Home SPorts मुफलिसी में जी रहे झारखंड को 24 मेडल दिलाने वाले अजय…

मुफलिसी में जी रहे झारखंड को 24 मेडल दिलाने वाले अजय…

&NewLine;<ul class&equals;"wp-block-list">&NewLine;<li>अजय पिछले 12 वर्षों से राज्य के लिए खेलते आ रहे हैं<&sol;li>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<li>अब तक न तो सरकारी नौकरी मिली और न ही कोई आवास या आर्थिक सहायता<&sol;li>&NewLine;<&sol;ul>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<figure class&equals;"wp-block-image size-large"><img src&equals;"https&colon;&sol;&sol;mauryanews18&period;com&sol;wp-content&sol;uploads&sol;2025&sol;07&sol;Screenshot&lowbar;20250711-1837002-681x1024&period;png" alt&equals;"" class&equals;"wp-image-4022"&sol;><&sol;figure>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>धनबाद &lpar;बाघमारा&rpar; &colon; <&sol;strong>झारखंड को राष्ट्रीय पैरा ओलंपिक खेलों में 24 मेडल दिलाने वाले अजय कुमार पासवान आज गरीबी&comma; बेबसी और सरकारी उदासीनता के अंधेरे में जीने को मजबूर हैं। धनबाद जिले के मालकेरा 4 नंबर बस्ती के रहने वाले अजय पिछले 12 वर्षों से राज्य के लिए खेलते आ रहे हैं&comma; लेकिन अब तक न तो सरकारी नौकरी मिली&comma; न ही कोई आवास या आर्थिक सहायता। अजय ने बताया कि वह दो-दो खेल मंत्रियों से मिल चुके हैं&comma; कई बार ब्लॉक ऑफिस के चक्कर काटे&comma; लेकिन मदद सिर्फ आश्वासन तक सीमित रह गई। उनका कहना है कि अब हालत इतनी खराब हो चुकी है कि पिता टीबी से ग्रसित हैं&comma; घर की दीवारें बरसात में गिर गईं और पक्का मकान तक नहीं है। अजय का सवाल है जब मेरे जैसे खिलाड़ी को भी दिव्यांगजन आरक्षण के तहत न आवास मिल रहा&comma; न योजना का लाभ&comma; तो फिर ये नियम किसके लिए हैं। उन्होंने बाघमारा ब्लॉक में भ्रष्टाचार की ओर इशारा करते हुए कहा कि एक ही परिवार को दो-दो बार आवास मिल चुका है लेकिन उन्हें एक भी नहीं। यह मामला न केवल एक राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी की उपेक्षा का प्रतीक है बल्कि सरकारी योजनाओं और व्यवस्था की संवेदनहीनता को भी उजागर करता है।<br><strong>Maurya News18 Dhanbad&period;<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;

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