Home खबर रासायनिक और मिलावटी भोजन से उच्च रक्तचाप, डायबिटीज, थायराइड, कोलेस्ट्राल जैसी हाे...

रासायनिक और मिलावटी भोजन से उच्च रक्तचाप, डायबिटीज, थायराइड, कोलेस्ट्राल जैसी हाे रही बीमारियां : डा. वली

&NewLine;<p>&&num;8211&semi; SBU में टाक सीरीज का हुआ आयोजन<br>&&num;8211&semi; विशेषज्ञ ने भोजन में मिलाए जाने वाले रसायनों और मिलावट के कारण हो रहे हार्मोनल असंतुलन पर अपना दिया वक्तव्य<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<figure class&equals;"wp-block-image size-full"><img src&equals;"https&colon;&sol;&sol;mauryanews18&period;com&sol;wp-content&sol;uploads&sol;2025&sol;06&sol;Screenshot&lowbar;20250601-1004182&period;png" alt&equals;"" class&equals;"wp-image-3801"&sol;><&sol;figure>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>रांची &colon;<&sol;strong> सरला बिरला यूनिवर्सिटी &lpar;Sarla Birla University Ranchi&rpar; में सुपर सैटरडे फैकल्टी एंपावरमेंट टाक सीरीज &lpar;भाग-3&rpar; के तहत खाद्य और पोषण विशेषज्ञ डा&period; खादर वली का व्याख्यान हुआ। विनिंग हेल्थ बैक टू मिलेट फूड विषय पर बोलते हुए उन्होंने भोजन में मिलाए जाने वाले रसायनों और मिलावट के कारण हो रहे हार्मोनल असंतुलन पर अपना वक्तव्य रखा। उन्होंने मिलेट्स &lpar;अनाज&rpar; और अन्य खाद्यान्न जैसे चावल&comma; गेहूं आदि के बारे में बताया। आज की कार्पोरेट फूड संस्कृति और तथाकथित हरित क्रांति पर सवाल उठाते हुए उन्होंने इस संदर्भ में विरोध के कम उठते स्वर पर भी आश्चर्य व्यक्त किया। डा&period; वली ने रासायनिक और मिलावटी खाद्यान्नों के कारण हमारे शरीर में हो रहे आंतरिक और वाह्य परिवर्तनों और रक्त की संरचना में बदलावों की बात की। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस कारण आधुनिक दौर में हमें बड़ी संख्या में उच्च रक्तचाप&comma; डायबिटीज&comma; थायराइड&comma; कोलेस्ट्राल जैसी बीमारियां देखने को मिल रही हैं। प्रत्येक दिन के अशुद्ध भोजन से शरीर और रक्त में लगातार आने वाला कार्बन डाइआक्साइड धीरे धीरे कई प्रकार की बीमारियों का कारण बन रहा है। विज्ञानी तरीके से खाद्यान्न लेने से हमारा भोजन खतरनाक बन रहा है और इससे कम उम्र के युवा भी प्रभावित हो रहे हैं। <&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<figure class&equals;"wp-block-image size-full"><img src&equals;"https&colon;&sol;&sol;mauryanews18&period;com&sol;wp-content&sol;uploads&sol;2025&sol;06&sol;Screenshot&lowbar;20250601-1004012&period;png" alt&equals;"" class&equals;"wp-image-3802"&sol;><&sol;figure>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>विज्ञानी प्रमाणों के आधार पर मिलेट्स का विशेष तौर पर उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा ये हमारे रक्त में किसी तरह का विषैला रसायन नहीं छोड़ते और हमारे शरीर का प्राकृतिक तरीके से डिटाक्सिफिकेशन करते हैं। मिलेट्स में शारीरिक ऊर्जा को बढ़ाने की पूरी विज्ञानी प्रणाली होती है। मिलेट्स भविष्य का भोजन है और हमारे पूर्वज इस ज्ञान को जानते थे। उन्होंने लोगों से अपनी जीवनशैली को बदलने और साथ ही आहार में बदलाव लाने की अपील भी की। एसबीयू के कुलपति प्रो&period; सी&period; जगन्नाथन और महानिदेशक प्रो&period; गोपाल पाठक ने सत्र को उपयोगी करार दिया और डा&period; वली से बेहतर जीवन शैली से संबंधित सवाल भी पूछे। कार्यक्रम का संचालन डा&period; आरोही आनंद ने किया। इस अवसर पर एसबीयू के शिक्षकगण और शिक्षकेत्तर कर्मचारी भी उपस्थित रहे। एसबीयू के प्रतिकुलाधिपति बिजय कुमार दलान और राज्यसभा सांसद डा&period; प्रदीप कुमार वर्मा ने इस कार्यक्रम के आयोजन पर अपनी शुभकामनाएं दी।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<figure class&equals;"wp-block-image size-full"><img src&equals;"https&colon;&sol;&sol;mauryanews18&period;com&sol;wp-content&sol;uploads&sol;2025&sol;06&sol;Screenshot&lowbar;20250601-1003072&period;png" alt&equals;"" class&equals;"wp-image-3803"&sol;><&sol;figure>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>प्रकृति संरक्षण के बारे में बेबाकी से रखे अपने विचार &colon;<&sol;strong><br>मिलेट मैन के नाम से मशहूर खाद्य और पोषण विशेषज्ञ डा&period; खादर वली पिछले ढाई दशकों से भी ज्यादा समय से देश के लोगों को मोटे अनाज को अपने आहार में शामिल करने के लिए प्रेरित करते रहे हैं। वे बाजरे की प्रजातियों से निर्मित श्रीधान्य को कई गंभीर बीमारियों के ईलाज का विकल्प मानते हैं। इसे लेकर उन्होंने देश-विदेश में बड़े पैमाने पर जागरुकता कार्यक्रम चलाया है। मैसूर के केंद्रीय खाद्य  प्रौद्योगिकी अनुसंधान संस्थान में वैज्ञानिक रहे डा&period; वली विदेशों में भी काफी समय तक रहे। लेकिन अंततः देश में स्वास्थ्य के प्रति लोगों को जागरुक करने के लिए उन्होंने भारत में ही रहने का फैसला किया। प्रकृति संरक्षण के बारे में बेबाकी से अपने विचार रखने वाले डा&period; वली बाजरे को ग्लोबल वाॅर्मिंग कम करने और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में मददगार मानते हैं। उनका मानना है कि अगर देश में सकारात्मक तरीके से खेती की जाए&comma; तो आने वाले 50 वर्षों के भीतर देश को सूखे की समस्या से पूरी तरह से निजात मिलेगी। वर्ष 2023 में केंद्र सरकार ने उनको पद्मश्री से सम्मानित किया।<br><strong>Maurya News18 Ranchi&period;<&sol;strong><br><&sol;p>&NewLine;

NO COMMENTS

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Exit mobile version