– स्वच्छता ही सेवा के अंतर्गत विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन
रांची : रांची यूनिवर्सिटी (Ranchi University) की राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई द्वारा रंगोली एवं चित्रकला प्रतियोगिता आयोजन आरयू के भूगर्भ शास्त्र विभाग में एनएसएस के कार्यक्रम समन्वयक डा. ब्रजेश कुमार की अध्यक्षता में हुआ। कार्यक्रम में आरयू अंतर्गत विभिन्न विभागों के छात्र छात्राओं ने भाग लिया। कार्यक्रम में सम्मिलित प्रतिभागियों ने अपनी कला एवं प्रतिभा का परिचय दिया। प्रतियोगिता की निर्णायक मंडली में डा. चक्रधर प्रसाद महतो, डा. भारती द्विवेदी, डा. चंचल लकड़ा, डा. शिल्पी आभा खलखो, डा. कुमारी उर्वशी, अनुभव चक्रवर्ती आदि शामिल रहे।
चित्रकला प्रतियोगिता में शामिल प्रतिभागियों में प्राची मेहता, दीपाली तिर्की, अदिति तिर्की, स्वाति कुमारी (Department of English), सोमनाथ, असद अख्तर अली (ILS), गोसिया सुरैया, खुशबू कुमारी (मनोविज्ञान), उदय कर्माकर (संस्कृत), दिव्यानी साहू (IMS), प्रीति सिंह, अलबेला केरकेट्टा (वनस्पति विज्ञान), सोनाली कर्माकर, आकांक्षा रानी प्रधान, विनीता कुमारी, कमल टोप्पो, स्वप्नेश्वरी हैम्ब्रम, विवेक सुरीन, प्रीति बोइपाई, विनीत कुजूर, एनोस कुजूर, आकाश कुमार (भूगर्भ शास्त्र) शामिल रहे।
रंगोली प्रतियोगिता में शामिल प्रतिभागियों में निधि श्रीवास्तव, बिरदिया कुमारी, प्रिया कुमारी, आकांक्षा कुमारी (मनोविज्ञान), इत्ती अशोक, स्वीटी बोस, श्वेता केरकेट्टा, वैदेही वर्मा (अंग्रेजी विभाग) शामिल रहे। कार्यक्रम को सफल बनाने में एनएसएस के टीम लीडर्स में रिकेष, पुरुषोत्तम, शौर्य, रुक्मिणी, विधि, अंकित आदि का योगदान रहा। Maurya News18 Ranchi.
– सेवानिवृत्त आइएएस अधिकारी डा. सुनील कुमार सिंह की पुस्तक संथाल परगना का इतिहास का लोकार्पण किया गया
रांची : क्राउन पब्लिकेशन के द्वारा छापी गई सेवानिवृत्त आइएएस अधिकारी डा. सुनील कुमार सिंह की पुस्तक संथाल परगना का इतिहास का लोकार्पण किया गया। पुस्तक का विमोचन दुमका में संथाल परगना के आयुक्त लालचंद डाडेल और दुमका के उपायुक्त ए. दोड्डे ने किया। इस अवसर पर क्राउन पब्लिकेशन के राजेंद्र कुमार आर्य भी उपस्थित रहे। पुस्तक संताल परगना का इतिहास में प्राचीन काल से स्वतंत्रता काल तक के इतिहास को शामिल किया गया है और इसे 13 अध्यायों में विभाजित किया गया है। इसमें संथाल विद्रोह 1855 और 1857 के विद्रोह, दामिन ए कोह शासन व्यवस्था, 1919-1947 के स्वतंत्रता आंदोलन, भारत छोड़ो आंदोलन, संथाल अर्थव्यवस्था, समाज, संस्कृति, और मिशन की उत्पत्ति व प्रभाव पर विस्तृत जानकारी दी गई है। वहीं पुस्तक के माध्यम से डा. सिंह ने पहली बार संथाल परगना के सभी पहलुओं का एक साथ विवरण प्रस्तुत किया है, जो छात्राओं, शोधकर्ताओं और प्रशासकों के लिए अत्यंत ज्ञानवर्द्धक है। 426 पृष्ठों वाली इस पुस्तक का मूल्य 900 रुपये है और इसे क्राउन पब्लिकेशंस द्वारा प्रकाशित किया गया है। Maurya News18 Ranchi.
– एसएस मेमोरियल महाविद्यालय परिसर में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 पर कार्यशाला का आयोजन
रांची : एसएस मेमोरियल महाविद्यालय (SS Memorial College Ranchi) परिसर में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020) विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का संचालन प्राचार्य डा. बीपी वर्मा के मार्गदर्शन में किया गया। इसमें बड़ी संख्या में स्नातक और स्नातकोत्तर के विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। प्राचार्य ने एनईपी 2020 के महत्व की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि एनईपी 2020 में सैद्धांतिक ज्ञान के साथ-साथ बच्चों को व्यावहारिक और रोजगार परक शिक्षा पर भी जोर दिया गया है। हिंदी विभाग के विभागाध्यक्ष ने एनईपी के अंतर्गत ज्ञान परंपरा के महत्व को बताया।
कार्यशाला के मुख्य वक्ता राजनीति विज्ञान विभाग के सहायक प्राध्यापक डा. कन्हैयालाल ने एनईपी 2020 के विभिन्न बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा करते कहा रांची युनिवर्सिटी द्वारा संशोधित नई शिक्षा नीति 2020 के करिकुलम एंड क्रेडिट फ्रेमवर्क, 4 वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम में सत्र 2023-27 से लागू किया गया है। डा. कन्हैया लाल के द्वारा क्रेडिट प्वाइंट, मल्टीपल एंट्री एग्जिट सिस्टम, इंटरडिसीप्लिनरी अप्रोच, मल्टी डिसीप्लिनरी कोर्स और चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम के विभिन्न बिंदुओं जैसे इंटर्नशिप, वोकेशनल कोर्स आदि पर जानकारी दी गई। मौके पर प्रोफेसर इंचार्ज प्रो. राजेश कुजूर, डा. रंजीत कुमार, डा. जुरन सिंह मुंडा, डा. संजय कुमार सारंगी, डा. सुबास साहु, डा. त्रिभुवन कुमार शाही, डा. अभिषेक कुमार गुप्ता, डा. राजश्री इंदवार, डा. उषा कीड़ो, डा. जिज्ञासा ओझा सहित 200 से अधिक विद्यार्थी उपस्थित रहे। Maurya News18 Ranchi.
– प्रथम सूची में नामांकन की अंतिम तिथि समाप्त होने के बाद उनके नामांकन पर विचार नहीं किया जाएगा
रांची : डा. श्यामा प्रसाद मुखर्जी यूनिवर्सिटी रांची (DSPMU Ranchi) के स्नातकोत्तर इतिहास विभाग के सत्र 2024-26 के दो वर्षीय स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम में नामांकन के लिए प्रथम सूची जारी कर दी गई है। इसके तहत ओपन या सामान्य श्रेणी में कट आफ मार्क्स 68.17 प्रतिशत, अनुसूचित जनजाति श्रेणी में 64.11 प्रतिशत, अनुसूचित जाति में 54.18 प्रतिशत, ओबीसी 1 में 65.68 प्रतिशत और ओबीसी 2 श्रेणी में 60 प्रतिशत अंक रखा गया है। वहीं ईडब्ल्यूएस श्रेणी में 55.44 प्रतिशत अंक नामांकन के लिए निर्धारित किया गया है। वहीं स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम में नामांकन की तिथि 28 सितंबर से 1 अक्टूबर तक निर्धारित की गई है। प्रथम सूची में चयनित विद्यार्थियों को उल्लेखित तिथि तक प्रत्येक कार्य दिवस के दिन सुबह 11 बजे से लेकर 2:30 बजे तक अपने सभी मूल प्रमाणपत्रों और कागजातों के साथ डीएसपीएमयू के इतिहास विभाग में नामांकन करा सकते हैं। वहीं, प्रथम सूची में नामांकन की अंतिम तिथि समाप्त होने के बाद उनके नामांकन पर विचार नहीं किया जाएगा। Maurya News18 Ranchi.
शहर के किशोरगंज स्थित 1920 में स्थापित महाविद्यालय में प्रभारी प्राचार्य व एकमात्र संस्कृत शिक्षक के भरोसे 100 छात्र छात्राओं की चल रही है पढ़ाई
रांची : एक ओर जहां राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में भारतीय ज्ञान प्रणाली को बढ़ावा देने की बात कही जा रही है तो दूसरी ओर इस प्रणाली की जिस विषय से शुरुआत होती है उसकी पढ़ाई को नजरअंदाज किया जा रहा है। हम बात कर रहे हैं देवभाषा संस्कृत की। वर्ष 2000 में राज्य गठन के बाद से अब तक झारखंड सरकार ने एक अदद संस्कृत युनिवर्सिटी की स्थापना तक नहीं कर पाई है। जिस कारण रांची, देवघर और चाईबासा में संचालित संस्कृत महाविद्यालयों में न तो इंफ्रास्ट्रक्चर को डेवलप किया जा सका है और न ही शिक्षकों और कर्मियों की नियुक्ति की गई है। लिहाजा, पढ़ाई बाधित है और आनन फानन के सहारे आचार्य की डिग्री बांटी जा रही है। शहर के किशोरगंज स्थित राजकीय संस्कृत महाविद्यालय की कमोबेश यही स्थिति है। यहां एक प्राचार्य के अलावे एकमात्र शिक्षक के भरोसे 100 छात्र छात्राओं को संस्कृत भाषा की शिक्षा दी जा रही है। जबकि इस महाविद्यालय की स्थापना वर्ष 1920 में हुई थी।
बताया गया कि किसी जमाने में यह महाविद्यालय समृद्ध हुआ करता था और वर्तमान में स्थिति यह है कि इसकी संबद्धता रांची यूनिवर्सिटी या फिर डा. श्यामा प्रसाद मुखर्जी यूनिवर्सिटी रांची से न होकर विनोबा भावे यूनिवर्सिटी हजारीबाग से है। आलम यह है कि देवघर और चाईबासा स्थित संस्कृत महाविद्यालयों की भी संबद्धता विनोबा भावे युनिवर्सिटी हजारीबाग से ही है। बार बार मांग पत्र सौंपे जाने के बाद भी न तो राजधानी में संस्कृत विश्वविद्यालय की स्थापना हो सकी और न ही शहर के एकमात्र संस्कृत महाविद्यालय को कोई सुविधा ही मिल पाई है। यद्यपि 27 अगस्त 2023 को जनपद संस्कृत सम्मेलन में सात सूत्रीय मांग पत्र से सरकार का ध्यान आकृष्ट तो कराया गया लेकिन फलाफल कुछ भी हासिल नहीं हो सका है।
इन विषयों की होती है पढ़ाई : राजकीय संस्कृत महाविद्यालय में संस्कृत के साथ साथ वेद, साहित्य, व्याकरण, ज्योतिष, दर्शन आनर्स की डिग्री दी जाती है जबकि आवश्यक विषयों में हिंदी, इतिहास और अंग्रेजी भाषा की भी पढ़ाई होती है। इन विषयों को पढ़ाने के लिए प्राचार्य के अलावे सिर्फ संस्कृत भाषा के ही प्राध्यापक हैं। जो कि सरकारी व्यवस्था की पोल खोलती नजर आती है। राज्य गठन के बाद से एक भी शिक्षक या कर्मी की नियुक्ति नहीं हुई है, ऐसे में पूरे राज्य में आचार्य की पढ़ाई बंद हो चुकी है। आचार्य करने के लिए राज्य के छात्रों को वाराणसी, दरभंगा, इलाहाबाद का रुख करना पड़ता है। पूरे राज्य में तीन अंगीभूत संस्कृत महाविद्यालय संचालित हैं जिसमें रांची के अलावे देवघर और चाईबासा में है जबकि देवघर, गिरिडीह और डाल्टेनगंज एक-एक एफिलिएटेड कालेज हैं। यहां उप-शास्त्री तक की पढ़ाई होती है जबकि आचार्य या शोध कार्य की पढ़ाई के लिए छात्र छात्राओं को अन्य राज्यों का रुख करना पड़ता है। आलम यह है कि आज संस्कृत जैसी पौराणिक भाषा झारखंड में दम तोड़ रही है। देव भाषा संस्कृत के उन्नयन के लिए संयुक्त बिहार के समय में खोले गए स्कूल-कालेज आज बंद होने के कगार पर हैं।
इन क्षेत्रों में हैं संस्कृत की संभावनाएं :
– भाषा विकास के क्षेत्र में संस्कृत विषय से जुड़ी नौकरी
– पुराने विज्ञानी शास्त्र मसलन आयुर्वेद, योग और ज्योतिष की जानकारी के लिए संस्कृत आवश्यक
– पब्लिक सर्विस कमीशन, शिक्षक, योगाचार्य, ज्योतिषाचार्य व आयुर्वेदाचार्य की नियुक्ति में प्राथमिकता
– भारतीय ज्ञान प्रणाली को लागू करने के लिए लिए संस्कृत विशेषज्ञों की आवश्यकता
– भाषाई बारीकियों से अवगत होने के लिए संस्कृत विशेषज्ञों की आवश्यकता
– अन्य भाषाओं की त्रुटियों और गुत्थियों को सुलझाने के लिए संस्कृत विशेषज्ञों की आवश्यकता होती है।
संस्कृत शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए शिक्षकों की नियुक्ति के साथ-साथ व्यापक प्रचार प्रसार करने की आवश्यकता है। संस्कृत भाषा रोजगारपरक भाषा में से एक है, जिसका लंबा इतिहास है। मगर शैक्षणिक माहौल बनाने के लिए शिक्षकों का न होना अपने आप में हास्यास्पद स्थिति को उत्पन्न करता है। : आचार्य डा. शैलेश कुमार मिश्रा, संस्कृत प्राध्यापक, राजकीय संस्कृत महाविद्यालय, रांची।
शिक्षकों के अभाव में इस महाविद्यालय में आधा दर्जन से अधिक विषयों की पढ़ाई लगभग बंद है। यहां वेद, आगम, व्याकरण, ज्योतिष जैसे विषयों की पढ़ाई बंद है जबकि इन विषयों में शोध कार्यों की अपार संभावनाएं हैं। शिक्षकों की कमी के कारण इन विषयों में छात्र छात्राओं का नामांकन नहीं लिया जा रहा है। प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में इन विषयों के छात्र नामांकन कराने आते हैं। : डा. राम नारायण पंडित, प्राचार्य, राजकीय संस्कृत महाविद्यालय, रांची।
– आईएचएम रांची द्वारा विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर टूरिज्म एंड पीस विषय पर विभिन्न प्रतियोगिता का आयोजन
रांची : पर्यटन विभाग, झारखंड सरकार और होटल प्रबंधन संस्थान (IHM Ranchi) रांची द्वारा ऑड्रे हाउस रांची में टूरिज्म एंड पीस थीम विश्व पर्यटन दिवस हर्षोल्ल्लास के साथ आयोजित किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में सचिव पर्यटन मनोज कुमार तथा विशिष्ट अतिथियों में निदेशक पर्यटन अंजली यादव, उप निदेशक पर्यटन राजीव कुमार सिंह, अनुभाग अधिकारी गौतम मिश्रा तथा आईएचएम के प्राचार्य डॉ. भूपेश कुमार उपस्थित रहे। कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन एवं आईएचएम रांची के छात्रों द्वारा गणेश वंदना की प्रस्तुति के साथ की गई। साथ ही नागपुरी गीत, कला संस्कृति एवं पाईका नृत्य की भी प्रस्तुति दी गई।
इसके बाद स्थायी स्रोत, प्रामाणिकता और झारखंड के स्वदेशी सामग्री की भूमिका विषय पर पैनल चर्चा हुई। जिसमें झारखंड की अनूठी व्यंजनों को वैश्विक स्तर पर प्रस्तुत करना और स्वदेशी सामग्री के महत्व को उजागर करने, झारखंड की विविधता को विश्व स्तर पर प्रस्तुत करने के लिए स्थायी स्रोतों से सामग्रियों का उपयोग कर स्थानीय संसाधनों का सम्मान और संरक्षण से स्थानीय खाद्य सामग्री और व्यंजनों को वैश्विक स्तर पर लाने में मदद मिलेगी। साथ ही यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि ये प्रामाणिक और स्थायी रूप से प्राप्त हो जैसे महत्वपूर्ण निष्कर्ष सामने आए।
पैनल चर्चा में शेफ शेफ डॉ. शेफ परविंदर सिंह बाली, डॉ. शेफ सौरभ शर्मा, शेफ आशीष भासिन, शेफ गौतम चौधरी, शेफ नितिन शिंदे मुख्य प्रवक्ता रहे। शेफ बाली ने बताया एक व्यंजन ही एक राज्य की पहचान की तरह कार्य करती हैं तथा स्वास्थ्य, झारखंड राज्य की व्यंजन अपने सामग्रियों से बाकी जगह से बहुत अलग एवं श्रेष्ठ है। शेफ भसीन ने राज्य की स्थानीय व्यंजनों को अंतराष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाने की जरूरत है तथा खोए हुए व्यंजनों के विकास के लिए कार्य करने की जरूरत है, जो कि धैर्य और समर्थन से संभव है। शेफ शिंदे ने स्थानीय व्यंजन पर रेस्टोरेंट संचालन के लिए जोर दिया, यहां के व्यंजन में बहुत अधिक मात्रा में लाभदायक पदार्थ सम्मलित है जो हमारे स्वास्थ्य के लिए काफी फायदेमंद हैं।
शेफ सौरभ ने बताया जड़ वाली सब्जी में मशरूम, खुखड़ी एवं स्थानीय मिलेट मडुआ का उपयोग छोटे से बड़े स्तरों पर स्थानीय व्यंजनों का उपयोग से उच्च स्तरीय विकास किया जा सकता है। बताया हम बहुत अच्छे हैं लेकिन दुनिया को बताना भी जरूरी है, नहीं तो यहां की व्यंजन यहीं तक सीमित रह जाएगी। हम झारखंडी व्यंजनों को और अधिक प्रस्तुत करने योग्य क्यों नहीं बना सकते ताकि लोग भोजन को देखें और प्रोत्साहित करें।
शेफ बाली ने बताया लोगों को झारखंडी भोजन की प्रामाणिक प्लेटिंग को अपनाने दें और विधि को न बदलें क्योंकि तब भोजन की प्रस्तुति आधुनिक हो जाएगी और यह संस्कृति की मौलिकता को समाप्त कर देगी। इसके बाद मुख्य अतिथि द्वारा टूरिस्ट ट्रेड रेजिस्ट्रेशन पोर्टल का उद्घाटन, एडवेंचर टूरिज्म सेफ्टी दिशानिर्देश का शुभारंभ, पुस्तक बियॉन्ड द फॉरेस्ट का विमोचन तथा आईएचएम रांची द्वारा किए गए शोध जर्नल पलाश : ए जर्नल ऑफ हॉस्पिटालिटी एंड टूरिज्म सर्विस मनजेमेंट का अनावरण किया गया।
विश्व पर्यटन दिवस पर चित्रकला प्रतियोगिता, प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता, फोटोग्राफी प्रतियोगिता एवं शेफ प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। आयोजित चित्रकला प्रतियोगिता में प्रथम स्थान अंशु शर्मा, द्वितीय स्थान ऋषिका तथा तृतीय स्थान मान्या, प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में प्रथम स्थान आरभ सिंह, द्वितीय स्थान अथरव कुमार एवं शुवोजीत एवं तृतीय स्थान अमेया देवर्षि तथा झारखंड राज्य के विभिन्न स्थानीय व्यंजन आधारित मुख्य कोर्स के साथ साथ पारंपरिक तथा विशिष्ट क्षेत्रीय व्यंजन आधारित स्टार्टर एवं डेजर्ट पकाना तथा उत्कृष्ट एवं रचनात्मकता रूप से प्रस्तुति देने के लिए शेफ प्रतियोगिता में प्रामाणिकता, प्रस्तुतिकरण, प्लेटिंग, सामग्रियों एवं तत्वों का सही उपयोग जैसे मानकों का अनुपालन के आधार पर प्रेम तुषार एवं सत्यम कुमार को प्रथम स्थान, जिया रंजन एवं मनीषा कुजूर को द्वितीय स्थान, मो. अब्दुल एवं अमित कुमार को तृतीय स्थान प्राप्त हुआ तथा अनिशा केरकेट्टा एवं अंकित कुमार को सांत्वना पुरष्कार प्राप्त हुआ।
साथ ही पर्यटन का प्रचार-प्रसार, पर्यटन के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका एवं दुनिया को इसकी संभावनाएं प्रदर्शित करने के लिए मीडिया इंफ्लूएंसरस् को सम्मानित किया गया। सचिव पर्यटन मनोज कुमार द्वारा उपस्थित सभी लोगों को विश्व पर्यटन दिवस की बधाई देते हुए राज्य में पर्यटन गतिविधि पर सभी को संबोधित किया। पर्यटन निदेशक अंजली यादव द्वारा पर्यटन दिवस की शुभकानाएं दी तथा पर्यटन में आगामी त्योहार और गतिविधि को ले जागरूक किया गया।
आईएचएम के प्राचार्य डॉ. भूपेश कुमार सभी को विश्व पर्यटन दिवस की बधाई देते हुए सभी को पर्यटन के महत्व और इसके सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक प्रभावों को पर्यटन के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझने और इसे सुरक्षित तथा स्थायी बनाने में योगदान देने का अनुरोध किया। बताया कि इस वर्ष के थीम पर्यटन और स्थिरता से हमें यह समझना होगा कि पर्यटन को स्थायी बनाना आवश्यक है ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए हमारे संसाधनों का संरक्षण हो सके। हमें प्राकृतिक स्थलों, सांस्कृतिक धरोहरों और स्थानीय समुदायों की रक्षा करने पर जोर दिया।
इसके बाद आईएचएम रांची द्वारा भारत में पहला पारंपरिक खाद्य अनुसंधान यात्रा के तहत अंतरराष्ट्रीय शेफ सम्मेलन के अगले पड़ाव में झारखंड की पवन धरती पर आमंत्रित देशभर के शेफ विजय कुमार शाही, शेफ निशांत चौबे, शेफ आदित ग्रोवर, शेफ सिमरन सिंह थापर, शेफ संदीप पांडेय द्वारा स्थानीय व्यंजनों को बनाने के लिए इकट्ठा की गई पारंपरिक सामग्रियों से लाइव कूकिंग शो के माध्यम से विभिन्न स्थानीय पकवान बनाए गए।
कार्यक्रम के दौरान देबिका मंडल, सहायक प्रबंधक, झारखंड पर्यटन, पर्यटन मंत्रालय, भारत सरकार, डॉ. सुदर्शा यादव जनसंचार विभाग की प्रोफेसर, सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखंड, डॉ. मनीषा उरांव, सह-संस्थापक, द ओपन फील्ड फार्म्स और कैंपट्राइब झारखंड तथा डॉ. भूपेश कुमार, प्राचार्य, आईएचएम द्वारा पर्यटन विकास एवं संबंधित क्षेत्र विषय पर वक्तव्य प्रस्तुत किए गए। आयोजित विश्व पर्यटन दिवस का समापन आईएचएम रांची के विभागाध्यक्ष आलोक अस्वाल द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ की गया। Maurya News18 Ranchi.
– जेएसएससी सीजीएल परीक्षा पर अभ्यर्थियों द्वारा लगाए जा रहे आरोप की निष्पक्ष जांच कराए राज्य सरकार : अभिषेक शुक्ला
रांची : युवा आजसू (Yuva AJSU) के रांची महानगर संयोजक अभिषेक शुक्ला ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि 21 और 22 सितंबर को झारखंड कर्मचारी चयन आयोग द्वारा आयोजित सीजीएल परीक्षा (CGL Exam) पर सवाल उठ रहे हैं। अभ्यर्थियों के द्वारा परीक्षा प्रक्रिया पर कई गंभीर प्रश्न खड़े किए जा रहे हैं, जो कि चिंतनीय विषय है। कहा कि 22 सितंबर को आयोजित पेपर 3 की परीक्षा में सभी 60 सवाल पूर्व में आयोजित परीक्षा में भी पूछे गए थे इसमें गणित, रिजनिंग व कंप्यूटर विषय शामिल हैं। गणित विषय के सभी 20 प्रश्न एसएससी सीजीएल 2022 के प्रश्न से मेल खाता है। रिजनिंग के भी 20 सवाल एसएससी सीजीएल 2019 के प्रश्नों से मेल खाता है।वहीं कंप्यूटर विषय के भी सभी प्रश्न आइबीपीएस आरआरसी 2023 के प्रश्नों से मेल खा रहा है। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि जेएसएससी ने किस एजेंसी से प्रश्न पत्र सेट कराया। जेएसएससी राज्य की सबसे बड़ी दूसरी नौकरी उपलब्ध कराने वाली संस्था है उसके द्वारा आयोजित परीक्षा में पेपर 3 के सभी प्रश्न विगत वर्षों में हुई परीक्षाओं से मिलते जुलते हैं। राज्यभर के कई परीक्षा केंद्रों से गड़बड़ी के मामले सामने आए हैं। कहीं प्रश्न पत्र गलत बांट दिया गया तो कहीं बुकलेट का सील टूटा था। उन्होंने कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। Maurya News18 Ranchi.
– आईएचएम रांची में अंतरराष्ट्रीय शेफ सम्मेलन का पहला पड़ाव का हुआ सफल आयोजन
– आईएचएम रांची द्वारा देश में पहला पारंपरिक खाद्य अनुसंधान यात्रा का किया गया आयोजन
रांची : होटल प्रबंधन संस्थान (IHM Ranchi) रांची द्वारा 25 से 27 सितंबर तक तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय शेफ सम्मेलन 2024 का आयोजन किया गया। सम्मलेन के माध्यम से विश्व पर्यटन दिवस की पूर्व संध्या 25 और 26 सितंबर को देश का पहला पारंपरिक खाद्य अनुसंधान यात्रा का आयोजन आईएचएम से नेतरहाट तक किया गया। जिसमें देशभर के विभिन्न शहरों से शेफ झारखंड आमंत्रित किए गए। उन्हें राज्य के दूरदराज इलाकों में भ्रमण के लिए ले जाया गया, जहां स्थानीय व्यंजनों को पकाने के लिए जंगलों से सामग्रियों को इकट्टा करने से लेकर आदिवासियों के खान-पान और रहन सहन जैसे तथ्यों को दिखाया गया।
सभी शेफ नेतरहाट के लिए रवाना हुए तथा वहां पहुंचकर असुर जनजातियों से रूबरू हुए। उनके रहन-सहन एवं खानपान के तौर तरीके साझा किए गए। साथ ही नेतरहाट में स्थानीय हाट बाजार से स्थानीय व्यंजनों को बनाने के लिए पारंपरिक सामग्रियों को इकट्ठा किया तथा शाम में मैगनोलिया प्वाइंट पहुंचकर असुर जनजातियों के साथ चाय नाश्ते का लुत्फ उठाया।
इस दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन सांस्कृतिक कार्य निदेशालय झारखंड सरकार के द्वारा किया गया। जिसमें अरविंद कुमार एवं दल द्वारा नागपुरी तथा सीमंती कुमारी एवं दल द्वारा उरांव कुड़ुख लोक नृत्य एवं गीत की प्रस्तुति दी गई। सभी शेफ 27 सितंबर को विश्व पर्यटन दिवस पर आड्रे हाउस रांची में लाइव कुकिंग शो और पैनल चर्चा का आयोजन करेंगे।
संस्थान के प्राचार्य डा. भूपेश कुमार ने बताया अंतर्राष्ट्रीय शेफ सम्मेलन अभियान झारखंड की पाक विरासत को संरक्षित करने के साथ टिकाऊ और स्थानीय खाद्य प्रथाओं को बढ़ावा देंगे। बताया कि राज्य की खाद्य संस्कृति के संरक्षण में सम्मेलन एक अनूठा कदम है, जिससे पारंपरिक सामग्रियों और व्यंजनों का सदुपयोग कर समृद्ध विरासत को बनाए रखने में मदद मिलेगी।
ये रहे उपस्थित : अंतरराष्ट्रीय शेफ सम्मेलन में बतौर मुख्य शेफ डा. परविंदर सिंह बाली, शेफ विजय कुमार शाही, डा. शेफ सौरभ शर्मा, फूड फोटोग्राफर पूजा तिवारी, शेफ निशांत चौबे, शेफ आशीष भासिन, शेफ आदित ग्रोवर, शेफ गुंजन गोयला, शेफ सिमरन सिंह थापर, शेफ गौतम चौधरी, शेफ नितिन शिंदे, शेफ रामचंद्र उराव, शेफ संदीप पांडेय समेत अन्य उपस्थित रहे। Maurya News18 Ranchi.
– सीबीएसई क्लस्टर और ईस्ट जोनल टूर्नामेंट में जेवीएम श्यामली के बच्चों की रही धूम
रांची : खेल और पढ़ाई में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर जवाहर विद्या मंदिर श्यामली (JVM Shyamali) के छात्र छात्राओं ने विशेष पहचान बनाई है। जेवीएम श्यामली के छात्रों ने सीबीएसई द्वारा विभिन्न स्थानों पर आयोजित कई खेल प्रतियोगिता में बेहतरीन प्रदर्शन किया है। प्राचार्य समरजीत जाना ने उम्दा खेल प्रदर्शन करने के लिए सभी खिलाड़ियों को बधाई दी। कहा कि विद्यालय की बगिया में बच्चों का बचपन खेल द्वारा खिलता और सुरभित होता है। हमारे शारीरिक शिक्षक बच्चों में नैसर्गिक खेल प्रतिभा के विकास के लिए दिन-रात मेहनत करते हैं। हमारे खेल-शिक्षक विभिन्न कक्षाओं के गेम्स-पीरियड के दौरान बड़ी सूक्ष्मता के साथ खेल प्रतिभा की पहचान कर उन्हें निखारने का प्रयास करते हैं। क्लस्टर में मेडल लाना छात्र और शिक्षक की लगन व मेहनत दोनों को सम्मान देने के बराबर है।
बता दें कि दिल्ली पब्लिक स्कूल गया बिहार में आयोजित सीबीएसई क्लस्टर 3 बैडमिंटन चैंपियनशिप (2024-25) प्रतियोगिता में यहां के छात्रों ने अंडर 17 बालक वर्ग की सामूहिक प्रतिस्पर्द्धा में (टीम इवेंट) में अमन श्रीयुक्त, धैर्य साहू और शेष कुमार ने तीसरा स्थान प्राप्त कर कांस्य पदक प्राप्त किया। वहीं अररिया बिहार में हुए सीबीएसई ईस्ट जोन शूटिंग चैंपियनशिप प्रतियोगिता में अंडर 19 बालक वर्ग में काव्य दिव्यांश ने व्यक्तिगत स्पर्द्धा के 10 मीटर पिस्टल द्वारा अचूक निशाना साधते हुए सिल्वर मेडल प्राप्त किया।
वहीं स्कालर हाईस्कूल रामगढ़ सीबीएसई ईस्ट जोन चेस प्रतियोगिता में अंडर 14 के बालक वर्ग में कक्षा आठवीं के छात्र आदित्य झा को शानदार प्रदर्शन के लिए व्यक्तिगत रूप से सम्मानित किया गया। छात्रों के शानदार प्रदर्शन से विद्यालय के शारीरिक शिक्षक काफी खुश नजर आए। Maurya News18 Ranchi.
ग्लोबल अलायंस फार रेबीज कंट्रोल द्वारा समन्वित इस कार्यक्रम के लिए इस वर्ष का थीम रेबीज की सीमाओं को तोड़ना रखा गया है
रांची : रेबीज और इसकी रोकथाम के उपायों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से बिरसा एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी रांची (Birsa Agriculture University Ranchi) के पशुचिकित्सा एवं पशुपालन महाविद्यालय में 28 सितंबर को विश्व रेबीज दिवस मनाया जाएगा। ग्लोबल अलायंस फार रेबीज कंट्रोल द्वारा समन्वित इस कार्यक्रम के लिए इस वर्ष का थीम रेबीज की सीमाओं को तोड़ना रखा गया है। बीएयू के वेटनरी क्लीनिकल काम्पलेक्स विभाग के अध्यक्ष डा. अभिषेक कुमार ने बताया इस अवसर पर पशुओं के लिए निश्शुल्क टीकाकरण एवं दवा का वितरण होगा तथा छात्र-छात्राओं के लिए विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा। इच्छुक लोग इसके लिए निश्शुल्क रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं। रेबीज एक ट्रांस बाउंड्री बीमारी है जिससे प्रतिवर्ष दुनिया के 150 से अधिक देशों में लगभग 60 हजार लोगों की मौत हो जाती है। इनमें से 95 प्रतिशत मामले अफ्रीका और एशिया में होते हैं।