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यूपी, बिहार और झारखंड नहीं…जाने छत्तीसगढ़ के किस शहर में बना है एशिया का सबसे बड़ा स्थायी छठ घाट…

  • – गजब है खूबसूरती, एक लाख से ज्यादा जुटेंगे छठव्रती

रांची : बिहार, झारखंड या उत्तर प्रदेश नहीं छत्तीसगढ़ में बना है एशिया का सबसे बड़ा स्थायी छठ घाट…। बिहार और झारखंड के अलावा देश के अलग-अलग हिस्सों में भी छठ महापर्व की धूम देखी जा रही है। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में भी इसे लेकर उत्साह और उमंग का वातावरण है। छठ के इस अवसर पर छठ घाट का विशेष महत्व होता है। लिहाजा बिलासपुर में बना छठ घाट इस बार खूब सुर्खियां बटोर रहा है। दरअसल, अरपा नदी के तट पर बना छठ घाट भारत के सबसे बड़े स्थाई छठ घाटों में से एक माना जा रहा है। इस घाट की कुल लंबाई लगभग एक किलोमीटर है और यह स्थान छठ पूजा के आयोजन के लिए विशेष रूप से तैयार किया गया है।
बिलासपुर में इस वर्ष भी 50 हजार से ज्यादा छठव्रतियों के छठ घाट में पूजा में शामिल होने की संभावना है, वहीं उनके साथ आने वाले स्वजनों की संख्या भी काफी अधिक आंकी जा रही है। अरपा नदी के तट को रंग बिरंगे झालरों से सजाया गया है, जिसकी खूबसूरती देखते ही बन रही है। वहीं सुरक्षा के मद्देनजर छठ घाट में सीसीटीवी कैमरे से निगरानी की जाएगी। अरपा नदी के तट पर इस घाट का निर्माण पिछले कुछ वर्षों में जिला प्रशासन और भोजपुरी समाज के द्वारा किया गया है। भोजपुरी समाज इस परंपरा को बड़े ही भव्य तरीके से मनाता है। यहां हर वर्ष छठ पूजा के अवसर पर हजारों श्रद्धालु आते हैं, जो सूर्य देव की आराधना के लिए एकत्रित होते हैं।

24 वर्षों से इस घाट पर हो रही है छठ पूजा :
पिछले 24 वर्षों से भोजपुरी समाज के लोगों द्वारा इस घाट को लगातार पूजा स्थल के रूप में उपयोग किया जा रहा है। छठ पूजा की लोकप्रियता और महत्ता को देखते हुए इस घाट का प्रबंधन और व्यवस्था बेहद सुसंगठित होती है। छठ पूजा में श्रद्धालु सूर्योदय और सूर्यास्त के समय सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करते हैं। इस दौरान श्रद्धालु नदी में खड़े होकर पूजन करते हैं और यह दृश्य अत्यंत भव्य होता है।

सुरक्षा के माकूल इंतेजाम, सीसीटीवी से निगरानी :
इस घाट पर सुरक्षा व्यवस्था भी काफी कड़ी की गई है ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो। घाट पर सफाई व्यवस्था, चिकित्सा सहायता और अन्य आवश्यक सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा जाता है। यहां के छठ महोत्सव में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाता है, जो छठ पूजा को और भी आकर्षक बनाते हैं। सुरक्षा की दृष्टि से यहां सीसीटीवी कैमरे भी लगाए जाएंगे।

छठ पूजा से पहले महाआरती :
छठ पूजा से पहले भोजपुरी समाज और शहर के अन्य समाज के द्वारा अरपा नदी के तट पर महा आरती की जाती है। अरपा नदी की महाआरती को देखने के लिए शहर से हजारों की संख्या में लोग एकत्र होते हैं।

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UK में बिहार एवं झारखंड के 2000 श्रद्धालु कर रहे छठ पूजा…

  • – यूनाईटेड किंगडम में बिहार व झारखंड के लोग कर रहे सामूहिक रूप से छठ पूजा
  • रांची : यूनाईटेड किंगडम (UK) में बसे भारतीयों के लिए छठ महापर्व 2024 का आयोजन बिहारी कनेक्ट यूके संस्था लगातार तीसरे वर्ष कर रही है। आस्था के इस भव्य महापर्व को 6 से 8 नवंबर तक लंदन के हाउंस्लो के ब्रह्मर्षि आश्रम में मनाया जा रहा है। जिसमें बिहार एवं झारखंड सहित करीब 2000 से अधिक लोगों के शामिल होने की उम्‍मीद है। इस महापर्व के आयोजन का नेतृत्व हिनू रांची के निवासी कैप्टन ओम प्रकाश कर रहे हैं, जो बिहारी कनेक्ट यूके के सचिव हैं और इसकी देखरेख चेयरमैन डा. उदेश्वर सिंह, उपाध्यक्ष विजय राय, कोषाध्यक्ष राजीव सिंह और समर्पित सक्रिय सदस्यों में डा. बिरेंद्र राय, संदीप कुमार, राजेश विश्वकर्मा, कल्पना कुंदन, अभिषेक आनंद और अन्य कर रहे हैं।

संस्था ने इस समारोह की शुरुआत 2022 में की थी, जिसके माध्यम से यूके में बिहारी एवं झारखंडी समुदाय में छठ पर्व के प्रति जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया गया। पिछले दो वर्षों में इस कार्यक्रम में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिसमें भागीदारी 2000 लोगों तक पहुंच गई है। एक पूर्णत: बुक किए गए रिसार्ट में आयोजित होने वाले इस समारोह के लिए लंदन में आयोजन को लेकर प्रतिभागियों को और भी अधिक शामिल करने का लक्ष्य रखा गया है। बिहारी कनेक्ट यूके ने भक्तों की सुचारु रूप से पूजा संपन्न करने के लिए परिवहन, आवास और भोजन का इंतजाम किया है। इस वर्ष लगभग 15,000 यूरो का कुल बजट स्वैच्छिक दान के माध्यम से जुटाने की उम्मीद है, जो समुदाय की सांस्कृतिक परंपराओं को बनाए रखने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इस वर्ष 12 व्रती सामूहिक रूप से पूजा अनुष्ठान करेंगे, जिनके लिए सभी आवश्यक पूजा सामग्री जैसे कपड़े, सूप, दउरा और फल विशेष रूप से बिहार से आयात किए गए हैं क्योंकि ये सामग्रियां यूके में आसानी से उपलब्ध नहीं हैं। इस आयोजन के रसोइया उत्तम कुमार तीन दिनों तक हजारों प्रतिभागियों के लिए भोजन तैयार करने के लिए स्वेच्छिक सेवा देंगे।

बिहारी कनेक्ट यूके के निरंतर प्रयासों ने बिहारी और झारखंडी मूल के लोगों को इतना प्रेरित किया है वे अब यूके के विभिन्न हिस्सों में भी इस तरह के पूजा का आयोजन कर रहे हैं। बिहारी कनेक्ट यूके अपने इस प्रयास से गौरवान्वित महसूस कर रहा है क्योंकि इससे समुदाय और सांस्कृतिक विकास की नींव यूके में डाली गई जो लगातार मजबूत हो रहा है। बिहारी कनेक्ट यूके के मीडिया प्रभारी राजीव सिंह ने कहा कि तैयारियों और उद्देश्य के प्रति समर्पित टीम के साथ बिहारी कनेक्ट यूके न केवल सफल छठ महापर्व का आयोजन सुनिश्चित करना चाह रहा है बल्कि भविष्य के समारोहों के लिए आवश्यक पूजा सामग्री को स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कराने की दिशा में भी काम कर रहा है। जैसे-जैसे यह महापर्व निकट आ रहा है, बिहारी कनेक्ट यूके जो पूरे यूके में बिहारी एवं झारखंडी समुदाय की समृद्ध विरासत को मनाने और संरक्षित करने के लिए प्रतिबद्ध है। इस वर्ष का छठ महापर्व एक यादगार और आत्मिक समृद्धि से भरा अनुभव होने का वादा करता है, जो व्यक्तियों को विश्वास और समुदाय के आनंदमय समारोह में एक साथ लाएगा।

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बच्चों ने सुंदर संदेश के साथ बनाई रंगोली, किया मतदान का आह्वान

  • छात्र छात्राओं ने दीपावली पर्व के महत्व को तो बताया ही साथ ही छठ पर्व की भी झलक दिखाई
  • प्रभातफेरी में बच्चों ने मम्मी पापा वोट दो, आंटी अंकल वोट दो, दीदी भैया वोट दो…के लगाए नारे

रांची : संत गेब्रियल एंड मोनिका स्कूल में बुधवार को रंगोली इंटर हाउस कांप्टिशन का आयोजन किया गया। जिसमें बच्चों ने बहुत सुंदर संदेश के साथ रंगोली बनाई और अपने अभिभावकों के साथ साथ आसपास के क्षेत्रों के लोगों को भी मतदान में शामिल होने की अपील की। उन्होंने दीपावली पर्व के महत्व को तो बताया ही साथ ही छठ पर्व की भी झलक दिखाई। बच्चियों को बलात्कार से बचने का भी संदेश दिया। कोलकाता में एक डाक्टर के साथ हुए गलत कार्यों को भी अपनी रंगोली के माध्यम से श्रद्धांजलि दी। रेडिएंट और यूलान हाउस प्रथम स्थान और जीनिएल हाउस दूसरे स्थान पर रहा।

बुधवार की सुबह स्कूल के बच्चों, शिक्षक शिक्षिकाओं, प्राचार्या एवं उप प्राचार्य ने मतदान जागरूकता के लिए प्रभातफेरी निकाली। पांच किमी तक चलते हुए वोट देने और सुयोग्य उम्मीदवार का चुनाव करने तथा राज्य के विकास में अपना महत्वपूर्ण योगदान देने के लिए मम्मी पापा वोट दो, आंटी अंकल वोट दो, दीदी भैया वोट दो…के नारे लगाए। वहीं प्री नर्सरी से केजी तक के बच्चे घरौंदा और भालू, बाघ, हाथी, शेर, तोता, दीये और अन्य ढेर सारे खिलौने के साथ खेल कर अपनी दिवाली मनाई। बच्चों के बीच मिठाइयों का वितरण हुआ तथा दीपावली एवं छठ पूजा की शुभकामनाएं दी गईं।

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बच्चों ने रंगोली बनाकर और दीयों को सजाकर किया दीवाली का स्वागत

– आर्मी पब्लिक स्कूल के जूनियर विंग में छोटी दीवाली का उत्सव बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया गया

रांची : आर्मी पब्लिक स्कूल (Army Public School Ranchi) के जूनियर विंग में छोटी दीवाली का उत्सव बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन और सरस्वती वंदना से हुई। बच्चों ने रंगोली बनाकर, दीयों को सजाकर और पारंपरिक परिधान पहनकर दीवाली के इस पावन पर्व का स्वागत किया। जूनियर विंग के छात्रों ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए, जिसमें उन्होंने लोक नृत्य, गाने और नाट्य प्रस्तुतियों के माध्यम से दीपावली की महत्ता को दर्शाया। बच्चों के जोश और उत्साह ने पूरे माहौल को जीवंत कर दिया। इस अवसर पर स्कूल की हेडमिस्ट्रेस निशा राय तथा शिक्षकों ने बच्चों को पटाखों के सुरक्षित उपयोग और पर्यावरण की रक्षा का महत्व समझाया। सभी ने मिलकर दीपावली के पर्व को एक सकारात्मक संदेश के साथ मनाने का संकल्प लिया। इस कार्यक्रम में निवेदिता तिवारी झा, सुमाला, श्वेता शर्मा आदि शामिल रहे।
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IIM Ranchi : अब ए से ई ग्रेड के अधिकारियों की कौशल क्षमता का होगा विकास…

– आइआइएम रांची (IIM Ranchi) में व्यावसायिक शिष्टाचार और भावनात्मक बुद्धिमत्ता विषय पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन

रांची : आइआइएम रांची (IIM Ranchi) में व्यावसायिक शिष्टाचार और भावनात्मक बुद्धिमत्ता विषय पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसका उद्देश्य ए से ई ग्रेड के अधिकारियों के कौशल को बढ़ाना है। यह पहल कार्पोरेट क्षेत्र में व्यावसायिक विकास को बढ़ावा देने के लिए आइआइएम रांची की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। कार्यक्रम की शुरुआत कार्यक्रम निदेशक प्रो. अंगशुमन हजारिका के स्वागत भाषण से हुई। प्रतिभागियों का पारंपरिक दीप प्रज्ज्वलन और ज्ञान और बुद्धि की खोज का प्रतीक सरस्वती वंदना के साथ स्वागत किया गया। उद्घाटन समारोह में इंडियन आयल कार्पोरेशन लिमिटेड के बिहार और झारखंड के कार्यकारी निदेशक और राज्य प्रमुख संजीव कुमार चौधरी का स्वागत किया गया। एग्जीक्यूटिव एजुकेशन सेंटर के डीन प्रो. अमित सचान ने आज के प्रतिस्पर्द्धी माहौल में साफ्ट स्किल्स के महत्व पर जोर दिया। आइओसीएल के मानव संसाधन के महाप्रबंधक कमलेश राय ने भी उपस्थित लोगों को संबोधित किया और चर्चा की कि संगठनात्मक सफलता के लिए प्रभावी संचार और भावनात्मक बुद्धिमत्ता कितनी महत्वपूर्ण है। आइआइएम रांची के निदेशक प्रो. दीपक कुमार श्रीवास्तव ने नैतिक नेतृत्व और पेशेवर उत्कृष्टता के लिए संस्थान के समर्पण को मजबूत किया। प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य अधिकारियों को उनकी भूमिकाओं में उत्कृष्टता प्राप्त करने और अपने संगठनों में सकारात्मक योगदान देने के लिए आवश्यक कौशल से लैस करना है।
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एनएन सिन्हा बने नोबा जीएसआर (NOBA GSR) के अध्यक्ष, राजेश मिश्रा उपाध्यक्ष

– नोबा जीएसआर के प्रतिष्ठित अध्यक्ष रमेश चंद्र मिश्रा का हाल ही में आकस्मिक निधन हो गया

– उनके असामयिक निधन के बाद संगठन की नेतृत्व संरचना में बदलाव किए गए हैं

रांची : नेतरहाट आवासीय विद्यालय के पूर्ववर्ती छात्रों की एक प्रमुख गैर-लाभकारी संस्था नोबा जीएसआर (NOBA GSR) जो महिलाओं को सशक्त बनाने और मासिक धर्म स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए समर्पित है, की नई कार्यपालिका टीम की घोषणा की गई। नोबा जीएसआर के प्रतिष्ठित अध्यक्ष रमेश चंद्र मिश्रा का हाल ही में आकस्मिक निधन हो गया। उनके असामयिक निधन के बाद संगठन की नेतृत्व संरचना में बदलाव किए गए हैं। कार्यकारिणी और निदेशक मंडल की बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि वर्तमान उपाध्यक्ष नागेंद्र नाथ सिन्हा अध्यक्ष पद को संभालेंगे।

नागेंद्र नाथ सिन्हा 1987 बैच के झारखंड कैडर के आइएएस अधिकारी हैं। हाल ही में भारतीय सरकार के इस्पात सचिव पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। उनका अनुभव और मार्गदर्शन नोबा जीसीआर के उद्देश्यों को और मजबूती प्रदान करेगा। साथ ही राजेश चंद्र मिश्रा को सर्वसम्मति से नया उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। राजेश चंद्र मिश्रा विद्या विहार इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलाजी पूर्णिया के अध्यक्ष हैं, ने उपाध्यक्ष का पदभार संभालने पर सहमति दी है और अपने पिता रमेश चंद्र मिश्रा की विरासत को आगे बढ़ाने का वादा किया।

राजेश मिश्रा पूर्व से ही सामाजिक कार्यों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं, संगठन के विभिन्न सामाजिक कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान देंगे। पूरा नेतरहाट परिवार रमेश चंद्र मिश्रा की अद्वितीय सेवाओं को सदैव याद रखेगा और उनके दिखाए मार्ग पर चलते हुए समाज और मानवता के लिए अपना कार्य जारी रखेगा। शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियों में 1996 में विद्या विहार रेजिडेंशियल स्कूल की स्थापना और 2009 में विद्या विहार इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलाजी की स्थापना शामिल हैं। उनकी दृष्टि और नेतृत्व ने इन संस्थानों को उच्च मानकों तक पहुंचाया है। नई टीम की जानकारी देते हुए को-फाउंडर विकास रंजन ने बताया नोबा जीएसआर ने अब तक 650 से ज्यादा सरकारी विद्यालयों में सेनेटरी पैड वेंडिंग मशीन लगाई है। जिससे एक लाख से ज्यादा बच्चियां लाभान्वित हो रही हैं। विगत कुछ महीनों में न केवल बिहार एवं झारखंड बल्कि कर्नाटक, गुजरात, बंगाल, तेलंगाना, महाराष्ट्र राज्यों के भी सुदूर क्षेत्रों में संगिनी मशीन लगाई गई है। विकास ने बताया हमारी टीम दृढ़प्रतिज्ञ है, हर बच्ची एवं महिलाओं को साफ सुथरी माहवारी व्यवस्था प्रदान करना।
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नवरात्रि पर गार्गी गृहिणी की हुई शुरुआत, महिलाओं को बिजनेस का मिला बड़ा प्लेटफार्म

इस मौके पर सांस्कृतिक संध्या कार्यक्रम भी आयोजित, नृत्य, गरबा उल्लास के साथ मनाया गया

लेट्स इंस्पायर बिहार मिशन के संस्थापक आईपीएस विकास वैभव ने गार्गी गृहिणी का किया उदघाटन

पटना: लेट्स इंस्पायर बिहार गार्गी अध्याय की ओर से नवरात्रि के अवसर पर सांस्कृतिक संध्या कार्यक्रम आयोजित किया गया । बीडी पब्लिक स्कूल परिसर में गार्गी अध्याय से जुड़ी महिलाएं जुटी और उल्लास के साथ आयोजन हुआ।
इस मौके पर लेट्स इंस्पायर बिहार मिशन के संस्थापक आईपीएस विकास वैभव बतौर मुख्य अतिथि भी मौजूद रहे.

कार्यक्रम की शुरुआत गार्गी गृहिणी के उदघाटन से हुआ । आईपीएस विकास वैभव ने गार्गी गृहिणी का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलित कर किया । इस दौरान उत्पाद बिक्री की शुरुआत गार्गी गृहिणी निम्मी झा के द्वारा बनाई गई सामग्री से हुआ।
आपको बता दें कि गार्गी गृहिणी का मुख्य उद्देश्य बिहार के सुदूर इलाके में महिलाओं के जरिए बनाए गए सभी प्रकार के उत्पाद ऑनलाइन प्लेटफार्म पर भी उपलब्ध होंगे। यहां से गार्गी गृहिणी का कोई भी उत्पाद खरीदा जा सकेगा। यानी बिहार की घरेलू महिलाओं को बिजनेस करने का एक बड़ा अवसर मिलेगा ।

उदघाटन के मौके पर डॉ प्रीति बाला डॉ रूपश्री डॉ बी प्रियम , श्रीमति निशा मदन झा, नेहा सिंह, नम्रता कुमारी, निकिता अग्रवाल, करिश्मा, और अन्य सदस्य मौजूद रहे।

गार्गी प्रेरणा सम्मान अमिता सिंह, भावना शर्मा, प्रीति गौरव, सुधा सिंह को गार्गी अध्याय का पटना जिले मे विस्तार के लिए दिया गया। बेस्ट ट्रेडिशन डांडिया और गरबा लुक के लिए बिन्नी बाला, पितमा सिंहा और विनीता को पुरूस्कार दिया गया। भजन, नृत्य और गरबा भी किया गया।
सभी महिलाएं और युवतियों ने इस कार्यक्रम का आनंद उठाया।

गार्गी सांस्कृतिक संध्या कार्यक्रम की एक झलक

पटना से मौर्य न्यूज़ 18 डॉट कॉम की रिपोर्ट

बिहार की Community Radio और DNDi ने कालाजार, डेंगू और फाइलेरिया से बचाव पर की चर्चा

पटना के होटल मौर्य में उपेक्षित बीमारियो (Neglected Diseases) पर कार्यशाला

विशेषज्ञ चिकित्सकों ने कहा, गांव-गांव में जागरूकता जरूरी, बीमारी छुपाएं नहीं, बताएं

Patna, mauryanews18.com

दिनांक 30 सितम्बर को पटना के होटल मौर्या मे DNDi ,नई दिल्ली और सुप्रामेंटल फ़ाउंडेशन ,पटना के द्वारा बिहार राज्य में अवस्थित दस सामुदायिक रेडियो स्टेशन के प्रतिनिधिओ के साथ उपेक्षित बीमारियो (Neglected Diseases) जिसमे काला ज़ार , डेंगू और फाइलेरिया पर दिनभर की एक कार्यशाला आयोजित की गई ।

कार्यशाला का उद्देश्य काला ज़ार , डेंगू और फाइलेरिया जैसी जानलेवा बीमारियो से समुदाय के लोगो को सतर्क और सावधान करने के लिए जागरूकता सामाग्री का निर्माण करना था । इस कार्यशाला मे दस सामुदायिक रेडियो स्टेशन के करीब 20 प्रतिनिधिओ ने हिस्सा लिया ।

DNDi की शिखा मल्लिल ने कार्यशाला की शुरुआत में प्रतिभागियो को बताया कि ये संस्था उपेक्षित बीमारियो के लिए दवाइया बनाने का काम करती है जो लोगो को कम दामो मे और खाने में सरल और सुरक्षित है जबकि सुप्रामेंटल फ़ाउंडेशन के निदेशक राजेश कुमार ने इन बीमारियो को खत्म करने मे सामुदायिक रेडियो और इस तरह के कार्यशालाओ की भूमिका पर अपने विचार रखे ।

कार्यशाला मे राष्ट्रीय स्तर की पत्रकार निधि जमवाल, ने इस बात का उल्लेख किया कि सामुदायिक रेडियो, सामुदायिक पत्रकार और विशेष आलेख प्रस्तोता मिल कर इन उपेक्षित बीमारियो के लिए जागरूकता सामाग्री और कार्यनीति का निर्माण कैसे करे ।


कार्यशाला में आये अलग अलग बीमारियो के विशेषज्ञो ने अपनी राय रखी । कालाजार पर RMRI पटना के डॉ रौशन टोप्नों , डेंगू पर AIIMS पटना के डॉ महेंद्र एम और फाइलेलिया पर फाइलेरिया बीमारी के विशेषज्ञ LEPRA के राज्य समन्वयक डॉ रजनी कान्त सिंह ने कार्यशाला मे आये प्रतिभागियो को जानकारी दी ।


सामुदायिक रेडियो प्रतिनिधियों ने जागरूकता सामाग्री का निर्माण किया और जिसे लोगो को जागरूक करने के लिए जन जन तक पहुचाया जायेगा ।

ज्ञात हो कि सामुदायिक रेडियो प्रतिनिधियों के साथ बिहार मे इस तरह की ये पहली कार्यशाला है जबकि सामुदायिक रेडियो का सफर भारत में 2004 से ही शुरू हुआ ।
ज्ञात हो कि सामुदायिक रेडियो प्रतिनिधियों के साथ बिहार मे इस तरह की ये पहली कार्यशाला है

Delisting बहुत आवश्यक, इसलिए मैं बार-बार आ रहा हूं झारखंड…जानिए किसने कहा…

  • जनजाति सुरक्षा मंच के प्रांतीय कार्यालय आरोग्य भवन बरियातू में प्रदेश टोली और जिला टोली की बैठक हुई

रांची : जनजाति सुरक्षा मंच के प्रांतीय कार्यालय आरोग्य भवन बरियातू में प्रदेश टोली और जिला टोली की बैठक हुई। बैठक में मुख्य अतिथि के रूप में जनजाति सुरक्षा मंच के राष्ट्रीय संयोजक गणेश राम भगत उपस्थित हुए। अतिथि के रूप में पंचायती राज्य विभाग के निदेशक निशा उरांव शामिल हुईं। गणेश राम भगत ने कहा डिलिस्टिंग होना बहुत आवश्यक है इसलिए मैं बार-बार झारखंड आ रहा हूं। झारखंड में शीघ्र ही डिलिस्टिक का आंदोलन करूंगा। कहा कि जनजातियों के महिलाएं अन्य धर्म के पुरुषों से शादी कर लेते हैं और उस महिला के जाति प्रमाण पत्र के आधार पर जमीन, जगह, नौकरी, संवैधानिक अधिकार जैसे एकल पद वार्ड पार्षद, मुखिया, पंचायत समिति, सदस्य, जिला परिषद प्रमुख पर काबिज होकर आदिवासियों का हक छीन रहे हैं। इसके लिए वह सुप्रीम कोर्ट में पीआइएल दर्ज करेंगे।

भगवान बिरसा मुंडा, जतरा टाना भगत, वीर बुधु भगत, सिद्धो कान्हू, फूलो झानो, रानी दुर्गावती व सैकड़ों जनजाति वीरों ने देश को आजाद करने के लिए आंदोलन किया था। अब हमें डिलिस्टिंग को लेकर आंदोलन करना है। बैठक में जनजाति सुरक्षा मंच के प्रवक्ता मेघा उरांव, मीडिया प्रभारी सोमा उरांव, राजू उरांव, रवि प्रकाश उरांव, लक्ष्मी बारला, छत्रपति बड़ाईक, हिंदुवा उरांव ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम में जयमंत्री उरांव, विश्वकर्मा पाहन, डा. बूटन महली, मनोज भगत, जगन्नाथ भगत, विशु उरांव, दुर्गा उरांव, छोटे राय मुंडा, परांगना मरांडी, देवनंदन सिंह, तुलसी प्रसाद गुप्ता, अर्जुन राम, प्रदीप टोप्पो समेत अन्य उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन जनजाति सुरक्षा मंच के झारखंड बिहार के संयोजक संदीप उरांव एवं धन्यवाद ज्ञापन महिला प्रमुख अंजली लकड़ा ने किया।

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अच्छे विचार…जीवन में सांस्कृतिक और सामाजिक मूल्यों का है विशेष महत्व : प्राचार्य

मनुष्य इस सुंदर सृष्टि का श्रेष्ठ प्राणी, वह समाज का अभिन्न अंग

हम सबका कर्तव्य है कि हम अपने बच्चों को देश की उज्ज्वल संस्कृति से अवगत करवाकर उन्हें अपनी संस्कृति से प्रेम करना सिखाएं

रांची : मनुष्य इस सुंदर सृष्टि का श्रेष्ठ प्राणी है। वह समाज का अभिन्न अंग है। वह बचपन से ही अपने परिवार तथा आसपास की दुनिया अर्थात अपने समाज को देखकर बड़ा होता है। जहां एक ओर वह अपने पारिवारिक संस्कारों को जाने अनजाने ग्रहण करता चला जाता है, वहीं अपने समाज से भी प्रभावित होता है। किसी के जीवन में सांस्कृतिक तथा सामाजिक मूल्यों का बराबर महत्व होता है। ये विचार एसआर डीएवी पुंदाग रांची के प्राचार्य संजीत कुमार मिश्रा ने प्रकट किए। उन्होंने कहा कि आज विज्ञान तथा इंटरनेट के युग में पूरी दुनिया सिमटकर मोबाइल के एक क्लिक पर आ गई है। किशोरावस्था बचपन तथा युवावस्था के बीच की वह अवस्था है, जिसमें मनुष्य नाना प्रकार की शंकाओं से घिरा रहता है। यह उसके शारीरिक तथा मानसिक विकास का दौर होता है। मानसिक रूप से अपरिपक्व होने के कारण अनेक विषयों को वह ठीक से नहीं समझ पाता, दूसरी ओर वह अपने विचार भी अधिकतर अपने समकक्ष किशोरों से ही साझा करता है, जो उनका मार्गदर्शन भी ठीक से नहीं कर पाते। ऐसे में उसके परिवार तथा शिक्षकों का उत्तरदायित्व होता है कि वे उन किशोरों का विश्वास हासिल करें, उनकी समस्याओं को न केवल धैर्यपूर्वक सुनें बल्कि उन्हें उचित सलाह भी दें। सबसे आवश्यक है उसमें सांस्कृतिक चेतना उत्पन्न करवाना। उनके मन में अपनी संस्कृति के प्रति प्रेम पैदा करना। जिस प्रकार एक पेड़ अपने जड़ से अलग होकर नहीं रह सकता, विकास नहीं कर सकता, वैसे ही कोई मनुष्य भी अपनी संस्कृति से अलग होकर विकास नहीं कर सकता।इसलिए हम सबका कर्तव्य है कि हम अपने बच्चों को देश की उज्ज्वल संस्कृति से अवगत करवाकर उन्हें अपनी संस्कृति से प्रेम करना सिखाएं। उन्हें अपनी संस्कृति से जोड़ें। उन्हें बताएं कि किस प्रकार हम बाकी दुनिया से अलग और श्रेष्ठ हैं। बाकी दुनिया अब हमारे संस्कारों की कायल होती जा रही है एवं उन्हें दिल खोलकर अपना भी रही है। जैसे सुस्वास्थ्य के लिए योगाभ्यास करना, ध्यान लगाना, मोटे अनाजों का सेवन करना, परिवार के साथ समय व्यतीत करना आदि। कहते हैं कि बच्चे की पहली पाठशाला घर है और वहां माता पिता गुरु की भूमिका निभाते हैं। न केवल माता पिता बल्कि परिवार व समाज से भी बच्चा बहुत कुछ सीख कर बड़ा होता है। उसके हृदय में अपने संस्कारों के प्रति अभिमान भरने का काम भी उसके परिवार की पहली जिम्मेदारी है। जैसे जैसे बच्चा बड़ा होता है, उसकी सोच समझ विकसित होती है। वह शारीरिक तथा मानसिक रूप से परिपक्व होता चला जाता है। किशोरावस्था की सीख उसके भविष्य का आधार होती है।इसलिए किशोरावस्था में ही उसे अपनी संस्कृति के प्रति जागरूक करना होगा, उसे अपनी संस्कृति से प्रेम करना सिखाना होगा, तभी वह वैश्वीकरण की दुनिया में स्वयं को समायोजित कर पाएगा, अन्यथा वह हीन भावना का शिकार हो सकता है। आज के युवाओं की सबसे बड़ी समस्या यह है कि वे पाश्चात्य संस्कृति की चपेट में आते जा रहे हैं, जो कि हमारे देश के लिए बिल्कुल अच्छा नहीं है। एक तरफ दुनिया के कई विकसित देश हमारी संस्कृति की प्रशंसा कर उसे अपना रहे हैं, हमारे अपने देश के युवा उनसे दूर होते जा रहे हैं। इस समस्या का एक मात्र समाधान यही है कि हम अपने बच्चों को बचपन से ही सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा बनाएं, उन्हें अपनी संस्कृति की सराहना करना सिखाएं। इससे उनमें आत्मविश्वास बढ़ेगा। वे भारतीय मूल्यों के साथ वैश्वीकरण की दुनिया में पैर जमाएगा और सन्मार्ग का पथिक बनेंगे। ऐसे युवा ही विश्व में भारत का नाम ऊंचा रखेंगे, दुनिया के प्रभाव में न आकर दुनिया पर अपना प्रभाव जमाएंगे…।

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