Home खबर सीयूजे के प्रोफेसर ने तैयार की लद्दाखी प्रवेशिका

सीयूजे के प्रोफेसर ने तैयार की लद्दाखी प्रवेशिका

&NewLine;<ul class&equals;"wp-block-list">&NewLine;<li>इस प्रवेशिका का उद्देश्य लद्दाखी भाषा में शिक्षण को बढ़ावा देना है<&sol;li>&NewLine;<&sol;ul>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<figure class&equals;"wp-block-image size-large"><img src&equals;"https&colon;&sol;&sol;mauryanews18&period;com&sol;wp-content&sol;uploads&sol;2024&sol;08&sol;IMG-20240801-WA0008-1024x768&period;jpg" alt&equals;"" class&equals;"wp-image-2916"&sol;><&sol;figure>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>रांची &colon; सेंट्रल युनिवर्सिटी आफ झारखंड &lpar;CUJ Jharkhand&rpar; के सुदूर पूर्व भाषा विभाग के सहायक प्रोफेसर डा&period; कोंचोक ताशी ने लद्दाखी भाषा की प्रवेशिका तैयार की है। यह प्रवेशिका शिक्षा मंत्रालय&comma; केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत मातृभाषा में पढ़ाई को केंद्र में रखकर एनसीआरटी एवं भारतीय भाषा संस्थान मैसूर के साथ मिलकर तैयार की है। इस प्रवेशिका का उद्देश्य लद्दाखी भाषा में शिक्षण को बढ़ावा देना है। डा&period; ताशी द्वारा लिखित इस प्रवेशिका के सहयोग से विद्यार्थी लद्दाखी भाषा में पढ़ाई कर पाने में सक्षम हो सकेंगे। गौरतलब है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत शिक्षा मंत्रालय द्वारा भारत के सभी भाषाओं में प्रवेशिका का लेखन कार्य करा रही है। मातृभाषा में पढ़ाई के लिए संबंधित भाषा में प्रवेशिका का होना अनिवार्य है&comma; जब विद्यार्थी मातृभाषा में पढ़ेंगे तब भाषा संरक्षित एवं संवर्द्धित भी होगी। केंद्र सरकार सभी 22 अनुसूचित भाषाओं और 99 गैर-अनुसूचित भाषाओं में प्राइमर तैयार कर रही है। लद्दाखी गैर-अनुसूचित भारतीय भाषाओं में से एक है। डा&period; ताशी को उनके इस कार्य के लिए विभाग एवं सीयूजे के शिक्षकों ने बधाई दी है।<&sol;p>&NewLine;

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