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हाईकोर्ट ने बिहार नगरपालिका कानून में संशोधन को बताया असंवैधानिक, नीतीश सरकार को झटका

&NewLine;<figure class&equals;"wp-block-image size-full"><img src&equals;"https&colon;&sol;&sol;mauryanewslive18&period;files&period;wordpress&period;com&sol;2023&sol;11&sol;c545f-patna-high-court-94967546&period;png" alt&equals;"" class&equals;"wp-image-630" &sol;><&sol;figure>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<h2 class&equals;"wp-block-heading" id&equals;"h-न-त-श-सरक-र-क-झटक"><strong>नीतीश सरकार को झटका<&sol;strong><&sol;h2>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>पटना हाईकोर्ट ने बिहार नगरपालिका कानून में किए गए संशोधन को असंवैधानिक करार दिया। साथ ही आदेश की प्रति तत्काल राज्य के मुख्य सचिव को भेजने का आदेश दिया। अदालत ने कहा कि निकायों में तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के कर्मियों की नियुक्ति&comma; स्थानांतरण का अधिकार निगम के अधिकार क्षेत्र में ही रहेगा।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>संशोधन की वैधता को दी गई थी चुनौती<&sol;strong><br>बिहार नगरपालिका कानून&comma; 2007 में संशोधन 31 मार्च 2021 को किया गया था। इसकी वैधता को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। बिहार म्युनिसिपल कानून के अध्याय पांच की धारा 36&comma; 37&comma; 38&comma; 40ए&comma; 41 तथा 43 की वैधता तथा पिछले वर्ष 31 मार्च को धारा 36&comma; 37&comma; 38 तथा 41 में किये गये संशोधन को चुनौती दी गई थी। सभी याचिकाओं पर कोर्ट ने लम्बी सुनवाई के बाद 13 अक्टूबर को अपना फैसला सुरक्षित कर लिया था। जिसे शुक्रवार को वर्चुअल जारी किया।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<figure class&equals;"wp-block-image size-full"><img src&equals;"https&colon;&sol;&sol;mauryanewslive18&period;files&period;wordpress&period;com&sol;2023&sol;11&sol;46e9f-768-512-14053738-877-14053738-1640877880938&period;jpg" alt&equals;"" class&equals;"wp-image-622" &sol;><&sol;figure>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>दोनों पक्षों ने रखी दलीलें<&sol;strong><br>नगरपालिका कानून में किये गये संशोधनों को चुनौती देने वाली अर्जी पर हाईकोर्ट की महिला युवा वकील मयूरी&comma; सूर्या नीलाम्बरी ने दलीलें पेश की। वहीं&comma; कोर्ट मित्र के रूप में आशीष गिरी ने पक्ष रखा जबकि राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता ललित किशोर ने पक्ष रखा।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>शुक्रवार को मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजय करोल तथा न्यायमर्ति एस कुमार की खंडपीठ ने आधा दर्जन रिट याचिकाओं पर 143 पन्ने का आदेश जारी किया। खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि नगर निगम की सशक्त स्थायी समिति एक स्वतंत्र निर्वाचित संस्था है। उस पर राज्य सरकार या कोई अन्य संस्था अपना अधिकार नहीं जता सकती। कोर्ट ने कहा कि 74वें संविधान संशोधन के बाद नगर निकाय को संवैधानिक अधिकार प्राप्त है। उसकी शक्ति को कम करना या खत्म करना असंवैधानिक माना जायेगा।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>अपने फैसले में कोर्ट ने बिहार नगरपालिका राजस्व और लेखा संवर्ग नियम तथा बिहार नगर लिपिक संवर्ग नियम में किये गए संशोधन को नगर अधिनियम की धारा 38 के तहत असंगत करार दिया। साथ ही स्पष्ट किया कि निगम के तृतीय और चतुर्थ श्रेणी श्रेणी के कर्मियों की नियुक्ति&comma; स्थानांतरण का अधिकार निकाय के अधिकार क्षेत्र में ही रहेगा।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;

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