धारण तथा सामुदायिक प्रबंधन का अभ्यास कराया गया। 6 कदम जैसे महत्वपूर्ण व्यवहारिक मॉड्यूल्स के माध्यम से यह समझाया गया कि समय पर पहचान, उचित परामर्श, नियमित फॉलोअप और समुदाय व स्वास्थ्य प्रणाली के बीच मजबूत समन्वय से अधिकांश शिशुओं की स्थिति घर-परिवार में रहते हुए भी सुधारी जा सकती है।

प्रतिभागियों को विशेष रूप से यह भी प्रशिक्षित किया गया कि जन्म के बाद 1 सप्ताह से लेकर 6 माह तक की निर्धारित विज़िट में किन संकेतों पर ध्यान देना है, स्तनपान की सही पोजिशनिंग, अटेचमेंट और आवृत्ति का आकलन कैसे करें, कब शिशु को गंभीर जोखिम की श्रेणी में रखकर SNCU/NRC रेफर करना आवश्यक है, तथा कैसे Poshan Tracker, M-ASHA और VHSND जैसे प्लेटफॉर्म का उपयोग करते हुए ट्रैकिंग और समन्वय को मजबूत किया जा सकता है। इस अवसर पर यूनिसेफ प्रतिनिधियों ने कहा यह प्रशिक्षण न केवल FLWs को तकनीकी कौशल प्रदान करता है बल्कि उन्हें परिवारों के साथ प्रभावी संचार स्थापित करने और व्यवहार परिवर्तन को प्रोत्साहित करने में भी सक्षम बनाता है।

कार्यक्रम से स्वास्थ्य और ICDS तंत्र के बीच तालमेल बढ़ेगा तथा कम वजन के साथ जन्मे शिशुओं पर लक्षित सेवाओं की गुणवत्ता बेहतर होगी। तीन दिवसीय प्रशिक्षण में प्रतिभागियों ने विभिन्न, केस-स्टडी, समूह अभ्यास और डेमो सत्रों के माध्यम से वास्तविक परिस्थितियों में उपयोगी कौशल अर्जित किए। प्रशिक्षण के समापन पर प्रतिभागियों ने इसे अपने कार्य में उपयोगी बताते हुए कहा कि इससे बच्चों की वृद्धि एवं पोषण स्थिति में सुधार लाने में निश्चित रूप से सकारात्मक परिणाम मिलेंगे।
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