Home खबर उन्नत कृषि तकनीकों का करें प्रसार : डा. श्रीनिवासा राव

उन्नत कृषि तकनीकों का करें प्रसार : डा. श्रीनिवासा राव

&NewLine;<p>&&num;8211&semi; <strong>भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के संयुक्त निदेशक &lpar;अनुसंधान&rpar; डा&period; विश्वनाथन सी&period; एवं भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान&comma; झारखंड के विशेष कार्य पदाधिकारी डा&period; विशाल नाथ पांडेय ने भी केंद्र का भ्रमण किया<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<figure class&equals;"wp-block-image size-full"><img src&equals;"https&colon;&sol;&sol;mauryanews18&period;com&sol;wp-content&sol;uploads&sol;2025&sol;06&sol;Screenshot&lowbar;20250628-0845342&period;png" alt&equals;"" class&equals;"wp-image-3846"&sol;><&sol;figure>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>रांची &colon; <&sol;strong>भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान नई दिल्ली के निदेशक एवं कुलपति डा&period; सीएच श्रीनिवासा राव द्वारा कृषि प्रणाली का पहाड़ी एवं पठारी अनुसंधान केंद्र प्लांडु का भ्रमण एवं कृषि अनुसंधान पर मार्गदर्शन दिया गया। उनके साथ भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के संयुक्त निदेशक &lpar;अनुसंधान&rpar; डा&period; विश्वनाथन सी&period; एवं भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान&comma; झारखंड के विशेष कार्य पदाधिकारी डा&period; विशाल नाथ पांडेय ने भी केंद्र का भ्रमण किया। केंद्र के अध्यक्ष डा&period; अवनि कुमार सिंह ने अतिथियों का स्वागत करते हुए बताया कि यह केंद्र विगत 46 वर्षों से कृषि अनुसंधान के क्षेत्र में सेवारत है तथा झारखंड&comma; बिहार&comma; ओडिशा&comma; पश्चिम बंगाल&comma; असम&comma; उत्तर प्रदेश एवं मध्य प्रदेश जैसे पूर्वी राज्यों में नित नई कृषि तकनीकों एवं फल-सब्जियों की उन्नत किस्मों का विकास करते हुए कृषि अनुसंधान एवं प्रशिक्षण के क्षेत्र में कार्यशील है। केंद्र के वरीय विज्ञानी डा&period; संतोष एस&period; माली द्वारा अतिथियों के समक्ष केंद्र की उपलब्धियों एवं गतिविधियों की प्रस्तुति दी गई। <&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<figure class&equals;"wp-block-image size-full"><img src&equals;"https&colon;&sol;&sol;mauryanews18&period;com&sol;wp-content&sol;uploads&sol;2025&sol;06&sol;Screenshot&lowbar;20250628-0846012&period;png" alt&equals;"" class&equals;"wp-image-3847"&sol;><&sol;figure>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>डा&period; श्रीनिवासा ने कहा कृषि के दृष्टिकोण से झारखंड एक महत्वपूर्ण राज्य है जहां कृषि विकास की अपार संभावनाएं हैं। अनुसंधान केंद्र रांची में कृषि अनुसंधान के लिए उत्तम बुनियादी सुविधाएं और अत्यधिक कार्यक्षमता है। उन्होंने कहा केंद्र के विज्ञानी अच्छा कार्य कर रहे हैं&comma; उन्होंने अनुसंधान कार्यों को शोध पत्रों और शोध आलेखों के माध्यम से और अधिक प्रसारित करने का परामर्श दिया। डा&period; विश्वनाथन ने केंद्र की विगत वर्षों की उपलब्धियों पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने केंद्र की परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए वर्तमान परियोजनाओं के अतिरिक्त आधारभूत अनुसंधान पर आधारित कार्य करने की आवश्यकता पर बल दिया। डा&period; विशाल नाथ पांडेय ने केंद्र के विज्ञानियों से भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान की तर्ज पर संरक्षित कृषि के क्षेत्र में कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा केंद्र में आम की अनेक किस्में विकसित की गई हैं और कुछ किस्में लोकप्रिय हैं। उन्होंने कहा आम की अन्य किस्मों को भी लोकप्रिय बनाने और जन-जन तक इसकी जानकारी पहुंचाने की आवश्यकता है। डा&period; अवनि कुमार सिंह द्वारा अतिथियों के प्रति धन्यवाद ज्ञापन किया गया।<br &sol;><strong>Maurya News18 Ranchi&period;<&sol;strong><br &sol;><&sol;p>&NewLine;

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